महाराष्ट्र की कृषि में एआई की क्रांति
Maharashtra AI Agriculture Revolution | India AI Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान महाराष्ट्र ने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई के उपयोग को लेकर अपनी सफलता की कहानी पूरे देश के सामने रखी। इस मशीन पर राज्य के कृषि विभाग ने “एग्रीकल्चर कम्पेंडियम” नामक एक खास दस्तावेज़ जारी किया। इस कंपेंडियो में बताया गया है कि किस तरह से महाराष्ट्र में खेती के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को अपनाकर किसानों की जिंदगी बदल दी गई है।
यह शिखर सम्मेलन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इस टोकन का मंच था कि किस तरह की तकनीक और वनस्पति खेती के लिए एक नया रास्ता बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार ने यह साबित किया है कि AI सिर्फ शहरों और बड़ी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि गांव के छोटे किसानों के लिए भी जरूरी और उपयोगी है।

किसानों को मिल रहा 22 लाख का फायदा
महाराष्ट्र सरकार ने महाविस्तार नाम की एक एआई आधारित प्रणाली शुरू की है। इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह वॉयस फर्स्ट तकनीक पर काम करती है। इसका मतलब यह है कि किसानों को पढ़ाई नहीं आती तो वे भी अपनी आवाज से ही इस सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेष रूप से मराठी की स्थानीय बोलियों को समझने की क्षमता इस प्रणाली को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिला किसानों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हुई है। अब तक 22 लाख से ज्यादा किसान इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं और खेती से जुड़ी सलाह समय पर मिल रही हैं। यह सिर्फ जानकारी देने वाला सिस्टम नहीं है बल्कि यह मौसम की भविष्यवाणी से लेकर फसल की देखभाल तक हर जरूरी मदद करता है।

खेत पर ही मिट्टी की जांच संभव
कॉम्बेंडियम में वसुधा और नियोपार्क जैसे कॉम्बिनेशन फ़ेस्टिवल का भी ज़िक्र किया गया है। इन साजो-सामान की सबसे बड़ी लूट यह है कि किस खेत पर ही ले जाया जा सकता है। किसान को अब मिट्टी का पौधा लेकर शहर की लैब तक नहीं जाना। ये उपकरण 90 फीसदी तक स्थापित के साथ मिट्टी की जांच कर लेते हैं।
मिट्टी की जांच से पता चलता है कि किस तत्व की कमी है और किस पोषक तत्व की आवश्यकता है। इस किसान को सही मात्रा में खादी उत्पाद में मदद मिलती है। न तो पैसा टूटता है और न ही जमीन को नुकसान होता है। इस प्रौद्योगिकी सतत खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।

सैटेलाइट से फ़सल की निगरानी
महाराष्ट्र सरकार ने उपग्रह आधारित फसल पर्यवेक्षण प्रणाली भी शुरू की है। इस तकनीक की मदद से अंतरिक्ष से ही सरकार की तस्वीरें ली जाती हैं। इन आंकड़ों के माध्यम से पता चलता है कि फसल की सेहत कैसी है, किस हिस्से में पानी की कमी है या किस हिस्से का प्रकोप है।
सैटसोर्स नाम की एक और तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक किसानों के लिए डिजिटल क्रेडिट स्कोर तैयार करती है। इस स्कोर के आधार पर किसानों को सिर्फ एक दिन में कर्ज मिलता है। पहले किसानों को ऋण के लिए सामान्य प्रतीक्षा करनी पड़ती थी और कई बार ऋण की कमी का कारण ऋण नहीं मिलता था। अब यह पूरी तरह से आसान और तेज़ हो गया है।
नागपुर की कंपनी का बड़ा योगदान
इस पूरे प्रोजेक्ट में नागपुर स्थित AI कंपनी Click2Cloud का बड़ा योगदान है। इस कंपनी ने AgriPilot.ai नाम से एक प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।
Click2Cloud के CEO प्रशांत मिश्रा के नेतृत्व में यह पहली खेती में तकनीकी क्रांति ला रही है। नागपुर से यह तकनीक अब पूरे महाराष्ट्र में फेल हो रही है। यह साबित करता है कि भारत के छोटे शहरों में भी बड़ी तकनीकी का उदय हो सकता है और वे देश की प्रगति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मित्र और विश्वास
महाराष्ट्र की यह पहल सिर्फ तकनीक तकनीक तक सीमित नहीं है। इसका मकसद खेती करना और खेती करना भी है। जब किसान को यह पता चलता है कि उसके किसान की निगरानी हो रही है और सरकार उसकी मदद के लिए तैयार है तो उसकी बढ़त बढ़ गई है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ये सभी किसान किसानों तक आसानी से पहुंच सकें। इसके लिए गांव-गांव में प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं जहां किसानों को इन तकनीकों का प्रयोग सिखाया जाता है।
भविष्य की कहानियाँ
Maharashtra AI Agriculture Revolution | India AI Summit 2026: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में महाराष्ट्र के ये योद्धा देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन गया है। अब राज्य भी खेती में एआई के अन्य उपयोग को लेकर गंभीर हो रहे हैं। महाराष्ट्र ने यह दिखाया है कि अगर सरकार इच्छाशक्ति और सही योजना के साथ काम करती है तो प्रौद्योगिकी किसानों की किस्मत बदल सकती है।
यह पहले आने वाले समय और विस्तार सूचक में था। सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान इन किसानों तक पहुंचे और महाराष्ट्र में खेती सबसे आगे रहे। एआई और खेती का यह संगम भारत के कृषि क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख रहा है।