प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई
Nalanda Girls Hostel Nagpur rescue operation: नागपुर जिले के इंदोरा इलाके में स्थित इंदोरा बुद्ध विहार के तहत चल रहे ‘नालंदा लड़कियों का छात्रावास’ में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग की उप आयुक्त के आदेश पर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बाल कल्याण समिति नागपुर ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।
इस प्रकरण में छात्रावास के संचालक नागा अर्जुन भंते ससई के साथ-साथ पूरी प्रबंधन समिति को जिम्मेदार माना गया है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला बाल अधिकारों की सुरक्षा और संस्थानों की जवाबदेही के सवाल उठाता है।
जांच में सामने आईं बड़ी खामियां
जब जांच टीम ने छात्रावास का निरीक्षण किया तो कई गंभीर कमियां मिलीं। सबसे पहली बात यह कि संस्थान के पास किसी भी प्रकार का वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं था। बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी दस्तावेज भी मौजूद नहीं थे। छात्रावास में अधीक्षक और सुरक्षा गार्ड जैसे अनिवार्य पदों पर कोई नियुक्ति नहीं की गई थी।
परिसर की स्थिति भी काफी खराब पाई गई। साफ-सफाई का पूरी तरह से अभाव था। बच्चियों को रहने के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। यह स्थिति बाल अधिकारों का खुला उल्लंघन थी। किसी भी छात्रावास के लिए जरूरी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
विभिन्न राज्यों से लाई गई नाबालिग लड़कियां
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि छात्रावास में अरुणाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से नाबालिग बालिकाओं को बिना किसी अधिकृत अनुमति के रखा गया था। इन बच्चियों को उनके परिवारों से दूर लाकर यहां रखा गया था। इनमें से कई अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से संबंधित थीं।
और भी चिंताजनक बात यह थी कि छात्रावास में दो अनाथ बच्चियां भी रह रही थीं। इन बच्चियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। उनके अभिभावक या संरक्षक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। यह साफ संकेत था कि संस्थान बिना किसी कानूनी औपचारिकता के संचालित हो रहा था।
29 लड़कियों को किया गया रेस्क्यू
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। छात्रावास में रह रही कुल 29 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया। इन सभी बच्चियों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। उनकी मेडिकल जांच भी कराई गई ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं।
बाल कल्याण समिति ने इन बच्चियों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी ली है। उनके परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। जिन बच्चियों के परिवार दूसरे राज्यों में हैं, उनकी जानकारी संबंधित राज्यों के बाल कल्याण विभाग को दी गई है। अनाथ बच्चियों के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई शुरू
संबंधित पदाधिकारियों पर किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 41 और 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 41 बच्चों के साथ क्रूरता और उपेक्षा से संबंधित है, जबकि धारा 75 अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान करती है।
नागा अर्जुन भंते ससई और पूरी प्रबंधन समिति को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि छात्रावास कब से बिना अनुमति चल रहा था और कितनी बच्चियां अब तक यहां रह चुकी हैं।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
Nalanda Girls Hostel Nagpur rescue operation: यह मामला बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के पालन पर सवाल खड़े करता है। छात्रावास जैसी संस्थाओं को बिना उचित निगरानी के कैसे चलने दिया गया, यह जांच का विषय है। प्रशासनिक स्तर पर भी लापरवाही की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संस्थाओं पर नियमित निगरानी जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए। किसी भी छात्रावास को बिना उचित पंजीकरण और अनुमति के नहीं चलने देना चाहिए।
इस मामले में आगे की जांच जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। रेस्क्यू की गई लड़कियों की सुरक्षा और उनके भविष्य की चिंता प्रशासन की प्राथमिकता है।