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सौंसर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शौर्य प्रशिक्षण अखाड़ा का शुभारंभ किया

Vishwa Hindu Parishad
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सौंसर नगर में इस नवरात्रि एक नई पहल की शुरुआत हुई। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने मिलकर यहाँ आत्मरक्षा और शौर्य संस्कारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शौर्य प्रशिक्षण अखाड़ा का शुभारंभ किया। यह अखाड़ा स्वानंद गौविज्ञान केंद्र में स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस पर सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर किया गया।

आत्मरक्षा और शौर्य संस्कार पर विशेष ध्यान

इस शौर्य प्रशिक्षण अखाड़ा की स्थापना युवाओं में आत्मरक्षा की कला और शौर्य भाव को जगाने के लिए की गई है। आयोजकों का मानना है कि वर्तमान समय में आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति जैसे संस्कार हर युवक-युवती के जीवन में आवश्यक हैं। Vishwa Hindu Parishad की विचारधारा भी यही संदेश देती है कि समाज की रक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए शौर्य और संस्कार दोनों ज़रूरी हैं।

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30 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण

इस अखाड़ा केंद्र में 30 दिनों का निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया है। प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से रात 8:00 बजे तक यह प्रशिक्षण आयोजित होगा। प्रशिक्षण में आत्मरक्षा की तकनीक, शारीरिक व्यायाम, योग और अनुशासन की शिक्षा दी जाएगी।

पंजीयन की सुविधा संगठन कार्यकर्ताओं के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, ताकि इच्छुक युवक-युवतियाँ आसानी से इसमें भाग ले सकें।

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सांस्कृतिक महत्व

नवरात्रि जैसे शक्ति पर्व पर इस केंद्र का शुभारंभ करना अपने आप में प्रतीकात्मक है। यहाँ मातृशक्ति की आराधना के साथ युवाओं में शौर्य भावना का संचार भी किया जा रहा है। उपस्थित मातृशक्ति ने इस पहल की सराहना की और कहा कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी है।

भविष्य की योजना

कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारियों ने बताया कि यदि इस प्रशिक्षण केंद्र को युवाओं से सकारात्मक प्रतिसाद मिलता है तो भविष्य में इसे और बड़े स्वरूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी इसी तरह के केंद्र स्थापित करने की योजना है।

सौंसर में शुरू हुआ यह शौर्य प्रशिक्षण अखाड़ा आने वाली पीढ़ी को आत्मविश्वास, शौर्य और संस्कार प्रदान करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।