महिलाओं ने उठाई आवाज, प्रशासन की नींद खुली
Bahadura Nagar Panchayat Protest: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित बहादूरा नगर पंचायत में बुधवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। यहाँ की स्थानीय महिलाओं ने नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी के कार्यालय का घेराव कर दिया। सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ यह प्रदर्शन दोपहर तक जारी रहा। महिलाओं ने पानी की कमी, खराब सड़कों, गंदगी और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। करीब 200 से अधिक महिलाएं एकजुट होकर कार्यालय पहुँची और अपनी समस्याओं का समाधान मांगा। यह घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है और यह दिखाती है कि जनता अब अपनी समस्याओं को लेकर कितनी जागरूक हो चुकी है।
पानी की समस्या बनी मुख्य मुद्दा
बहादूरा नगर पंचायत क्षेत्र में पिछले कई महीनों से पेयजल की भारी किल्लत है। महिलाओं का कहना है कि सुबह केवल एक-दो घंटे के लिए पानी की सप्लाई होती है और वह भी बहुत कम दबाव के साथ। कई इलाकों में तो पानी आता ही नहीं है। महिलाओं को दूर-दूर से पानी भरकर लाना पड़ता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और भी भयानक हो जाती है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर पंचायत प्रशासन ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पानी की टंकी खराब हैं, पाइपलाइन पुरानी हो चुकी हैं और जगह-जगह लीकेज है। लेकिन मरम्मत का कोई काम नहीं हो रहा।
टूटी सड़कों से परेशान हैं लोग
पानी के बाद दूसरी बड़ी शिकायत सड़कों की हालत को लेकर है। बहादूरा की अधिकतर सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं। बरसात में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाता है और रास्ते दलदल में बदल जाते हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है। बुजुर्गों के लिए चलना-फिरना भी खतरनाक है। कई लोग गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी परेशानी होती है। महिलाओं ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए बजट आता है लेकिन काम ठीक से नहीं होता। घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है जिससे सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं।
सफाई व्यवस्था पर भी उठे सवाल
नगर पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है। कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ी समय पर नहीं आती। कई बार तो हफ्तों तक कचरा सड़कों पर पड़ा रहता है। इससे गंदगी फैलती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नालियां जाम रहती हैं और उनकी सफाई महीनों तक नहीं होती। बरसात के दिनों में पानी सड़कों पर भर जाता है। महिलाओं का आरोप है कि सफाई कर्मचारी भी नियमित रूप से काम नहीं करते। प्रशासन की ओर से इस पर कोई निगरानी नहीं रखी जाती। मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर बना रहता है।
सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप
Bahadura Nagar Panchayat Protest: महिलाओं ने सबसे गंभीर आरोप सरकारी योजनाओं में अनियमितता को लेकर लगाए हैं। उनका कहना है कि गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुँच रहा। शौचालय निर्माण, आवास योजना, राशन कार्ड और पेंशन जैसी योजनाओं में भ्रष्टाचार हो रहा है। पात्र लोगों के नाम हटा दिए जाते हैं और गलत लोगों को लाभ दिया जा रहा है। कुछ प्रभावशाली लोग दलालों के साथ मिलकर इन योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं। महिलाओं ने मांग की कि सभी योजनाओं की जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
मुख्य अधिकारी से मांगें पूरी करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने मुख्य अधिकारी से मुलाकात की और अपनी समस्याओं की लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगी। महिलाओं ने धमकी दी कि वे नगर पंचायत कार्यालय के सामने धरना देंगी और जिला मुख्यालय तक मोर्चा निकालेंगी। उन्होंने कहा कि अब चुप बैठने का समय नहीं है। अपने हक की लड़ाई लड़नी होगी। मुख्य अधिकारी ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पानी की व्यवस्था सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएंगे और सड़कों की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
जनता की जागरूकता का प्रतीक
बहादूरा में हुआ यह प्रदर्शन दिखाता है कि अब आम जनता अपने अधिकारों के प्रति कितनी सजग हो गई है। खासकर महिलाएं अब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपनी समस्याओं का समाधान खुद खोज रही हैं। यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। लेकिन साथ ही यह प्रशासन की विफलता को भी दर्शाता है। जब जनता की बुनियादी समस्याएं समय पर हल नहीं होतीं तो लोगों को सड़क पर उतरना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह जनता की समस्याओं को गंभीरता से ले और उनका त्वरित समाधान करे।
प्रशासन पर दबाव बढ़ा
इस घटना के बाद अब पूरे जिले में बहादूरा नगर पंचायत की चर्चा हो रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं और उचित कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी दबाव बढ़ गया है। अब देखना है कि प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और महिलाओं की मांगों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाता है। यह घटना अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है जहाँ लोग अपनी समस्याओं को लेकर चुप बैठे हैं।