नागपुर शहर के पुलिस थाना वाठोडा ने एक बार फिर अपनी सूझबूझ और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए चार महीनों से लापता 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को सुरक्षित बरामद किया है। यह पूरा मामला सोशल मीडिया की ताकत और पुलिस की समझदारी का अनूठा उदाहरण बन गया है। इंस्टाग्राम पर डाली गई एक स्टोरी ने पुलिस को वह अहम सुराग दिया, जिसकी तलाश चार महीनों से जारी थी।
मामले की शुरुआत और पुलिस कार्रवाई
नागपुर शहर के पुलिस थाना वाठोडा में 28 सितंबर 2025 को अपराध क्रमांक 522/2025 दर्ज किया गया था। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत पंजीकृत हुआ। एक 15 वर्षीय लड़की के लापता होने की शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी। परिवार की व्यथा और चिंता को समझते हुए पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और हर संभव प्रयास शुरू कर दिए।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री हरिशकुमार बोराडे के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने दिन-रात मेहनत की। चार महीनों तक चली इस तलाश में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी।
कई जिलों में चली तलाश
लापता लड़की की खोज के लिए पुलिस टीम ने वर्धा, गोंदिया और नागपुर के ग्रामीण इलाकों में व्यापक तलाश अभियान चलाया। हर संभावित जगह पर छानबीन की गई। स्थानीय सूचनाओं के आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी भी की गई। लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। यह मामला धीरे-धीरे जटिल होता जा रहा था और परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
पुलिस ने पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया। फोन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी। यही रणनीति आगे चलकर सफलता की कुंजी साबित हुई।
सोशल मीडिया बना अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली कि आरोपी वाई-फाई कनेक्शन के जरिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर रहा है। पुलिस की साइबर टीम ने इस सुराग को पकड़ा और गहराई से निगरानी शुरू की। तीन दिन पहले आरोपी ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी डाली थी। इस स्टोरी में मौजूद संकेत और लोकेशन के आधार पर पुलिस को एक अहम कड़ी मिल गई।
यह स्टोरी पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुई। तकनीकी विशेषज्ञों ने स्टोरी के मेटाडेटा और अन्य जानकारियों का विश्लेषण किया। इससे यह पता चला कि आरोपी पुणे या उसके आसपास के इलाके में हो सकता है।
योजनाबद्ध तरीके से बिछाया गया जाल
पुलिस उपायुक्त परिमंडल 5, श्री निकेतन कदम (IPS) की अनुमति और मार्गदर्शन में एक विशेष योजना तैयार की गई। इस योजना में सबसे अहम भूमिका महिला पुलिस कर्मचारी मयुरी ने निभाई। उन्होंने एक बनावटी पहचान बनाकर सोशल मीडिया के जरिए आरोपी से संपर्क साधा।
धीरे-धीरे विश्वास कायम करते हुए मयुरी ने आरोपी से बातचीत जारी रखी। आरोपी को किसी तरह का शक न हो, इसके लिए बेहद सावधानी बरती गई। इस दौरान आरोपी ने अपनी लोकेशन के बारे में कुछ संकेत दिए, जिन्हें पुलिस ने बारीकी से नोट किया।
पुणे से बारामती तक का सफर
जानकारी मिलने के बाद विशेष पुलिस टीम तुरंत नागपुर से पुणे के लिए रवाना हुई। टीम में अनुभवी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। पुणे पहुंचकर टीम ने स्थानीय पुलिस से समन्वय स्थापित किया और आगे की कार्रवाई की योजना बनाई।
मिली जानकारी के आधार पर टीम बारामती की ओर बढ़ी। वहां से भवानीनगर तक का सफर तय करते हुए पुलिस ने हर कदम बेहद सावधानी से उठाया। आखिरकार भवानीनगर में आरोपी का सुराग मिला और पुलिस ने उसे घेर लिया।
आरोपी की गिरफ्तारी और लड़की की बरामदगी
भवानीनगर में पुलिस ने 22 वर्षीय मयूर रमेश वघरे को हिरासत में लिया। शुरुआत में आरोपी ने सब कुछ नकारने की कोशिश की, लेकिन सबूतों के सामने उसका झूठ टिक नहीं सका। गहन पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
इसके बाद पुलिस ने 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को सुरक्षित बरामद किया। चार महीनों की लंबी प्रतीक्षा के बाद जब बच्ची अपने परिवार से मिली, तो वह पल भावुक कर देने वाला था। लड़की की मां ने आंसू भरी आंखों से नागपुर पुलिस का धन्यवाद किया और उनकी मेहनत की सराहना की।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी मयूर रमेश वघरे को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कस्टडी की मांग की। न्यायालय ने मामले की जांच और आगे की कार्रवाई के लिए दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की।
पुलिस अब आरोपी से और अधिक जानकारी जुटा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मामले में कोई और व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आरोपी ने किस तरह लड़की को बहलाया-फुसलाया और इतने लंबे समय तक कैसे छुपाए रखा।
पुलिस की संवेदनशीलता और कुशलता
यह पूरा मामला नागपुर पुलिस की संवेदनशीलता, साहस और तकनीकी दक्षता का बेहतरीन उदाहरण है। पुलिस ने न सिर्फ पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया, बल्कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का भी सही उपयोग किया। महिला पुलिस कर्मचारी मयुरी की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री हरिशकुमार बोराडे और पुलिस उपायुक्त श्री निकेतन कदम (IPS) के कुशल नेतृत्व में यह ऑपरेशन सफल रहा। उनकी योजना, धैर्य और दृढ़ संकल्प ने एक परिवार को उसकी बेटी वापस दिलाई।
समाज के लिए सबक
यह घटना समाज के लिए कई सबक छोड़ती है। सबसे पहले, माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में बच्चे आसानी से गलत लोगों के संपर्क में आ सकते हैं।
दूसरा, पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहयोग जरूरी है। इस मामले में भी परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिससे समय पर कार्रवाई हो सकी।
तीसरा, यह घटना दिखाती है कि तकनीक अपराध करने के साथ-साथ अपराधियों को पकड़ने में भी मददगार हो सकती है। सही कौशल और समझ के साथ सोशल मीडिया महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है।
नागपुर पुलिस की यह सफलता प्रदेश भर की पुलिस टीमों के लिए प्रेरणादायक है। यह साबित करता है कि संकल्प, मेहनत और तकनीकी कौशल के साथ कोई भी मामला सुलझाया जा सकता है।