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संविधान के पृष्ठों पर विज्ञापन से आंबेडकरी अनुयायी आक्रोशित

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद
Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर दीक्षाभूमि में संविधान के पृष्ठों पर विज्ञापन प्रकाशित होने से विवाद। भदंत आर्य नागार्जुन सूरेई ससाई ने दुकानदारों को परिसर से बाहर किया। भीमराज सेना ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आंबेडकरी अनुयायियों ने संविधान सम्मान की मांग की। पुलिस ने विज्ञापनयुक्त प्रतियां जब्त कीं।

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संविधान के सम्मान की लड़ाई

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर के दीक्षाभूमि परिसर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है जिसने आंबेडकरी समुदाय के लोगों को गहरा आघात पहुंचाया है। भारतीय संविधान जो देश का सर्वोच्च दस्तावेज है और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की अमर देन है, उसके आंतरिक पृष्ठों पर व्यावसायिक विज्ञापन छपे हुए पाए गए। यह घटना तब सामने आई जब दीक्षाभूमि परिसर में बिक्री के लिए रखी गई संविधान की कुछ प्रतियों में विज्ञापन देखे गए। इस मामले को लेकर आंबेडकरी अनुयायियों में गहरा आक्रोश फैल गया।

दीक्षाभूमि नागपुर वह पवित्र स्थल है जहां 14 अक्टूबर 1956 को बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। यह स्थान आंबेडकरी समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र और श्रद्धा का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल पर संविधान जैसे पवित्र ग्रंथ का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद
Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद

 

भदंत ससाई का सख्त रुख

परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष और धम्म सेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सूरेई ससाई ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने स्वयं दीक्षाभूमि पहुंचकर पूरे मामले की जांच की और समिति सदस्य विलास गजघाटे के साथ विस्तृत चर्चा की। भदंत ससाई ने साफ शब्दों में कहा कि संविधान आंबेडकरी समुदाय के लिए प्राण के समान है। इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भदंत ससाई का कथन था कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आशा और विश्वास का प्रतीक है जो सदियों से सामाजिक भेदभाव का शिकार रहे हैं। बाबासाहेब ने अपना पूरा जीवन इस संविधान को बनाने में लगा दिया था ताकि देश के हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय मिल सके। ऐसे में इसके पृष्ठों पर व्यावसायिक विज्ञापन छापना संविधान निर्माता के प्रति अपमान है।

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद
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भीमराज सेना ने उठाया मुद्दा

इस मामले को सबसे पहले भीमराज सेना के विदर्भ अध्यक्ष रवी नितनवरे और उनके साथियों ने उजागर किया। रविवार 8 फरवरी को जब उन्हें इस बात की जानकारी मिली कि दीक्षाभूमि परिसर में बिक रही संविधान की प्रतियों में विज्ञापन छपे हैं तो उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत की। भीमराज सेना के कार्यकर्ताओं ने बजाज नगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई और पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दीक्षाभूमि परिसर में पहुंचकर जांच की। पुलिस ने विज्ञापनयुक्त संविधान की कई प्रतियां जब्त कीं और मामले की विस्तृत जांच शुरू की। यह कार्रवाई दिखाती है कि पुलिस प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले को कितनी गंभीरता से लिया।

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: नागपुर में संविधान की प्रतियों पर विज्ञापन से विवाद
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दुकानदारों को निकाला गया

सोमवार को भदंत ससाई ने दोबारा दीक्षाभूमि का दौरा किया और समिति सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन दो दुकानदारों ने विज्ञापनयुक्त संविधान की प्रतियां बेची थीं, उन्हें तुरंत दीक्षाभूमि परिसर से बाहर किया जाए। इस निर्णय को तुरंत लागू किया गया और दोनों विक्रेताओं को परिसर छोड़ने के लिए कहा गया।

इस कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी क्योंकि बड़ी संख्या में आंबेडकरी अनुयायी वहां एकत्रित हो गए थे। हालांकि भदंत ससाई और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान हमें शांतिपूर्ण तरीके से न्याय पाने का मार्ग दिखाता है इसलिए हमें भी शांति से काम लेना चाहिए।

पुलिस को सौंपा निवेदन

भदंत ससाई ने पुलिस को एक निवेदन देने की बात कही जिसमें मांग की गई कि भविष्य में इन दुकानदारों को दीक्षाभूमि परिसर में दुकान लगाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर में बिकने वाले सभी बुद्ध और आंबेडकरी साहित्य की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो।

इस पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन ने जिम्मेदारी से काम किया और परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले की गहराई से जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे।

संविधान का महत्व

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जिसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इस संविधान की रचना में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रमुख भूमिका थी। उन्होंने संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया और संविधान के हर पहलू पर गहराई से विचार किया।

आंबेडकरी समुदाय के लिए संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं है बल्कि यह उनकी आस्था का प्रतीक है। बाबासाहेब ने कहा था कि संविधान ने उन्हें वे अधिकार दिए जो सदियों से उनसे छीने हुए थे। इसलिए संविधान के प्रति किसी भी प्रकार का अपमान आंबेडकरी समुदाय के लिए असहनीय है।

समाज का संदेश

Ambedkarite Followers Protest Constitution Advertisement: इस घटना से यह संदेश मिलता है कि संविधान केवल सरकारी कार्यालयों में रखने की चीज नहीं है बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इसका सम्मान करे। व्यावसायिक लाभ के लिए संविधान के पृष्ठों पर विज्ञापन छापना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह संविधान निर्माताओं के प्रति अपमान भी है।

भदंत ससाई और अन्य नेताओं ने अनुयायियों से अपील की कि वे जहां भी ऐसी गलत प्रतियां देखें, तुरंत सूचना दें। उन्होंने कहा कि केवल प्रामाणिक और मूल संविधान की प्रतियां ही खरीदनी चाहिए जो सरकारी प्रकाशन या विश्वसनीय प्रकाशकों द्वारा छापी गई हों।

जनता की प्रतिक्रिया

इस पूरे प्रकरण में भिक्खु संघ, धम्म सेना, भीमराज सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। हजारों उपासक दीक्षाभूमि पहुंचे और भदंत ससाई के निर्णय का समर्थन किया। लोगों ने कहा कि संविधान उनकी आस्था का विषय है और इसके सम्मान के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगे।

समाज के वरिष्ठ लोगों ने युवाओं से अपील की कि वे संविधान को पढ़ें, समझें और इसका सम्मान करें। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने हमें संविधान रूपी हथियार दिया है जिससे हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। इसलिए हर आंबेडकरी अनुयायी का कर्तव्य है कि वह संविधान का सम्मान करे और दूसरों को भी करने के लिए प्रेरित करे।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।