जरूर पढ़ें

GRAP-3: Gurugram air pollution level hazardous, गुरुग्राम में ग्रेप-3 नियमों की अनदेखी से हवा बनी जहर

GRAP-3
GRAP-3: Gurugram air pollution level hazardous, गुरुग्राम में ग्रेप-3 नियमों की अनदेखी से हवा बनी जहर
गुरुग्राम में GRAP-3 के नियमों की अनदेखी से वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो गया है। निर्माण प्रतिबंध और सफाई नियमों के उल्लंघन से एक्यूआइ 350 पार पहुंच गया। स्मॉग और धूल के कारण शहर में सांस लेना मुश्किल हो गया है, जबकि प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है।
Updated:

GRAP-3: ग्रेप-3 की अनदेखी से गुरुग्राम में वायु संकट गहराया

गुरुग्राम में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन द्वारा लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-3) के नियमों की अनदेखी के चलते शहर की हवा जहरीली हो चुकी है। बुधवार को शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 350 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। मानेसर में यह स्तर 254 रहा। इस भयावह स्थिति ने शहरवासियों को गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल दिया है।

स्मॉग की चादर और बिगड़ती दृश्यता

सुबह से ही शहर पर स्मॉग की परत छाई रही। दृश्यता घटने के कारण वाहन चालकों को परेशानी हुई और राहगीरों को आंखों में जलन, गले में खराश तथा सिरदर्द जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा। प्रदूषण के इस स्तर ने आम लोगों का जीवन कठिन बना दिया है, जबकि ठंडी हवाओं के कारण यह धुआं और धूल वातावरण में जमी हुई है।

जमीनी स्तर पर नियमों का न पालन

ग्रेप-3 के तहत निर्माण गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, परंतु शहर के कई हिस्सों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के इंतज़ाम नहीं हैं, सड़कों पर पानी का छिड़काव नाम मात्र का हो रहा है, और खुले में कचरा जलाने की घटनाएं आम हो चुकी हैं।

नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किए जाने के बावजूद उल्लंघन जारी है। यही कारण है कि प्रदूषण स्तर 350 के पार चला गया है, जो सामान्य सीमा से कई गुना अधिक है।

स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हवा में लंबे समय तक रहना फेफड़ों और हृदय के लिए अत्यंत हानिकारक है। वरिष्ठ चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा के मरीज विशेष रूप से संवेदनशील हैं और उन्हें घरों में रहना चाहिए। सुबह-शाम के समय बाहर निकलने से बचना ही उचित रहेगा।

ग्रेप-3 के अंतर्गत लागू प्रतिबंध

ग्रेप-3 के तीसरे चरण में कई सख्त निर्देश लागू किए गए हैं, जिनमें मशीनों और वैक्यूम आधारित सड़क सफाई, रोजाना पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण सामग्री का प्रयोग शामिल है। एकत्रित धूल को निर्धारित स्थलों पर निस्तारित करने का भी आदेश दिया गया है।

निर्माण कार्यों में केवल गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियों — जैसे प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल फिटिंग, कारपेंट्री और इंटीरियर फिनिशिंग — की अनुमति दी गई है। वहीं, स्टोन क्रशर और माइनिंग गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है।

प्रशासन की सख्ती पर सवाल

GRAP-3: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित है। सड़कों पर धूल उड़ती रहती है, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे और पानी का छिड़काव केवल दिखावे के लिए हो रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि, “ग्रेप-3 के तहत जो भी नियम तोड़े जा रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव किया जाए और कचरा जलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।”

राहत कब मिलेगी?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक स्थिति में सुधार की संभावना नहीं है। ठंडी हवाओं और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक तत्व वायुमंडल में जमे रहेंगे। यदि प्रशासन और नागरिक दोनों स्तरों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो आने वाले सप्ताहों में हालात और खराब हो सकते हैं।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।