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Video: मुंबई में मोनोरेल परीक्षण के दौरान बड़ा हादसा टला, वडाला डिपो पर हवा में लटका डिब्बा

Video: मुंबई में मोनोरेल परीक्षण के दौरान बड़ा हादसा टला, वडाला डिपो पर हवा में लटका डिब्बा
Monorail Accident 2025: मुंबई में परीक्षण के दौरान पटरी से उतरी मोनोरेल, हवा में लटका डिब्बा" (Photo: PTI)

मुंबई के वडाला डिपो में मोनोरेल परीक्षण के दौरान एक डिब्बा पटरी से उतरकर हवा में लटक गया। ट्रेन में केवल चालक और इंजीनियर मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। हादसे के बाद एमएमआरडीए ने जांच समिति गठित कर दी है। किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

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Asfi Shadab
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मुंबई में मोनोरेल परीक्षण के दौरान बड़ा हादसा टला

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब वडाला डिपो पर एक मोनोरेल ट्रेन परीक्षण के दौरान पटरी से उतर गई। हादसे के वक्त ट्रेन में कोई यात्री मौजूद नहीं था, सिर्फ चालक और एक इंजीनियर सवार थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया। सौभाग्य से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

सुबह 9 बजे का हादसा

यह दुर्घटना बुधवार सुबह लगभग 9 बजे की बताई जा रही है। परीक्षण के दौरान अचानक मोनोरेल का अगला हिस्सा पटरी से उतरकर हवा में लटक गया। मौके पर मौजूद दमकल विभाग और एमएमआरडीए (महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। दोनों कर्मियों को बिना किसी चोट के बाहर निकाल लिया गया।

परीक्षण के दौरान हुआ तकनीकी दोष

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना सिग्नलिंग और नियंत्रण प्रणाली के परीक्षण के दौरान हुई। ट्रेन के ट्रैक अलाइनमेंट में तकनीकी खामी आने से डिब्बा असंतुलित हो गया। हालांकि पूरी घटना में ट्रेन के ढांचे को आंशिक नुकसान हुआ है, लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

अलाइनमेंट को हुआ नुकसान

प्राथमिक जांच में सामने आया कि ट्रायल रन के दौरान ट्रैक का अलाइनमेंट गड़बड़ाने से मोनोरेल का पहिया ट्रैक से उतर गया। महा मुंबई मेट्रो रेल ऑपरेशंस लिमिटेड ने कहा है कि दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है। समिति तकनीकी खामियों, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रेन के यांत्रिक हिस्सों की गहन जांच करेगी।

Monorail Accident 2025
Monorail Accident 2025: मुंबई में परीक्षण के दौरान पटरी से उतरी मोनोरेल, हवा में लटका डिब्बा” (Photo: PTI)

यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

मोनोरेल प्रोजेक्ट को लेकर पहले भी कई बार तकनीकी गड़बड़ियों की खबरें सामने आती रही हैं। 2023 और 2024 में भी बार-बार आई खराबियों के कारण मुंबई मोनोरेल सेवा को कई बार स्थगित करना पड़ा। यह हादसा उन सवालों को और गहरा कर गया है कि क्या सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तकनीकी संरचना को पूरी तरह आधुनिक नहीं बनाया जाता, ऐसे खतरे बने रहेंगे।

मोनोरेल सेवाएँ पहले से बंद

अधिकारियों के अनुसार, मुंबई मोनोरेल की यात्री सेवाएँ 20 सितंबर से ही सिस्टम अपग्रेडेशन के लिए निलंबित हैं। यह परीक्षण नए रेक की कार्यक्षमता जांचने के लिए किया जा रहा था। चूँकि यह ट्रायल रन था, इसलिए यात्रियों की उपस्थिति नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

जांच समिति का गठन

एमएमआरडीए ने घटना के तुरंत बाद तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति पिछले कुछ महीनों में हुई तकनीकी समस्याओं की भी समीक्षा करेगी, जिनमें 15 सितंबर और 19 अगस्त को हुई दो प्रमुख घटनाएँ शामिल हैं, जब यात्रियों को बीच ट्रैक पर फँसना पड़ा था।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुंबई पुलिस और दमकल विभाग ने घटना स्थल को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह तकनीकी लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। नगर निगम ने भी मोनोरेल परियोजना की सुरक्षा प्रक्रियाओं की पुन: समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं।

मुंबई की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं में तकनीकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। वडाला डिपो पर हुआ यह हादसा किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकता था, परंतु त्वरित कार्रवाई से चालक दल की जान बच गई। अब देखना यह है कि जांच समिति किन सुधारात्मक कदमों की सिफारिश करती है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।