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दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला यूट्यूबर से कथित बदसलूकी, छात्र संगठनों में टकराव

Ruchi Tiwari Delhi University Protest Controversy: दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला यूट्यूबर से कथित बदसलूकी का मामला
Ruchi Tiwari Delhi University Protest Controversy: दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला यूट्यूबर से कथित बदसलूकी का मामला (Image Source: Internet Media)

Ruchi Tiwari Delhi University Protest Controversy: दिल्ली विश्वविद्यालय में यूजीसी गाइडलाइन्स के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान महिला यूट्यूबर रुचि तिवारी से कथित बदसलूकी और जाति आधारित टिप्पणी का आरोप लगा। एबीवीपी ने वामपंथी संगठनों पर हमले का आरोप लगाया जबकि आईसा ने सभी आरोपों को खारिज किया। पुलिस जांच जारी है।

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Ruchi Tiwari Delhi University Protest Controversy: दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में एक बार फिर छात्र राजनीति ने तूल पकड़ लिया है। यूजीसी की नई गाइडलाइन्स के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन के बीच महिला यूट्यूबर रुचि तिवारी के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आया है। इस घटना ने न सिर्फ कैंपस में तनाव का माहौल बना दिया है, बल्कि विभिन्न छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की एक नई बहस भी छेड़ दी है। देर रात तक मॉरिस नगर थाने के बाहर नारेबाजी और हंगामे का दौर जारी रहा।

घटना की शुरुआत कैसे हुई

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन्स को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में कुछ छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इन गाइडलाइन्स का समर्थन करने वाले छात्रों ने कैंपस में जमावड़ा लगाया था। इसी बीच यूट्यूबर रुचि तिवारी वहां खबर की कवरेज करने के लिए पहुंचीं। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उनसे उनकी जाति के बारे में सवाल किया। जब उन्होंने अपना नाम तिवारी बताया तो कथित तौर पर उन्हें ब्राह्मण होने के आधार पर निशाना बनाया गया।

रुचि तिवारी के आरोप

रुचि तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपने साथ हुई घटना का विवरण साझा किया है। उनका दावा है कि प्रदर्शन में शामिल भीड़ ने उनके साथ हाथापाई की और उन्हें धक्के दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके बाल खींचे और उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश भी की गई। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लड़कियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। रुचि ने घटना से संबंधित कुछ वीडियो क्लिप भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

एबीवीपी का पक्ष और विरोध

घटना की खबर फैलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे महिला पत्रकार पर सीधा हमला बताया। एबीवीपी का आरोप है कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठनों ने महिला यूट्यूबर को जानबूझकर निशाना बनाया। संगठन के पदाधिकारियों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। एबीवीपी ने मांग की है कि जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है, उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें सजा मिले। संगठन के सदस्यों ने देर रात तक थाने के बाहर नारेबाजी की और न्याय की मांग करते रहे।

आईसा का जवाब और पलटवार

वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आईसा ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और किसी के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई। आईसा के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यूट्यूबर रुचि तिवारी ने खुद उकसावे वाली हरकतें कीं, जिसकी वजह से धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। संगठन ने जाति आधारित टिप्पणी करने के सभी आरोपों को गलत बताया है। आईसा ने उल्टा एबीवीपी पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है और झूठे आरोप लगाकर कैंपस में तनाव फैला रहा है।

पुलिस की जांच और कानूनी पहलू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों ने मॉरिस नगर पुलिस थाने में एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे कथित छेड़छाड़, मारपीट और धमकी के आरोपों की पूरी तरह से जांच कर रहे हैं। पुलिस ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं और सीसीटीवी फुटेज की भी समीक्षा की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रशासन ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कैंपस में किसी भी तरह की हिंसा और बदसलूकी की कड़ी निंदा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वे छात्रों की सुरक्षा और कैंपस में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रशासन ने दोनों छात्र संगठनों से संयम बरतने और कानून का सम्मान करने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

कैंपस राजनीति और व्यापक मुद्दे

यह घटना एक बार फिर कैंपस राजनीति की जटिलताओं को उजागर करती है। दिल्ली विश्वविद्यालय में पहले भी विभिन्न छात्र संगठनों के बीच टकराव की घटनाएं होती रही हैं। यूजीसी की नई गाइडलाइन्स को लेकर पहले से ही कैंपस में बहस चल रही थी। कुछ छात्र संगठन इन गाइडलाइन्स का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। इस पूरे मामले में जाति आधारित टिप्पणी के आरोप ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या कैंपस में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है या नहीं।

सोशल मीडिया पर बहस

Ruchi Tiwari Delhi University Protest Controversy: इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया पर भी जोरदार बहस छेड़ दी है। कुछ लोग रुचि तिवारी के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं और महिला सुरक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स आईसा के बयान को सही मान रहे हैं और उकसावे के आरोपों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं तो कुछ इसे पूरी तरह से व्यक्तिगत मामला मान रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यह मामला अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा है बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

आगे क्या होगा

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। यह देखना बाकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और किस पक्ष के आरोप सही साबित होते हैं। कैंपस में तनाव अभी भी बना हुआ है और छात्र संगठनों के बीच नोकझोंक जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस दोनों ही स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और कैंपस में शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।