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Maharashtra: संविधान जागरूकता प्रश्नमंजूषा 2025-26: न्यायमूर्ति एम. एस. जावळकर ने दिया विद्यार्थियों को प्रेरक मार्गदर्शन

Maharashtra Constitution Awareness Quiz 2025–26 online training by Justice M.S. Jawalkar: महाराष्ट्र के विद्यार्थियों को न्यायमूर्ति जावळकर का प्रेरक मार्गदर्शन
Maharashtra Constitution Awareness Quiz 2025–26 online training by Justice M.S. Jawalkar: महाराष्ट्र के विद्यार्थियों को न्यायमूर्ति जावळकर का प्रेरक मार्गदर्शन

Maharashtra Constitution Awareness Quiz 2025–26 online training by Justice M.S. Jawalkar: महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग द्वारा संचालित संविधान जागरूकता अभियान में न्यायमूर्ति एम. एस. जावळकर ने विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों, मूल अधिकारों और सामाजिक न्याय पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया। त्रिभाषीय प्रशिक्षण सत्रों से हजारों युवा लाभान्वित हो रहे हैं।

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महाराष्ट्र में संविधान जागरूकता का नया अध्याय

Maharashtra Constitution Awareness Quiz 2025–26 online training by Justice M.S. Jawalkar: महाराष्ट्र राज्य में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। राज्य अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने “संविधान जागरूकता प्रश्नमंजूषा 2025-26” नाम से एक बड़ा अभियान चलाया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं और विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और सामाजिक न्याय की समझ को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम पूरे राज्य में बड़े उत्साह के साथ चल रहा है और विद्यार्थियों की भागीदारी बेहद सराहनीय रही है।

यह पहल सिर्फ एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश के नागरिकों में संवैधानिक जिम्मेदारी और जागरूकता पैदा करने का माध्यम बन गई है। आजादी के बाद बने हमारे संविधान की मूल भावना को समझना और उसे जीवन में उतारना आज के समय की जरूरत है।

ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्रों की खासियत

इस अभियान के तहत राज्यभर में ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों की खास बात यह है कि इन्हें तीन भाषाओं – मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में संचालित किया जा रहा है ताकि हर भाषा के विद्यार्थी आसानी से समझ सकें। महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर और मुंबई के अनुभवी प्राध्यापकों ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।

नागपुर परिसर से डॉ. कैलास वसावे, डॉ. दिविता कोठेकर, डॉ. आरती तायडे और डॉ. वी. पी. तिवारी ने अपने ज्ञान से विद्यार्थियों को लाभान्वित किया है। वहीं मुंबई परिसर से डॉ. जगदीश खोब्रागडे, डॉ. साहिली सुरजुसे और डॉ. अमोल चौव्हाण ने भी विशेष योगदान दिया है। इन विशेषज्ञों ने संविधान के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में समझाया है जिससे विद्यार्थियों को गहराई से समझने में मदद मिली है।

प्रशिक्षण सत्रों में संविधान की प्रस्तावना, मूल अधिकार, मूल कर्तव्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व और संवैधानिक संशोधनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है। विद्यार्थियों को इंटरैक्टिव तरीके से पढ़ाया जा रहा है जिससे उनकी रुचि बनी रहे।

न्यायमूर्ति एम. एस. जावळकर का प्रेरक संबोधन

इस अभियान के दौरान एक विशेष सत्र में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ की अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एस. जावळकर ने मुख्य मार्गदर्शक के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उनका संबोधन बेहद प्रेरक और ज्ञानवर्धक रहा। उन्होंने संविधान के उन मूल सिद्धांतों पर जोर दिया जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं।

न्यायमूर्ति जावळकर ने मूल अधिकारों की अहमियत को समझाते हुए कहा कि ये अधिकार हर नागरिक को समानता और सम्मान के साथ जीने का हक देते हैं। उन्होंने समानता के अधिकार, स्वतंत्रता के अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार और संवैधानिक उपचारों के अधिकार पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने मूल कर्तव्यों के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने बंधुता की भावना पर बल देते हुए कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया है। सामाजिक न्याय की अवधारणा को समझाते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने समाज के हर वर्ग को समान अवसर देने का प्रावधान किया है। यह विशेष रूप से उन वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है जो सदियों से पिछड़े रहे हैं।

विद्यार्थियों के सवालों के मिले सटीक जवाब

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को न्यायमूर्ति जावळकर से सवाल पूछने का मौका मिला। विद्यार्थियों ने संविधान के विभिन्न पहलुओं से जुड़े कई सवाल पूछे। न्यायमूर्ति ने हर सवाल का धैर्यपूर्वक और विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से कानूनी अवधारणाओं को सरल बनाया।

कुछ विद्यार्थियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा की शक्ति और जनहित याचिकाओं के महत्व पर सवाल पूछे। न्यायमूर्ति ने बताया कि कैसे न्यायपालिका ने संविधान की रक्षा करते हुए नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की है। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक फैसलों का भी जिक्र किया जिन्होंने देश की दिशा बदली है।

संविधान शिक्षा का व्यापक प्रभाव

यह अभियान केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं है बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। जो विद्यार्थी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, वे न केवल अपने ज्ञान में वृद्धि कर रहे हैं बल्कि अपने परिवार और समाज में भी संवैधानिक मूल्यों को फैला रहे हैं।

संविधान की शिक्षा से युवाओं में जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना पैदा होती है। वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत होते हैं और साथ ही अपने कर्तव्यों के प्रति भी गंभीर रहते हैं। यह शिक्षा उन्हें सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय के लिए लड़ने की ताकत देती है।

लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम

महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग की यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। जब युवा पीढ़ी संवैधानिक मूल्यों को समझेगी और उन्हें अपनाएगी तो समाज में बदलाव आना स्वाभाविक है। यह अभियान भविष्य के लिए जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार कर रहा है।

आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य के हर कोने तक यह संदेश पहुंचे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जा रहा है। डिजिटल माध्यम से इस अभियान ने व्यापक पहुंच बनाई है जिससे अधिक से अधिक युवा इससे जुड़ पा रहे हैं।

प्रतियोगिता से आगे एक सामाजिक आंदोलन

यह उपक्रम सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि एक सामाजिक जागरूकता अभियान का रूप ले चुका है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हो रही है लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि उनमें संवैधानिक चेतना जाग रही है।

जो विद्यार्थी आज संविधान को गहराई से समझ रहे हैं, वे कल देश के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। वे समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे। वे अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानेंगे और दूसरों के अधिकारों का सम्मान भी करेंगे।

राज्यव्यापी उत्साहजनक प्रतिक्रिया

Maharashtra Constitution Awareness Quiz 2025–26 online training by Justice M.S. Jawalkar: पूरे महाराष्ट्र से इस अभियान को मिल रही प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक है। हजारों विद्यार्थी इस कार्यक्रम में पंजीकरण करा चुके हैं और नियमित रूप से प्रशिक्षण सत्रों में भाग ले रहे हैं। शिक्षक और अभिभावक भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण सत्रों को काफी उपयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि संविधान की जटिल बातों को सरल भाषा में समझाया गया है जिससे विषय रोचक बन गया है। कई विद्यार्थियों ने इस ज्ञान को अपने स्कूल और कॉलेज में साझा करने की इच्छा जताई है।

इस अभियान के जरिए महाराष्ट्र ने पूरे देश के लिए एक मिसाल पेश की है। यह दिखाता है कि संवैधानिक शिक्षा को कैसे रोचक और प्रभावी तरीके से युवाओं तक पहुंचाया जा सकता है। अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाकर अपने यहां संविधान जागरूकता बढ़ा सकते हैं। यह पहल निश्चित रूप से भारत के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने में योगदान देगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।