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महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में तीस हजार रुपये की रिश्वत लेते कर सहायक उमेश सरकटे रंगे हाथों गिरफ्तार

Hingoli Bribery Case: कर सहायक उमेश सरकटे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए, जानें पूरा मामला
Hingoli Bribery Case: कर सहायक उमेश सरकटे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए, जानें पूरा मामला

हिंगोली में वस्तु एवं सेवा कर विभाग के कर सहायक उमेश सरकटे को एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ने कृषि साहित्य दुकानदार से जीएसटी नोटिस रद्द करने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर आरोपी को रकम सहित पकड़ा। मामला दर्ज कर जांच जारी है।

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रिश्वत लेते कर सहायक रंगे हाथों धरा

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई हुई है। वस्तु एवं सेवा कर विभाग के कर सहायक उमेश साहेबराव सरकटे को एंटी करप्शन ब्यूरो ने तीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक जनवरी को की गई। आरोपी ने एक कृषि साहित्य दुकानदार से जीएसटी से जुड़ी नोटिस रद्द करवाने के एवज में यह रिश्वत मांगी थी।

कैसे हुई पूरी घटना

शिकायतकर्ता सेनगांव शहर में कृषि साहित्य की दुकान चलाते हैं। उन्होंने अपनी दुकान के लिए जीएसटी नंबर हासिल करने के लिए आठ सितंबर 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद दस अक्टूबर 2025 को वस्तु एवं सेवा कर विभाग हिंगोली के प्रोफेशनल टैक्स अधिकारी राउत ने एक नोटिस जारी की। इस नोटिस में शिकायतकर्ता को 19 दिसंबर 2017 से 31 मार्च 2025 के बीच प्रोफेशनल टैक्स, ब्याज और जुर्माना मिलाकर कुल 43 हजार 904 रुपये सरकार को जमा करने का आदेश दिया गया था।

रिश्वत की मांग कैसे शुरू हुई

29 दिसंबर 2025 को आरोपी कर सहायक उमेश सरकटे यह नोटिस लेकर सेनगांव में शिकायतकर्ता की दुकान पर पहुंचे। लेकिन शिकायतकर्ता उस समय अपने निजी कामों से बाहर गए हुए थे। तब आरोपी ने शिकायतकर्ता को मोबाइल पर संपर्क किया और कहा कि वह हिंगोली शहर में रहता है और उनसे वहीं मिलना चाहता है।

अगले दिन यानी 30 दिसंबर को आरोपी उमेश सरकटे ने फिर से शिकायतकर्ता को फोन किया। इस बार उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह उनके खिलाफ जारी नोटिस को रद्द करवा सकते हैं और उन्हें जुर्माने की रकम भरने से बचा सकते हैं। लेकिन इसके लिए शिकायतकर्ता को तीस हजार रुपये की रिश्वत देनी होगी। यह सुनकर शिकायतकर्ता ने 31 दिसंबर को हिंगोली एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई।

एसीबी की तैयारी और योजना

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने तुरंत जांच शुरू की। जांच में शिकायत पूरी तरह सही पाई गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने कर सहायक उमेश सरकटे को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक पूरी योजना तैयार की। शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह आरोपी के साथ संपर्क में रहें और उनकी सभी बातों की जानकारी एसीबी को देते रहें।

रंगे हाथों गिरफ्तारी

गुरुवार की दोपहर को शिकायतकर्ता और आरोपी उमेश सरकटे के बीच मुलाकात तय हुई। यह मुलाकात हिंगोली शहर में वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय के पास जिला सरकारी अस्पताल के मुख्य दरवाजे के सामने वाली सड़क पर तय की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोपी को रिश्वत की रकम सौंपी। जैसे ही उमेश सरकटे ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, एसीबी की टीम ने गवाहों की मौजूदगी में उन्हें रकम सहित रंगे हाथों पकड़ लिया।

आरोपी की जांच और बरामदगी

आरोपी उमेश सरकटे की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उनकी जेब से रिश्वत की तीस हजार रुपये की रकम के अलावा 2 हजार 950 रुपये की नकद रकम, मोबाइल फोन और अन्य सामान मिला। आरोपी उमेश सरकटे वाशिम जिले के रिसोड शहर के निवासी हैं। इसलिए एसीबी ने वाशिम की एसीबी को लिखित जानकारी दी और उनके रिसोड स्थित घर में छापा मारने का निर्देश दिया। इसके लिए वाशिम की एसीबी पुलिस निरीक्षक अलका गायकवाड को जिम्मेदारी सौंपी गई।

किसके मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई एसीबी नांदेड के पुलिस अधीक्षक संदीप पालवे और अपर पुलिस अधीक्षक डॉक्टर संजय तुंगार के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में एसीबी हिंगोली के पुलिस उपाधीक्षक विकास घनवट की अगुवाई में सहायक पुलिस उपनिरीक्षक विजय शुक्ला, पुलिस हेड कांस्टेबल भगवान मंडलिक, राजाराम फुपाटे और रवींद्र वरणे की टीम शामिल थी।

कानूनी कार्रवाई

डिप्टी एसपी विकास घनवट की शिकायत पर हिंगोली शहर पुलिस थाने में आरोपी उमेश सरकटे के खिलाफ धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक राजेश मलपिलु कर रहे हैं। फिलहाल आरोपी उमेश सरकटे को हिरासत में लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भ्रष्टाचार कितना गहरा है। सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारी आम लोगों से गलत तरीके से पैसे वसूलने में नहीं हिचकिचाते। लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो की सक्रियता से ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को पकड़ना संभव हो पाता है। यह कार्रवाई अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए एक सख्त संदेश है कि कानून की नजर हर किसी पर है।

आम लोगों के लिए राहत

इस गिरफ्तारी से आम लोगों में एक उम्मीद जगी है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में की जा सकती है। एसीबी ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करती है और भ्रष्ट लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा करती है। यह घटना सभी के लिए एक सबक है कि रिश्वत लेना और देना दोनों ही गलत हैं और कानून इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान रखता है।

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Asfi Shadab

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