Rashtra Bharat Logo

बच्चे को जन्म देगी 16 वर्षीय रेप पीड़िता, हाईकोर्ट ने दी अनुमति; घर वालों ने तोड़ा रिश्ता

बच्चे को जन्म देगी 16 वर्षीय रेप पीड़िता,  हाईकोर्ट ने दी अनुमति; घर वालों ने तोड़ा रिश्ता
अपनी ही गूंगी बेटी के साथ पिता करता रहा दुष्कर्म, गर्भवती होने पर सामने आया घिनौना सच

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 16 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि पीड़िता की सहमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार सुरक्षित डिलीवरी का पूरा खर्च वहन करेगी।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

Minor Rape Victim Pregnancy: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का एक ताजा फैसला न केवल कानून की व्याख्या करता है, बल्कि यह समाज, नैतिकता और संवेदनशीलता के कई पहलुओं को भी छूता है। एक 16 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता से जुड़े इस मामले में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पीड़िता की इच्छा के बिना गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती, चाहे परिस्थितियां कितनी ही जटिल क्यों न हों।

इस पूरे मामले में अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता के प्रसव से जुड़ा पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और बच्चे की डिलीवरी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में कराई जाएगी।

पीड़िता की सहमति को बताया गया सर्वोपरि

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने अपने आदेश में साफ कहा कि किसी भी परिस्थिति में पीड़िता की सहमति के बिना गर्भपात नहीं कराया जा सकता। अदालत के अनुसार, पीड़िता ने स्वयं यह स्पष्ट किया है कि वह बच्चे को जन्म देना चाहती है। ऐसे में उसकी इच्छा को नजरअंदाज करना कानून और नैतिकता दोनों के खिलाफ होगा।

यह टिप्पणी खास तौर पर इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पीड़िता नाबालिग है और आमतौर पर ऐसे मामलों में गर्भपात को प्राथमिक विकल्प के रूप में देखा जाता है। लेकिन अदालत ने यह संदेश दिया कि हर मामला एक जैसा नहीं होता और पीड़िता की व्यक्तिगत इच्छा को केंद्र में रखना आवश्यक है।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने निभाई अहम भूमिका

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले एक मेडिकल बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई थी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की उम्र 16 वर्ष है और गर्भ की अवधि 29 सप्ताह और 1 दिन की है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि पीड़िता से गर्भपात और प्रसव दोनों विकल्पों पर राय ली गई, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से बच्चे को जन्म देने की इच्छा जताई।

चिकित्सकीय दृष्टि से भी इस चरण में गर्भपात के जोखिमों को देखते हुए अदालत ने सावधानी बरतना जरूरी समझा।

राज्य सरकार को सौंपी गई जिम्मेदारी

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह पीड़िता की डिलीवरी से जुड़ी पूरी जिम्मेदारी निभाए। हमीदिया अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा, पोषण और मानसिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।

माता-पिता ने किया किनारा

बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के माता-पिता ने उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया है और उससे सभी संबंध तोड़ने की बात कही है। यह स्थिति समाज के उस कठोर चेहरे को उजागर करती है, जहां पीड़िता ही सबसे ज्यादा अकेली पड़ जाती है।

हालांकि पीड़िता ने आरोपी से शादी करने और बच्चे को जन्म देने का फैसला अपनी मर्जी से किया है, लेकिन उसके पीछे की परिस्थितियां और सामाजिक दबाव भी सवाल खड़े करते हैं।

बाल कल्याण समिति की भूमिका

हाई कोर्ट ने बाल कल्याण समिति को निर्देश दिया है कि जब तक पीड़िता 18 वर्ष की नहीं हो जाती, तब तक उसकी और नवजात शिशु की पूरी देखभाल सुनिश्चित की जाए। इसमें आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलू शामिल हैं।

यह आदेश यह भी दर्शाता है कि न्याय केवल फैसला सुनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसका अहम हिस्सा है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।