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झारखंड में ‘गुलगुलिया गैंग’ का पर्दाफाश: चंगुल से छुड़ाए गए 12 बच्चे, 16 तस्कर गिरफ्तार

झारखंड में ‘गुलगुलिया गैंग’ का पर्दाफाश: चंगुल से छुड़ाए गए 12 बच्चे, 16 तस्कर गिरफ्तार
झारखंड में 'गुलगुलिया गैंग' का पर्दाफाश: चंगुल से छुड़ाए गए 12 बच्चे (Credit- X @ranchipolice)

रांची पुलिस ने मानव तस्करी के बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए 12 बच्चों को मुक्त कराया और 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह गरीब परिवारों के बच्चों को अगवा कर चोरी, भीख और देह व्यापार में धकेलता था।

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Dipali Kumari
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Jharkhand Human Trafficking: झारखंड में मानव तस्करी की एक और भयावह सच्चाई सामने आई है, जहां मासूम बच्चों को अगवा कर उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक संगठित गिरोह का रांची पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने न सिर्फ 12 बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया है, बल्कि इस अमानवीय धंधे में शामिल 16 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैले एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

कैसे खुला मानव तस्करी के गिरोह का राज

इस पूरे मामले की शुरुआत धुर्वा थाना क्षेत्र से अगवा किए गए दो मासूम बच्चों, अंश और अंशिका, की तलाश से हुई। दोनों बच्चों के अचानक गायब हो जाने के बाद पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन, तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने एक के बाद एक कड़ियां जोड़ते हुए इस गिरोह तक पहुंच बनाई।

जांच के दौरान पुलिस को यह साफ हो गया कि यह कोई स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित बच्चा चोर गिरोह है, जो लंबे समय से सक्रिय था। इसी कड़ी में अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

12 बच्चों को दिलाई गई नई जिंदगी

पुलिस की इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू 12 बच्चों की सुरक्षित बरामदगी रही। इन बच्चों को धनबाद, बोकारो, चाईबासा और रांची के अलग-अलग इलाकों से मुक्त कराया गया। फिलहाल सभी बच्चों को धुर्वा थाना में सुरक्षित रखा गया है, जहां उनकी देखरेख और काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है।

अब पुलिस इन बच्चों के परिजनों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द उनके परिवारों से मिलाया जा सके।

बच्चों से कराया जाता था अमानवीय काम

रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने इस गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि अगवा किए गए बच्चों से चोरी, जबरन भीख मंगवाने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां कराई जाती थीं। यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता था, क्योंकि ऐसे मामलों में शिकायत और दबाव कम होता है।

लड़कियों के साथ देह व्यापार का आरोप

जांच में सामने आया कि जिन लड़कियों को यह गिरोह उठाता था, उन्हें बड़े होने पर देह व्यापार में धकेल दिया जाता था। यह जानकारी पुलिस और समाज दोनों के लिए झकझोर देने वाली है। बच्चों की उम्र, मासूमियत और मजबूरी को इस गिरोह ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया।

गुलगुलिया गैंग का अंतरराज्यीय नेटवर्क

पुलिस के अनुसार यह गिरोह ‘गुलगुलिया गैंग’ के नाम से जाना जाता है, जो बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से संचालित हो रहा था। गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत था कि बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में बेच दिया जाता था।

बच्चों की खरीद-फरोख्त में बड़े नाम

एसएसपी ने बताया कि झारखंड से चुराए गए कई बच्चों को बिहार के औरंगाबाद निवासी अशोक सिंह और बाबू साहेब के अलावा पश्चिम बंगाल के सूरज रवानी ने खरीदा था। अंश और अंशिका को भी बेचने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। सौदा तय था, एडवांस राशि ली जा चुकी थी। गिरफ्तार दंपति पहले भी लाखों रुपये में बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मानव अंग तस्करी से सीधे संबंध के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इस एंगल से भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच जारी रहेगी।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।