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Nagpur Crime: नागपुर में तीन बाल मजदूरों की हुई मुक्ति, रेलवे म्यूजियम परिसर से बचाए गए बच्चे

Railway Museum Nagpur child workers rescue: रेलवे म्यूजियम से तीन बाल मजदूरों की मुक्ति, बालाघाट के थे बच्चे
Railway Museum Nagpur child workers rescue: रेलवे म्यूजियम से तीन बाल मजदूरों की मुक्ति, बालाघाट के थे बच्चे (Freepik Photo)

Railway Museum Nagpur child workers rescue: नागपुर में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की शिकायत पर बाल संरक्षण दल ने रेलवे म्यूजियम परिसर, कडबी चौक से तीन बाल मजदूरों को मुक्त कराया। दो लड़के और एक लड़की को बचाया गया जो मध्य प्रदेश के बालाघाट से रोजगार के नाम पर लाए गए थे। बच्चों को काउंसलिंग दी जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

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Railway Museum Nagpur child workers rescue: महाराष्ट्र के नागपुर शहर में बाल मजदूरी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर मिली शिकायत के बाद बाल संरक्षण दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से आजाद कराया है। इस कार्रवाई में दो लड़के और एक लड़की को बचाया गया है, जो रोजगार के झांसे में अपने घर से दूर लाए गए थे।

शिकायत पर हुई तत्काल कार्रवाई

चाइल्ड हेल्पलाइन को मिली सूचना के आधार पर बाल संरक्षण दल ने बिना किसी देरी के रेलवे म्यूजियम परिसर, कडबी चौक स्थित एक जगह पर छापेमारी की। यह इलाका नागपुर शहर का एक व्यस्त क्षेत्र है जहां कई व्यापारिक गतिविधियां चलती रहती हैं। टीम ने जब जांच की तो वहां तीन नाबालिग बच्चों को काम करते हुए पाया गया। इन बच्चों की उम्र कानूनी रूप से काम करने की अनुमति से काफी कम थी।

मध्य प्रदेश से लाए गए थे बच्चे

जब बाल संरक्षण दल ने बच्चों से बात की और प्राथमिक पूछताछ की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। तीनों बच्चे मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के रहने वाले निकले। उन्हें काम दिलाने के नाम पर उनके घर से नागपुर लाया गया था। गरीबी और बेहतर जीवन की उम्मीद में इन बच्चों के परिवारों ने उन्हें भेजा था, लेकिन यहां उनसे मजदूरी करवाई जा रही थी।

रोजगार के नाम पर बच्चों का शोषण करना एक गंभीर अपराध है। बाल श्रम निषेध और नियमन अधिनियम के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

बच्चों को दी जा रही है काउंसलिंग

बचाए गए बच्चों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष परामर्श यानी काउंसलिंग दी जा रही है। यह बच्चे लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहे और मजदूरी जैसे कठिन काम करते रहे। इस कारण उनके मन पर गहरा असर पड़ा है। मनोवैज्ञानिक सहायता से उन्हें फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार किया जा रहा है।

साथ ही, बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्हें उनके परिवारों के पास वापस भेजने की तैयारी चल रही है। इसके लिए मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है ताकि बच्चों को सुरक्षित तरीके से उनके घर पहुंचाया जा सके।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

बाल संरक्षण दल ने बताया कि जिन लोगों ने इन बच्चों को काम पर रखा था, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इस कानून के तहत बाल मजदूरी करवाने वाले व्यक्तियों को जेल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि ऐसे अपराधियों को सजा मिले ताकि भविष्य में कोई और बच्चों का शोषण करने की हिम्मत न करे।

नागरिकों से की गई अपील

नागपुर प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि अगर उन्हें कहीं भी बाल मजदूरी की जानकारी मिले तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें। यह हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे सक्रिय रहता है और किसी भी समय शिकायत दर्ज की जा सकती है।

समय पर सूचना मिलने से बच्चों को जल्द से जल्द बचाया जा सकता है। समाज की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के अधिकारों की रक्षा करे और उनके शोषण के खिलाफ आवाज उठाए।

टीम के प्रयासों की सराहना

Railway Museum Nagpur child workers rescue: यह पूरी कार्रवाई जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुनील मेसरे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुस्ताक पठान ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रतिनिधियों अनिकेत भिवगड़े, मीनाक्षी धडाडे, मंगला टेंभुर्णे और रणजीत कुंभारे ने भी पूरी तत्परता से काम किया।

टीम की त्वरित कार्रवाई और समर्पण की बदौलत तीन बच्चों को एक अंधकारमय जीवन से बचाया जा सका। बाल संरक्षण दल लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखता है और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

बाल मजदूरी एक सामाजिक बुराई है जो आज भी कई जगहों पर मौजूद है। गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण बच्चों को मजदूरी के लिए मजबूर किया जाता है। नागपुर की यह कार्रवाई एक सकारात्मक संदेश देती है कि प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।