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महा-रेशम अभियान 2026: नागपुर में रेशम उद्योग के लिए किसानों का पंजीकरण शुरू

Maha-Resham Abhiyan 2026: नागपुर में रेशम उद्योग के लिए किसानों का पंजीकरण शुरू, जानें पूरी जानकारी
Maha-Resham Abhiyan 2026: नागपुर में रेशम उद्योग के लिए किसानों का पंजीकरण शुरू, जानें पूरी जानकारी

Maha-Resham Abhiyan 2026: नागपुर जिले में 4 फरवरी से 5 मार्च 2026 तक महा-रेशम अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत रेशम खेती में रुचि रखने वाले किसानों का पंजीकरण किया जा रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

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नागपुर में शुरू हुआ महा-रेशम अभियान, किसानों को मिलेगा रोजगार का नया मौका

नागपुर जिले में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 4 फरवरी 2026 से 5 मार्च 2026 तक महा-रेशम अभियान 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रेशम खेती के बारे में जानकारी देना और इच्छुक किसानों का पंजीकरण करना है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

नागपुर की जलवायु रेशम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। इसके बावजूद, जानकारी की कमी के कारण बहुत से किसान इस क्षेत्र में नहीं आ पाए हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर साल महा-रेशम अभियान चलाया जाता है। इस बार नागपुर जिले में यह अभियान व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।

रेशम उद्योग क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद

रेशम उद्योग पूरी तरह से कृषि पर आधारित है। यह एक ऐसा उद्योग है जो किसानों को सुनिश्चित और सतत आय प्रदान करता है। पारंपरिक खेती के मुकाबले रेशम की खेती से किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है। इसके अलावा, यह उद्योग रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं रखता है। एक किसान अपने परिवार के साथ इस काम को कर सकता है और अतिरिक्त मजदूरों को भी रोजगार दे सकता है।

रेशम उत्पादन की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं। सबसे पहले तूत यानी शहतूत के पेड़ लगाए जाते हैं। इन पेड़ों की पत्तियां रेशम के कीड़ों का मुख्य भोजन होती हैं। इसके बाद रेशम के कीड़े पाले जाते हैं, जो कोकून बनाते हैं। इन कोकूनों से रेशम का धागा निकाला जाता है। यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी और व्यवस्थित है, लेकिन सरकार की मदद से किसान इसे आसानी से सीख सकते हैं।

नागपुर की जलवायु है रेशम उत्पादन के लिए उपयुक्त

नागपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों की जलवायु रेशम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यहां का तापमान, नमी और मिट्टी की गुणवत्ता तूत के पेड़ों की खेती के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, रेशम के कीड़ों के पालन के लिए भी यहां की जलवायु सही है। यही कारण है कि सरकार नागपुर जिले में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है।

हालांकि, अभी तक जिले के बहुत से किसानों को इस बात की जानकारी नहीं है कि वे रेशम की खेती कर सकते हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि इसके लिए सरकार की ओर से क्या-क्या सहायता उपलब्ध है। महा-रेशम अभियान इसी जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए शुरू किया गया है।

अभियान के तहत मिलेगी पूरी जानकारी और प्रशिक्षण

महा-रेशम अभियान 2026 के तहत किसानों को रेशम खेती की संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। अभियान में विशेषज्ञों की टीम किसानों को रेशम उत्पादन की प्रक्रिया समझाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि तूत के पेड़ कैसे लगाएं, रेशम के कीड़े कैसे पालें और कोकून से रेशम का धागा कैसे निकालें। इसके अलावा, किसानों को बाजार की जानकारी भी दी जाएगी ताकि वे अपने उत्पाद को सही दाम पर बेच सकें।

अभियान के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। सरकार रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की सब्सिडी और आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इन योजनाओं के तहत किसानों को तूत के पौधे, रेशम के बीज और आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए अनुदान मिलता है। इसके अलावा, प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जाती है।

पंजीकरण की प्रक्रिया और संपर्क जानकारी

जो किसान रेशम उद्योग में रुचि रखते हैं और इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित अवधि के दौरान पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद सरल है। इच्छुक किसान जिला रेशम कार्यालय में जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

जिला रेशम कार्यालय उमरेड रोड पर निर्मल नगरी के पास स्थित है। किसान यहां सीधे जाकर या फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जिला रेशम विकास अधिकारी श्री स्वप्नील तायडे ने सभी इच्छुक किसानों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और रेशम उद्योग से जुड़ें।

ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव की उम्मीद

महा-रेशम अभियान 2026 से नागपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। यदि अधिक से अधिक किसान इस उद्योग से जुड़ते हैं, तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र का विकास होगा। रेशम उद्योग से जुड़े अन्य व्यवसाय भी पनपेंगे, जैसे रेशम का व्यापार, धागे की बुनाई और रेशमी कपड़ों का निर्माण। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

सरकार का यह प्रयास किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ रेशम उत्पादन जैसे वैकल्पिक उद्योगों को अपनाने से किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं

रेशम उद्योग से जुड़े किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को तकनीकी सहायता, आर्थिक अनुदान और बाजार तक पहुंच की सुविधा दी जाती है। महा-रेशम अभियान के दौरान किसानों को इन सभी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

सरकार की योजनाओं में तूत के पौधों की खरीद पर सब्सिडी, रेशम के बीजों की आपूर्ति, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बाजार सुविधा शामिल है। इसके अलावा, रेशम उत्पादन से जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए भी अनुदान दिया जाता है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर किसान कम लागत में अपना उद्योग शुरू कर सकते हैं।

रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं

रेशम उद्योग केवल किसानों तक ही सीमित नहीं है। यह उद्योग रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं रखता है। तूत की खेती से लेकर रेशम के धागे के उत्पादन और बुनाई तक, हर चरण में मजदूरों की जरूरत होती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या कम होगी।

खासकर महिलाओं के लिए रेशम उद्योग रोजगार का एक अच्छा जरिया बन सकता है। रेशम के कीड़ों की देखभाल, कोकून की कटाई और धागे की बुनाई जैसे काम महिलाएं घर पर रहकर भी कर सकती हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर

महा-रेशम अभियान 2026 नागपुर जिले के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह अभियान न केवल उन्हें रेशम खेती की जानकारी देगा, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ेगा और आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। जो किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कुछ नया करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

रेशम उद्योग की सफलता के लिए जरूरी है कि किसान सही जानकारी और तकनीक से लैस हों। महा-रेशम अभियान इसी उद्देश्य से चलाया जा रहा है। यदि किसान इस अवसर का सही तरीके से लाभ उठाते हैं, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

जिला रेशम विकास अधिकारी श्री स्वप्नील तायडे ने सभी इच्छुक किसानों से आग्रह किया है कि वे 4 फरवरी से 5 मार्च के बीच जिला रेशम कार्यालय से संपर्क करें और इस योजना का हिस्सा बनें। यह न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे नागपुर जिले के लिए एक बेहतर भविष्य की शुरुआत हो सकती है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।