लोकतंत्र में मतदान सबसे बड़ा अधिकार होता है। जब कोई आम नागरिक वोट डालता है, तो यह उसकी जिम्मेदारी होती है। लेकिन जब कोई बड़ा अधिकारी खुद मतदान करने पहुंचता है, तो इसका असर समाज पर और भी गहरा होता है। ऐसा ही एक उदाहरण नागपुर में देखने को मिला, जब डिविजनल कमिश्नर बिंद्री मैडम खुद मतदान केंद्र पहुंचीं और अपने मत का उपयोग किया।
यह दृश्य न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी का प्रतीक था, बल्कि आम लोगों के लिए एक साफ संदेश भी था कि लोकतंत्र में हर वोट की कीमत होती है।

मतदान के लिए खुद पहुंचीं डिविजनल कमिश्नर
नागपुर की डिविजनल कमिश्नर बिंद्री मैडम तय समय पर मतदान केंद्र पहुंचीं। उन्होंने लाइन में लगकर शांत तरीके से मतदान किया। उनके साथ कोई दिखावा नहीं था। उन्होंने एक आम मतदाता की तरह नियमों का पालन किया।
अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाया भरोसा
मतदान केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने पूरी व्यवस्था संभाल रखी थी। जब डिविजनल कमिश्नर खुद मतदान करती दिखीं, तो कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ा। इससे यह साफ हुआ कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है।
आम लोगों को मिला प्रेरणा संदेश
मतदान के बाद बिंद्री मैडम ने लोगों से अपील की कि वे बिना डर और लालच के वोट डालें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान करते हैं।
शांत और व्यवस्थित रहा मतदान
नागपुर के कई मतदान केंद्रों पर शांत माहौल देखा गया। लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी में उत्साह नजर आया। प्रशासन की ओर से पानी, छाया और बैठने की व्यवस्था भी की गई थी।
लोकतंत्र में जिम्मेदारी का उदाहरण
एक वरिष्ठ अधिकारी का खुद मतदान करना यह दिखाता है कि कानून सभी के लिए बराबर है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि प्रशासन सिर्फ आदेश देने वाला नहीं, बल्कि खुद नियमों का पालन करने वाला है।
युवाओं के लिए खास संदेश
युवाओं के बीच अक्सर यह सोच रहती है कि एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा। लेकिन जब बड़े पदों पर बैठे लोग खुद वोट डालते हैं, तो यह सोच बदलती है। यह घटना युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने का काम करती है।
मजबूत लोकतंत्र की ओर कदम
नागपुर में हुआ यह मतदान सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम था। जब जिम्मेदार लोग आगे आते हैं, तो समाज भी सही दिशा में बढ़ता है।