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ताडोबा सफारी में स्थानीय कोटा धोखाधड़ी का खुलासा, फर्जी आधार कार्ड रैकेट पर वन विभाग की सख्त कार्रवाई

ताडोबा सफारी में स्थानीय कोटा धोखाधड़ी का खुलासा, फर्जी आधार कार्ड रैकेट पर वन विभाग की सख्त कार्रवाई
Fake Aadhaar Scam Exposed at Tadoba: ताडोबा में स्थानीय कोटा धोखाधड़ी का पर्दाफाश, वन विभाग ने दर्ज कराया मामला (File Photo)

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व में स्थानीय कोटा का दुरुपयोग करते हुए फर्जी आधार कार्ड से सफारी बुकिंग करने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ। 25 दिसंबर को मोहर्ली प्रवेश द्वार पर 23 में से 19 पर्यटक संदिग्ध पाए गए। वन विभाग ने दुर्गापुर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। क्षेत्र निदेशक ने दोषी पर्यटकों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी।

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Asfi Shadab
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ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व में सफारी बुकिंग के लिए स्थानीय लोगों को दी जाने वाली सुविधा का गलत इस्तेमाल करते हुए एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। वन विभाग ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए दुर्गापुर पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। यह घटना चंद्रपुर जिले के ताडोबा में सामने आई है, जहां फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करके बाहरी पर्यटकों को स्थानीय कोटा में सफारी की सुविधा दिलाई जा रही थी।

धोखाधड़ी का पूरा मामला

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व में चंद्रपुर जिले के स्थानीय नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। यहां क्रूज़र सफारी में कुछ सीटें स्थानीय कोटा के तहत आरक्षित रहती हैं, ताकि स्थानीय लोग आसानी से और कम खर्च में वन्यजीव दर्शन का आनंद ले सकें। लेकिन कुछ लोगों ने इस सुविधा का गलत फायदा उठाकर बाहरी पर्यटकों को लाभ पहुंचाया।

19 दिसंबर 2025 को कुछ लोगों ने 5 अलग-अलग पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके कुल 7 क्रूज़र सफारी टिकट बुक किए। ये सभी बुकिंग स्थानीय कोटा के तहत की गई थीं। क्रिसमस की छुट्टियों के समय 25 दिसंबर 2025 की सुबह जब ये पर्यटक मोहर्ली प्रवेश द्वार पर पहुंचे, तो वन विभाग के अधिकारियों ने दस्तावेजों की सख्त जांच की।

जांच में सामने आई गड़बड़ी

जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुल 23 पर्यटकों में से 9 लोगों के आधार कार्ड में फोटो और जानकारी में बड़ा अंतर पाया गया। इसके अलावा 10 पर्यटकों ने तो पहचान पत्र दिखाने से ही साफ इनकार कर दिया। इस तरह कुल 19 लोग संदिग्ध पाए गए।

जब विभाग ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि बुकिंग के समय स्थानीय लोगों के असली आधार नंबर का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन उन आधार कार्ड में बाहरी पर्यटकों की फोटो लगाई गई थी। यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी थी, जिसमें स्थानीय एजेंट और बाहरी पर्यटक दोनों शामिल थे।

वन विभाग की कड़ी कार्रवाई

इस गंभीर मामले को देखते हुए उपसंचालक (कोर) श्री आनंद रेड्डी येल्लु ने तत्काल रिपोर्ट तैयार की। क्षेत्र निदेशक डॉ. प्रभु नाथ शुक्ला के निर्देश पर वन विभाग ने दुर्गापुर पुलिस थाने में संबंधित एजेंटों और व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज कराया है।

क्षेत्र निदेशक डॉ. प्रभु नाथ शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ताडोबा प्रशासन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जो पर्यटक इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल पाए जाएंगे, उन्हें भी सह-आरोपी बनाया जाएगा। यह संदेश साफ है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय कोटा व्यवस्था क्यों जरूरी है

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां देश-विदेश से लाखों पर्यटक हर साल आते हैं। सफारी की सीटें सीमित होने के कारण टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। इसी को ध्यान में रखकर स्थानीय लोगों के लिए विशेष कोटा बनाया गया था, ताकि चंद्रपुर जिले के नागरिक अपने ही क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर को करीब से देख सकें।

लेकिन जब इस व्यवस्था का दुरुपयोग होने लगा, तो असली स्थानीय पर्यटकों को नुकसान होने लगा। बाहरी पर्यटक एजेंटों के जरिए फर्जी दस्तावेज बनवाकर स्थानीय कोटा की सीटें हड़प लेते थे। इससे न सिर्फ शासन की नीति का मजाक उड़ाया जा रहा था, बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकारों का भी हनन हो रहा था।

पर्यटन व्यवसाय में बढ़ती अनियमितता

यह पहली बार नहीं है जब ताडोबा या अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में इस तरह की धोखाधड़ी सामने आई है। पर्यटन के मौसम में जब मांग ज्यादा होती है, तब एजेंट तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कुछ एजेंट स्थानीय लोगों से उनके आधार कार्ड की जानकारी लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं। कभी-कभी गरीब लोगों को पैसे देकर उनके नाम से बुकिंग करवाई जाती है।

इस तरह की गतिविधियों से न केवल शासन की योजनाओं का उद्देश्य विफल होता है, बल्कि पर्यटन व्यवसाय की साख भी खराब होती है। ईमानदारी से काम करने वाले एजेंट और पर्यटक भी इसकी वजह से परेशानी झेलते हैं।

आगे की रणनीति

वन विभाग ने अब सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। प्रवेश द्वार पर दस्तावेजों की जांच और सख्त की जाएगी। बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा जिन एजेंटों के खिलाफ शिकायतें मिलेंगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ताडोबा प्रशासन ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल न होने दें। अगर कोई एजेंट उनके आधार कार्ड की जानकारी मांगे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

यह मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी का भी सवाल है। जब हम शासन द्वारा दी गई सुविधाओं का दुरुपयोग करते हैं, तो हम अपने ही समाज के लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। स्थानीय कोटा उन लोगों के लिए है जो वाकई स्थानीय हैं, न कि उनके लिए जो फर्जी तरीकों से इसका लाभ उठाना चाहते हैं।

प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी व्यवस्थाएं बनाए जिनमें धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे। साथ ही नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे ईमानदारी से नियमों का पालन करें।

ताडोबा में हुई यह कार्रवाई एक सकारात्मक संदेश देती है कि प्रशासन सतर्क है और धोखेबाजों को बख्शा नहीं जाएगा। उम्मीद है कि इस मामले में दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।