महाराष्ट्र के अमरावती जिले में चुनाव से महज चार दिन पहले एक बड़ी राजनीतिक घटना सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच बना गठबंधन टूट गया है। यह खबर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
चुनाव से पहले बड़ा झटका
वोटिंग की तारीख नजदीक आते ही दोनों पार्टियों के बीच मतभेद सामने आ गए। सूत्रों के मुताबिक सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई। इस गठबंधन को लेकर काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अब यह टूट चुका है।
गठबंधन टूटने के कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीट शेयरिंग को लेकर विवाद इस टूट का मुख्य कारण है। युवा स्वाभिमान पार्टी ने ज्यादा सीटों की मांग रखी थी, जबकि बीजेपी अपनी शर्तों पर अड़ी रही। आखिरकार दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
स्थानीय नेताओं ने इस फैसले पर अलग-अलग राय जताई है। कुछ नेताओं का मानना है कि यह फैसला पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वहीं क��छ का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ना बेहतर होगा।
मतदाताओं पर असर
इस गठबंधन के टूटने से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। कई समर्थक दोनों पार्टियों के बीच एकता देखना चाहते थे। अब उन्हें अपनी पसंद फिर से तय करनी होगी।
आगे की रणनीति
अब दोनों पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बना रही हैं। बीजेपी अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रही है, जबकि युवा स्वाभिमान पार्टी युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटी है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि किसका फैसला सही था।
इस घटनाक्रम ने अमरावती की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब देखना होगा कि वोटिंग के दिन क्या नतीजे सामने आते हैं।