Rashtra Bharat Logo

Kashmir Terrorism: कश्मीर में फिर लौट रही एजीएच की छाया, ब्रेनवॉश हुए डॉक्टरों ने खोला नया आतंकी नेटवर्क

Kashmir Terrorism: कश्मीर में फिर लौट रही एजीएच की छाया, ब्रेनवॉश हुए डॉक्टरों ने खोला नया आतंकी नेटवर्क
Kashmir Terrorism: कश्मीर में फिर लौट रही एजीएच की छाया, ब्रेनवॉश हुए डॉक्टरों ने खोला नया आतंकी नेटवर्क

जाकिर मूसा की मौत के बाद खत्म माने गए अंसार गजवात-उल-हिंद के फिर सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। डॉक्टर आदिल और मुजम्मिल की गिरफ्तारी से उजागर हुआ कि आतंक का नया नेटवर्क शिक्षित वर्ग में फैल रहा है। कश्मीर से एनसीआर तक फैले इस ब्रेनवॉश नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया है।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

Kashmir Terrorism: कश्मीर में अंसार गजवात-उल-हिंद की फिर वापसी की आशंका

कश्मीर घाटी में एक बार फिर आतंक की परछाइयां गहराती दिख रही हैं। जाकिर मूसा की मौत के बाद खत्म माने गए आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद (एजीएच) के पुनरुत्थान के संकेत मिलने लगे हैं। हाल में गिरफ्तार किए गए डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल की गिरफ्तारी ने सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया है। दोनों ही उच्च शिक्षित होने के बावजूद इस्लामी कट्टरपंथ से प्रभावित होकर आतंक के रास्ते पर चले गए।

सफेदपोश आतंक का नया चेहरा

एनसीआर और उत्तर प्रदेश में हुई गिरफ्तारियों से यह बात सामने आई है कि एजीएच अब पुराने ढांचे के बजाय एक सफेदपोश नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है। ये लोग धार्मिक कट्टरता की आड़ में नई पीढ़ी को प्रभावित कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों जैसे शिक्षित वर्ग का इस तरह आतंक से जुड़ना इस प्रवृत्ति के नए खतरनाक आयाम को दर्शाता है।

जाकिर मूसा से प्रेरित थे दोनों डॉक्टर

डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल दोनों ही आतंकवादी जाकिर मूसा और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर से प्रेरित बताए गए हैं। दोनों पर आरोप है कि वे ऑनलाइन माध्यम से जिहादी विचारधारा फैलाने में सक्रिय थे। उनके मोबाइल और लैपटॉप से कई संदिग्ध संदेश, वीडियो और धार्मिक उकसावे वाली सामग्री बरामद की गई है।

मूसा का सफर और संगठन की स्थापना

जाकिर मूसा ने हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर जुलाई 2017 में अंसार गजवात-उल-हिंद की स्थापना की थी। त्राल निवासी मूसा ने आतंक को पाकिस्तानी परस्ती से अलग कर शरियत की स्थापना से जोड़ दिया था। उसने कश्मीर के हुर्रियत नेताओं को भी धमकी दी थी, जो राजनीतिक हलकों में हलचल का कारण बना। मूसा ने अल-कायदा से आधिकारिक रूप से नाता जोड़ा, और उसके मुखपत्र अल हूर पर इसकी पुष्टि हुई।

अल-कायदा के नेटवर्क से जुड़े तार

मूसा के संगठन के तार न केवल कश्मीर, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सीरिया तक फैले थे। मई 2019 में मूसा के मारे जाने के बाद उसके सहयोगी हमीद ने कमान संभाली, पर वह भी कुछ महीनों में मारा गया। इसके बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने एजीएच के सफाए की घोषणा की थी।

पुलिस की सतर्कता और पुराने प्रयास

Kashmir Terrorism: मूसा की मौत के बाद भी कई बार इस संगठन के पुनर्जीवित होने के प्रयास हुए। जुलाई 2021 में उत्तर प्रदेश में दो एजीएच आतंकी पकड़े गए थे। जनवरी 2022 में गाज़ीपुर में हुए ग्रेनेड हमले के प्रयास ने भी इसी नेटवर्क के होने के संकेत दिए थे। अप्रैल 2021 में कश्मीर में सात आतंकियों के मारे जाने के बाद पुलिस ने एक बार फिर एजीएच के सफाए की घोषणा की थी, लेकिन अब एक बार फिर इसके नए रूप में लौटने की आशंका गहराने लगी है।

कट्टरपंथी विचारधारा की नई चुनौती

कश्मीर में शिक्षित वर्ग का आतंक से जुड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मानसिक ब्रेनवॉश का परिणाम है जो सोशल मीडिया और धार्मिक मंचों के जरिए फैलाया जा रहा है। ऐसी विचारधाराएं न केवल युवा पीढ़ी को भ्रमित कर रही हैं, बल्कि घाटी में अमन की कोशिशों को भी कमजोर कर रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति

जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब ऐसे “वाइट कॉलर” आतंकियों की पहचान पर फोकस कर रही हैं जो शिक्षा और पेशे की आड़ में आतंक के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियां भी इन मामलों में समन्वय बना रही हैं ताकि किसी बड़े नेटवर्क को पनपने से रोका जा सके।

एजीएच की संभावित वापसी इस बात का संकेत है कि आतंकवाद का चेहरा अब बदल रहा है। बंदूक और ग्रेनेड से ज्यादा खतरनाक अब विचारधारा का जहर बन चुका है। ऐसे में देश की सुरक्षा व्यवस्था को न केवल हथियारों के खिलाफ, बल्कि मानसिक ब्रेनवॉश के खिलाफ भी मजबूती से लड़ना होगा।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।