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Dhantoli Building Scam 2025: नागपुर के धंतोली में नज़ूल और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को हुआ ₹35 लाख का नुकसान

Dhantoli Building Scam 2025: नागपुर के धंतोली में नज़ूल और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को हुआ ₹35 लाख का नुकसान
Dhantoli Building Scam 2025: नागपुर के धंतोली में नज़ूल और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को हुआ ₹35 लाख का नुकसान

नागपुर के धंतोली क्षेत्र में नज़ूल और मनपा अधिकारियों पर बिल्डर से मिलीभगत का आरोप लगा है। कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने इस घोटाले में ₹35 लाख के सरकारी नुकसान का दावा किया है और न्यायिक जांच की मांग की है। प्रशासन ने जांच की पुष्टि की है पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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धंतोली भवन घोटाला – सरकारी तंत्र में साठगांठ का खुलासा

नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर शहर में एक बार फिर सरकारी विभागों की पारदर्शिता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पश्चिम नागपुर के विधायक और शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विकास ठाकरे ने एक बड़े धंतोली भवन घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें नगर निगम (मनपा) और नज़ूल विभाग के अधिकारियों पर बिल्डर से मिलीभगत कर सरकार को करोड़ों की हानि पहुँचाने का आरोप है।

घोटाले का खुलासा और आरोपों की जड़

ठाकरे के अनुसार, धंतोली क्षेत्र में एक प्लॉट को आत्म-निवास उपयोग के लिए लीज पर दिया गया था। परंतु बिल्डर संजीव शर्मा ने इस भूमि पर मल्टीस्टोरी हॉस्पिटल और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया। यह कार्य न केवल लीज की शर्तों का उल्लंघन था, बल्कि नज़ूल नियमों की सीधी अवहेलना भी थी।

विधायक ठाकरे ने दावा किया कि नज़ूल विभाग के अधिकारियों ने 2019 में झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें निर्माण को “आवासीय” बताया गया, जबकि नगर निगम ने पहले ही 2016 में व्यावसायिक+आवासीय निर्माण की अनुमति दी थी। यह दोनों विभागों के बीच स्पष्ट मिलीभगत को दर्शाता है।

Dhantoli Building Scam 2025
Dhantoli Building Scam 2025: नागपुर के धंतोली में नज़ूल और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को हुआ ₹35 लाख का नुकसान

गलत रिपोर्टिंग से हुआ राजकोषीय नुकसान

2020 में जब भूमि को फ्रीहोल्ड रूपांतरण के लिए प्रस्तुत किया गया, तब भी अधिकारियों ने गलत वर्गीकरण किया। आवासीय बताकर वाणिज्यिक भूमि का शुल्क केवल 5% (₹34.78 लाख) लिया गया, जबकि नियमानुसार 10% शुल्क लिया जाना चाहिए था। इस प्रकार, सरकार को सीधे ₹35 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ।

ठाकरे का कहना है कि यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी पर भी प्रश्नचिन्ह है।

विधायक ठाकरे की मांग: “पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच हो”

विकास ठाकरे ने मांग की है कि इस मामले की न्यायिक जांच उच्चस्तरीय समिति से कराई जाए। उनका आरोप है कि नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग ने जानबूझकर नियमों को दरकिनार करते हुए बिल्डर को लाभ पहुँचाया। उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जनता का भरोसा तंत्र पर बहाल हो सके।

स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया और प्रशासन की चुप्पी

धंतोली क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस भूमि पर निर्माण के समय से ही अनियमितताएं स्पष्ट थीं। कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद न तो नज़ूल विभाग ने जांच की और न ही मनपा ने कोई कदम उठाया।

वहीं, प्रशासन ने अब तक इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने से इंकार किया है। अधिकारी केवल इतना कह रहे हैं कि “मामले की जांच चल रही है।”

विपक्ष का निशाना और सरकार पर दबाव

कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात कही है। विपक्ष का आरोप है कि वर्तमान प्रशासन भ्रष्टाचार के मामलों में मूकदर्शक बना हुआ है। ठाकरे ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

नागपुर में बढ़ते भू-माफिया और तंत्र की भूमिका

नागपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भू-माफियाओं और अफसरशाही के गठजोड़ का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते कुछ वर्षों में कई बार नज़ूल भूमि का अनुचित उपयोग सामने आया है, लेकिन कड़े कदम न उठाने से ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व विभाग और नगरीय निकाय में जवाबदेही तय की जाए तो ऐसे घोटालों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

धंतोली भवन घोटाला केवल एक बिल्डिंग विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी का जीवंत उदाहरण है। जब तक अधिकारी–बिल्डर गठजोड़ पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनता के पैसे से ऐसी हेराफेरी जारी रहेगी।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।