BMC Mayor 2026: बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी केवल देश की सबसे बड़ी नगर निकाय नहीं है, बल्कि यह मुंबई की राजनीतिक दिशा तय करने वाला सबसे अहम मंच भी माना जाता है। इस बार बीएमसी चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि शहर की सत्ता में बड़ा बदलाव आ चुका है। महायुति गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के बाद अब सवाल यह नहीं है कि सत्ता किसके पास जाएगी, बल्कि यह है कि मुंबई का अगला चेहरा कौन होगा।
इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ पार्षद ऋतु तावड़े का नाम सबसे आगे चल रहा है। आज उनके मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करने के साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि मुंबई को एक नई महिला मेयर मिलने वाली है।
ऋतु तावड़े: जमीन से जुड़ी नेता की मजबूत दावेदारी
ऋतु तावड़े घाटकोपर के वार्ड संख्या 132 से लगातार तीसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। यह जीत केवल आंकड़ों की जीत नहीं है, बल्कि भरोसे की राजनीति का उदाहरण भी है। मराठा समुदाय से आने के बावजूद गुजराती बहुल इलाके से बार-बार जीत हासिल करना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋतु तावड़े ने कभी खुद को केवल पार्टी नेता के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की तरह हर छोटी-बड़ी समस्या पर लोगों के साथ खड़ी रहीं। यही वजह है कि वे जाति और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर स्वीकार की गईं।
कांग्रेस से भाजपा तक का सफर
ऋतु तावड़े का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने 2012 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। उस समय यह फैसला जोखिम भरा माना जा रहा था, लेकिन आने वाले वर्षों में उन्होंने साबित किया कि राजनीति में स्थिरता से ज्यादा जरूरी है साफ छवि और लगातार काम।
बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल को आज भी सकारात्मक रूप में याद किया जाता है। स्कूलों के बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षकों की समस्याओं तक, उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर कई फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाई।
महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत
भाजपा के भीतर ऋतु तावड़े को महिला नेतृत्व के मजबूत चेहरे के रूप में देखा जाता है। वे फिलहाल महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष भी हैं। उनका मेयर पद के लिए आगे आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी अब केवल बड़े चेहरों पर नहीं, बल्कि नगर स्तर पर काम करने वाले अनुभवी नेताओं को भी मौका देना चाहती है।
उप-महापौर पद पर शिंदे गुट का भरोसेमंद चेहरा
महायुति गठबंधन के भीतर तय फार्मूले के अनुसार उप-महापौर पद शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) को मिला है। इस पद के लिए संजय शंकर घाडी का नाम सामने आया है। संगठन में उनकी पहचान एक अनुशासित और अनुभवी नेता की रही है।
गठबंधन के नेताओं का मानना है कि ऋतु तावड़े और संजय घाडी की जोड़ी प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम होगी।
विपक्ष की चुप्पी और आसान होती राह
बीएमसी मेयर चुनाव को लेकर विपक्षी दलों की ओर से अब तक किसी साझा उम्मीदवार का ऐलान नहीं हुआ है। राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा है। यही कारण है कि ऋतु तावड़े की राह फिलहाल काफी आसान नजर आ रही है।
अगर आखिरी समय तक कोई बड़ा राजनीतिक मोड़ नहीं आता, तो उनका मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।
मुंबई के लिए आगे की चुनौतियाँ
मुंबई जैसे महानगर में मेयर का पद केवल औपचारिक नहीं होता। ट्रैफिक, झुग्गी पुनर्विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे हर दिन जनता के सामने खड़े रहते हैं।
ऋतु तावड़े के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे राजनीतिक जीत को प्रशासनिक सफलता में कैसे बदलती हैं। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि उनका जमीनी अनुभव और प्रशासनिक समझ मुंबई के नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित होगी।