नागपुर शहर के इटवारी इलाके में बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई है। 5 फरवरी 2026 को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर आई शिकायत के बाद एक आलीशान कपड़े की दुकान और उससे जुड़ी फैक्ट्री पर छापा मारा गया। इस छापे में 6 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया जिन्हें अवैध रूप से काम पर रखा गया था। ये सभी बच्चे 14 से 17 साल की उम्र के बीच के थे और इन्हें दूसरे राज्यों से लाकर यहां मजदूरी करवाई जा रही थी।
बाल संरक्षण दल की संयुक्त कार्रवाई
महिला एवं बाल विकास विभाग की चाइल्ड हेल्पलाइन, श्रम विभाग और शिक्षा विभाग की एक संयुक्त टीम ने मिलकर यह छापेमारी की। कई दिनों से इस दुकान पर नजर रखी जा रही थी। जब पुख्ता सबूत मिले तो अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। छापे के दौरान पता चला कि इन बच्चों को बहुत कम मजदूरी दी जा रही थी और उनसे जबरन काम कराया जा रहा था। बच्चों के साथ किसी तरह की इंसानियत नहीं बरती जा रही थी।
दुकान के साथ चल रही थी फैक्ट्री
जांच में यह भी पता चला कि यह सिर्फ एक कपड़े की दुकान नहीं थी बल्कि इसके पीछे एक छोटी फैक्ट्री भी चल रही थी। इस फैक्ट्री में ये नाबालिग बच्चे कपड़े सिलने, प्रेस करने और पैकिंग का काम करते थे। बच्चों को सुबह से लेकर देर रात तक काम करना पड़ता था। उन्हें ना तो ठीक से खाना मिलता था और ना ही आराम करने का समय। उनके रहने की व्यवस्था भी बेहद खराब थी।
बच्चों को नहीं मिली थी बुनियादी सुविधाएं
छापे के दौरान अधिकारियों ने पाया कि इन बच्चों को किसी तरह की कानूनी सुरक्षा नहीं दी गई थी। इन्हें शिक्षा का अधिकार भी नहीं मिल रहा था। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे और सारा दिन काम में ही लगे रहते थे। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं था। दुकान मालिक ने इन बच्चों का पूरी तरह से शोषण किया था। बच्चों के स्वास्थ्य की भी कोई देखभाल नहीं की जा रही थी।
अन्य राज्यों से लाए गए थे बच्चे
जांच में सामने आया कि ये सभी छह बच्चे नागपुर के नहीं थे। इन्हें अन्य राज्यों से लाकर यहां काम पर रखा गया था। बच्चों के परिवार बहुत गरीब हैं। दुकान मालिक ने उनके परिवार वालों को झूठे वादे करके बच्चों को नागपुर लाया था। उन्हें कहा गया था कि बच्चों को काम सिखाया जाएगा और अच्छी तनख्वाह दी जाएगी। लेकिन यहां आने के बाद बच्चों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया गया।
कानूनी कार्रवाई शुरू
इस मामले में दुकान मालिक और उसके साथियों के खिलाफ कई कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और धारा 79 के तहत भी मामला दर्ज हुआ है। धारा 75 बच्चों के प्रति क्रूरता से जुड़ी है जबकि धारा 79 बच्चों की अवैध नियुक्ति से संबंधित है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत तहसील पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।
बच्चों को भेजा गया सुरक्षित स्थान पर
रेस्क्यू किए गए सभी छह बच्चों की सबसे पहले चिकित्सकीय जांच करवाई गई। डॉक्टरों ने बच्चों की सेहत की पूरी जांच की। जांच के बाद बच्चों को सुरक्षित बालगृह में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बालगृह में इन बच्चों का ठीक से ख्याल रखा जाएगा। उन्हें खाना, कपड़ा और पढ़ाई की सुविधा दी जाएगी। अधिकारी बच्चों के परिवार वालों से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बच्चों को उनके घर वापस भेजा जा सके।
दोषियों के खिलाफ सख्त कदम
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दुकान मालिक, प्रबंधक और जो भी व्यक्ति इस काम में शामिल थे, उन सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तरह के और भी मामले हैं। अगर कहीं और भी बच्चों से जबरन मजदूरी करवाई जा रही है तो वहां भी कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों से की गई अपील
अधिकारियों ने शहर के लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिले तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें। यह नंबर 24 घंटे काम करता है। हर किसी को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो। बाल श्रम एक अपराध है और इसे रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा। लोगों की मदद से ही ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
बाल श्रम क्यों है गंभीर समस्या
बाल श्रम भारत में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। गरीबी की वजह से कई परिवार अपने बच्चों को काम पर भेजने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जो बच्चे पढ़ाई की उम्र में काम करते हैं, वे अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। उनका बचपन छीन जाता है। सरकार ने बाल श्रम के खिलाफ कड़े कानून बनाए हैं लेकिन उन्हें सख्ती से लागू करने की जरूरत है।
समाज की भूमिका जरूरी
इस तरह की घटनाओं को रोकने में समाज की बहुत बड़ी भूमिका है। अगर हम अपने आसपास ध्यान दें तो कई जगह बच्चों को काम करते हुए देख सकते हैं। ढाबों, दुकानों, कारखानों और घरों में बच्चों से काम कराया जाता है। हमें ऐसे मामलों की तुरंत शिकायत करनी चाहिए। बच्चों को शिक्षा का अधिकार है और उन्हें स्कूल जाना चाहिए। हर बच्चे को खेलने, पढ़ने और अपने सपने पूरे करने का मौका मिलना चाहिए। नागपुर की यह कार्रवाई एक अच्छा संदेश है कि बाल श्रम के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।