Bengaluru Metro Fare Hike Paused, Tejasvi Surya: बेंगलुरु की मेट्रो सेवा में किराया बढ़ोतरी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। BMRCL (बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने सोमवार से लागू होने वाली 5 प्रतिशत किराया वृद्धि को रोक दिया है। यह फैसला लोगों के तीव्र विरोध और राजनीतिक दबाव के बाद लिया गया। छोटी दूरी की यात्रा पर एक रुपये और लंबी यात्रा पर पांच रुपये की बढ़ोतरी से यात्रियों को राहत मिली है, लेकिन इस मुद्दे पर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
किराया बढ़ोतरी क्यों रोकी गई
BMRCL ने सोमवार सुबह से लागू होने वाली किराया वृद्धि को अचानक स्थगित कर दिया। यह निर्णय तब आया जब देश भर में बेंगलुरु मेट्रो को पहले से ही सबसे महंगी मेट्रो सेवा माना जाता है। पिछले साल हुई बड़ी किराया वृद्धि के बाद से ही यात्रियों में नाराजगी थी। इस बार की 5 प्रतिशत बढ़ोतरी ने विरोध की आग में घी का काम किया।
RV रोड समेत कई मेट्रो स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन हुए। BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने एक खास टी-शर्ट पहनकर विरोध जताया, जिस पर राज्य समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वापस ली गई सब्सिडी का जिक्र था। सार्वजनिक आक्रोश और राजनीतिक दबाव को देखते हुए BMRCL ने अंततः किराया वृद्धि को रोकने का फैसला लिया।
Why is Bengaluru Metro among the costliest in the country? Why did the State Government repeatedly seek fare revision?
Because weak finances, driven by poor governance and mismanagement, forced the State to withdraw the shadow cash support that earlier governments consistently… pic.twitter.com/M817TU3J9X
— Tejasvi Surya (@Tejasvi_Surya) February 8, 2026
BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस मामले में राजनीति का रंग गहरा होता जा रहा है। BJP सांसदों ने इस किराया वृद्धि को रोकने का श्रेय केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप को दिया। उनका दावा है कि केंद्र सरकार के दबाव में ही यह फैसला टाला गया। दूसरी ओर, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने इसे पाखंड करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप है कि BMRCL के बोर्ड में केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसलिए इस फैसले की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि अगर केंद्र सरकार यात्रियों के हित में है, तो पहले ही यह वृद्धि क्यों प्रस्तावित हुई।
तेजस्वी सूर्या की हिरासत और विवाद
बेंगलुरु के BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने किराया वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सूर्या ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह वृद्धि गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालती।
उन्होंने एक टी-शर्ट पहनी थी जिस पर राज्य की एक समिति की रिपोर्ट का हवाला था, जिसमें मेट्रो सब्सिडी वापस लेने का जिक्र था। सूर्या का कहना है कि राज्य सरकार ने जानबूझकर सब्सिडी घटाई है, जिससे किराया बढ़ाना पड़ा।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने तेजस्वी सूर्या और BJP पर पलटवार करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नाटक है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि BMRCL एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है। बोर्ड की बैठकों में केंद्र के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं और वे भी किराया वृद्धि के फैसलों में हिस्सेदार हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि BJP सार्वजनिक विरोध देखकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार वाकई यात्रियों के पक्ष में थी, तो बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को पहले ही रोक देती।
बेंगलुरु मेट्रो की किराया संरचना
बेंगलुरु मेट्रो की किराया दरें पहले से ही देश में सबसे अधिक मानी जाती हैं। पिछले साल भी किराए में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद से यात्री लगातार शिकायत कर रहे हैं। अब प्रस्तावित 5 प्रतिशत वृद्धि से छोटी दूरी की यात्रा में एक रुपये और लंबी यात्रा में पांच रुपये तक का अतिरिक्त खर्च होता।
हालांकि यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन नियमित यात्रियों के लिए महीने भर में यह बड़ी रकम बन जाती है। विशेष रूप से कामकाजी लोग और छात्र जो रोज मेट्रो का उपयोग करते हैं, उन पर इसका सीधा असर पड़ता।
BMRCL बोर्ड की भूमिका
Bengaluru Metro Fare Hike Paused, Tejasvi Surya: BMRCL का बोर्ड केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों से मिलकर बना है। किराया वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण फैसले बोर्ड की बैठकों में लिए जाते हैं। इसलिए किसी एक पक्ष को पूरी जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।
अब बोर्ड ने किराया वृद्धि की समीक्षा करने का फैसला किया है। अगली बैठक में इस मामले पर विस्तार से चर्चा होगी। बोर्ड यह तय करेगा कि किराया वृद्धि को स्थायी रूप से रद्द किया जाए या फिर कुछ समय के लिए टाला जाए।
यात्रियों की राहत
फिलहाल यात्रियों को राहत मिली है कि उन्हें अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। मेट्रो स्टेशनों पर हुए विरोध प्रदर्शनों ने असर दिखाया। लोगों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी आवाज बुलंद की, जिससे सरकार और BMRCL पर दबाव बना।
हालांकि, यह भी सच है कि मेट्रो सेवाओं को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। सब्सिडी घटने से मेट्रो प्रशासन पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। इसलिए दीर्घकालिक समाधान खोजना जरूरी है।
आगे क्या होगा
BMRCL बोर्ड की अगली बैठक में किराया संरचना पर फिर से विचार होगा। राजनीतिक दलों को इस मामले को जनता के हित में सुलझाना होगा, न कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने में समय बर्बाद करना चाहिए।
यात्रियों की उम्मीद है कि किराया उचित रखा जाए और साथ ही मेट्रो सेवाएं भी बेहतर हों। सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक परिवहन आम जनता की पहुंच में रहे। बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में मेट्रो की भूमिका बेहद अहम है, इसलिए इसे सस्ता और सुलभ बनाए रखना जरूरी है।