हरियाणा में इन दिनों सब्जी उत्पादक किसान कम दाम से परेशान हैं। मंडियों में आलू और गोभी के दाम इतने नीचे चले गए कि किसानों को लागत तक निकालना मुश्किल हो गया। ऐसे समय में प्रदेश सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने साफ किया है कि जिन किसानों को कम दाम के कारण नुकसान हुआ है, उन्हें भावांतर भरपाई योजना के तहत सहायता दी जाएगी।
सरकार ने यह भी बताया है कि फसलों के भौतिक सत्यापन की अंतिम तिथि 20 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। इससे उन किसानों को समय मिल जाएगा जो अब तक अपनी फसल का सत्यापन नहीं करवा पाए थे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब बड़ी संख्या में किसान योजना का लाभ लेने के लिए आगे आए हैं।
किसानों को मिलेगा भाव का अंतर
भावांतर भरपाई योजना का मकसद यह है कि अगर मंडी में फसल का दाम सरकार द्वारा तय संरक्षित मूल्य से कम मिलता है, तो उस अंतर की भरपाई सरकार करेगी। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है।
बीते दिनों 17 जनवरी को भी सरकार ने आलू और फूलगोभी की खेती करने वाले 4073 किसानों को करीब 20 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। यह राशि भावांतर के रूप में दी गई थी। इससे यह साफ है कि सरकार इस योजना को जमीन पर लागू करने के लिए सक्रिय है।
उद्यान विभाग के अनुसार, किसानों की बढ़ती भागीदारी और उनके आर्थिक नुकसान को देखते हुए भौतिक सत्यापन की तिथि आगे बढ़ाई गई है। इससे ज्यादा से ज्यादा किसान योजना का लाभ ले सकेंगे।
अन्य बागवानी फसलों को भी मिला लाभ
अब यह योजना केवल आलू और गोभी तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने टमाटर, भिंडी, प्याज, घीया, करेला, मिर्च, शिमला मिर्च, बैगन, लीची और आम जैसी फसलों को भी इसमें शामिल किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बागवानी करने वाले किसानों को भी राहत मिल सके।
टमाटर के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल और प्याज के लिए 650 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य तय किया गया है। इन दोनों फसलों के लिए 15 फरवरी तक पंजीकरण कराना जरूरी है। इसके बाद 15 मार्च तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
भिंडी के लिए 1050 रुपये, घीया के लिए 450 रुपये, करेला के लिए 1350 रुपये और मिर्च के लिए 950 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य रखा गया है। इन चारों फसलों के लिए 31 मार्च तक पंजीकरण कराया जा सकेगा और इसी अवधि में सत्यापन भी होगा।
शिमला मिर्च का संरक्षित मूल्य 900 रुपये और बैगन का 500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इनके लिए 15 मार्च तक पंजीकरण और 31 मार्च तक सत्यापन का समय दिया गया है। लीची के लिए 2400 रुपये और आम के लिए 1950 रुपये प्रति क्विंटल संरक्षित मूल्य रखा गया है।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण जरूर कराएं। बिना पंजीकरण के योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए समय सीमा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
कई बार देखा गया है कि किसान जानकारी के अभाव में योजना से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में कृषि विभाग और उद्यान विभाग को भी चाहिए कि वे गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं। पंचायत और किसान समूहों के माध्यम से जानकारी पहुंचाई जाए ताकि कोई भी किसान छूट न जाए।
बाजार की समस्या और सरकार की जिम्मेदारी
सब्जी की खेती में जोखिम ज्यादा होता है। मौसम की मार, लागत में बढ़ोतरी और बाजार में गिरते दाम किसानों की कमर तोड़ देते हैं। ऐसे में भावांतर भरपाई जैसी योजना किसानों को सहारा देती है। हालांकि यह भी जरूरी है कि मंडियों में दाम स्थिर रखने के लिए लंबे समय की नीति बनाई जाए।
सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि भुगतान समय पर हो और प्रक्रिया सरल रहे। यदि भुगतान में देरी होगी तो किसानों को राहत मिलने का मकसद अधूरा रह जाएगा।
हरियाणा में बड़ी संख्या में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ बागवानी की ओर भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनकी आय सुरक्षित करना राज्य की जिम्मेदारी है। भावांतर भरपाई योजना का विस्तार इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
यदि योजना पारदर्शी ढंग से लागू होती है और सभी पात्र किसानों तक समय पर सहायता पहुंचती है, तो यह किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। आने वाले समय में इसका असर किसानों की आय और खेती के रुझान पर भी दिखाई दे सकता है।