जांच में आया अहम मोड़
Air India 787 Dreamliner Ahmedabad crash findings: अहमदाबाद में पिछले साल जून 2025 में हुई एयर इंडिया की उड़ान 171 की दुर्घटना की जांच में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। इटली के प्रमुख अखबार कोरिएरे डेला सेरा में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं का अब यह मानना है कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि जानबूझकर किए गए किसी कदम का नतीजा था। यह जानकारी उन सूत्रों से मिली है जो भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हो रही बातचीत से जुड़े हैं।
इस भयानक हादसे में कुल 260 लोगों की जान गई थी, जो पिछले कई दशकों में भारत की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में से एक है। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान एक मेडिकल छात्रावास पर गिरा, जिसके कारण विमान में सवार यात्रियों के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लोग भी मारे गए। हैरानी की बात यह है कि इस हादसे में केवल एक यात्री बच पाया था।
तकनीकी खराबी से हटकर मानवीय कार्रवाई पर शक
दुर्घटना के तुरंत बाद शुरुआती अनुमान तकनीकी खराबी या प्रक्रियागत गलती की ओर इशारा कर रहे थे। लेकिन जुलाई 2025 में भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB द्वारा जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में एक अहम खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान के ईंधन नियंत्रण स्विच को “रन” की जगह “कट-ऑफ” पोजीशन में कर दिया गया था, जिससे इंजन में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई।
कॉकपिट की आवाज़ की रिकॉर्डिंग में एक अजीब बातचीत सामने आई। एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि ईंधन क्यों काट दिया गया। जवाब में उसने इनकार किया। इस बातचीत ने अंतिम क्षणों में कॉकपिट में हुई गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
हालांकि सरकार ने अब तक सीधे तौर पर उड़ान के चालक दल को दोषी नहीं ठहराया है, लेकिन इतालवी अखबार के मुताबिक जांचकर्ताओं का अब यह मानना है कि ईंधन के स्विच को जानबूझकर कैप्टन सुमीत सभरवाल ने बदला था। उस समय फर्स्ट ऑफिसर की ड्यूटी पर क्लाइव कुंदर थे।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सहायता कर रहे अमेरिकी विशेषज्ञों ने इन निष्कर्षों को एक “बड़ी सफलता” बताया है। अब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
आरोप और परिवार की प्रतिक्रिया
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कैप्टन सभरवाल मानसिक तनाव से जूझ रहे थे, जिसने इस मामले में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, उनके परिवार ने इस तरह के सुझावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनके पिता ने सार्वजनिक रूप से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े आरोपों को नकारा और व्यक्तिगत मुद्दों को मानसिक परेशानी से जोड़ने वाली रिपोर्टों का खंडन किया। उन्होंने एक नई और पारदर्शी जांच की मांग भी की है।
पायलट संघों ने भी शुरुआती निष्कर्षों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है और अधिकारियों से आग्रह किया है कि ठोस सबूत के बिना किसी को दोषी न ठहराया जाए।
तकनीकी जानकारी और अंतिम पल
विमान के ब्लैक बॉक्स से मिले आंकड़ों ने तकनीकी खराबी की संभावना को खारिज कर दिया। जांचकर्ताओं ने पाया कि बाएं इंजन को, जो कैप्टन की तरफ था, दाएं इंजन से पहले बंद कर दिया गया था। विमान के अंतिम क्षणों में फर्स्ट ऑफिसर ने ऊंचाई हासिल करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए, जबकि कैप्टन के नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं दिखा।
मुख्य तकनीकी निष्कर्ष यह है कि इंजन की चालू व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले स्विच को हाथ से बदला गया था। यह एक बेहद अहम कदम था, खासकर उस समय जब विमान ने अभी-अभी उड़ान भरी थी और अधिकतम शक्ति की जरूरत थी।
अंतिम रिपोर्ट में पायलटों के लिए सख्त मनोवैज्ञानिक जांच और मानसिक स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी की सिफारिश किए जाने की उम्मीद है। यह वैश्विक विमानन सुरक्षा में एक संवेदनशील लेकिन बढ़ती हुई चर्चा का विषय है।
राष्ट्र भारत की राय
यह मामला बताता है कि विमान दुर्घटनाओं की जांच कितनी जटिल और नाजुक हो सकती है। यदि अंतिम रिपोर्ट जानबूझकर की गई मानवीय कार्रवाई की पुष्टि करती है, तो यह न केवल भारत बल्कि वैश्विक विमानन सुरक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चिंता का विषय होगा।
लेकिन यह समझना जरूरी है कि फिलहाल ये निष्कर्ष अनाम सूत्रों और प्रारंभिक व्याख्याओं पर आधारित हैं। जब तक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA और AAIB अपनी अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं करते, तब तक किसी भी तरह की जिम्मेदारी तय करना अनुमान पर आधारित ही है।
Air India 787 Dreamliner Ahmedabad crash findings: विमान दुर्घटनाओं में सबूत आधारित निष्कर्ष जरूरी हैं, न कि कहानी आधारित। कॉकपिट की बातचीत गंभीर सवाल खड़े करती है, लेकिन संदर्भ भी मायने रखता है, जिसमें तनाव का स्तर, सिस्टम अलर्ट, संभावित भ्रम या दुर्लभ सिस्टम विसंगतियां शामिल हैं।
यदि मानसिक स्वास्थ्य निगरानी एक औपचारिक सिफारिश बनती है, तो इसे सावधानी से लागू किया जाना चाहिए। पायलटों को तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को रिपोर्ट करने में सुरक्षित महसूस करना चाहिए, बिना करियर को नुकसान पहुंचने के डर के। वरना नतीजा सुरक्षा नहीं, बल्कि चुप्पी होगी।
अंततः, यह त्रासदी 260 लोगों की जान खोने के बारे में है। जांच को पारदर्शिता, तकनीकी स्पष्टता और निष्पक्षता को प्राथमिकता देनी चाहिए। ठोस सबूत के बिना दोष लगाना दुख के साथ अन्याय को जोड़ने जैसा है।
विमानन समुदाय और उन लोगों के परिवार जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, वे तथ्य के हकदार हैं, अनुमान के नहीं।