नागपुर जिले की कामठी नगर परिषद में हाल ही में संपन्न हुए चुनाव विवादों के घेरे में आ गए हैं। 2 दिसंबर को हुए इस चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी मतदान की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी और खासकर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और मंत्री बावनकुले के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में ऐसी अनियमितताओं को बढ़ावा देने वाले या समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति को सत्ता में नहीं रहना चाहिए। संगठन ने इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक करने और सभी सबूतों को जनता के सामने लाने के लिए 4 दिसंबर को नागपुर प्रेस क्लब में एक विशेष पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया है।
चुनाव में हुई अनियमितताओं का खुलासा
कामठी नगर परिषद चुनाव में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती हैं। सूत्रों के अनुसार, मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। फर्जी मतदाताओं की पहचान की गई और कई जगहों पर एक ही व्यक्ति द्वारा कई बार मतदान करने के प्रयास भी सामने आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मतदान केंद्रों पर अनजान लोगों की भीड़ देखी गई, जिनके बारे में यह संदेह है कि वे वास्तविक मतदाता नहीं थे। इसके अलावा, कुछ मतदान केंद्रों पर मतदान अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए व्यवस्थित तरीके से योजना बनाई गई थी।
मंत्री बावनकुले की भूमिका पर सवाल
बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच ने विशेष रूप से राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की भूमिका को निशाने पर लिया है। संगठन का आरोप है कि मंत्री ने या तो इन अनियमितताओं को बढ़ावा दिया या फिर उन्हें रोकने में विफल रहे। कामठी क्षेत्र में मंत्री का राजनीतिक प्रभाव होने के कारण उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले में स्पष्टीकरण दें।
संगठन का कहना है कि जब एक मंत्री के अपने क्षेत्र में इतनी बड़ी अनियमितताएं हो रही हों और उसकी पार्टी पर आरोप लग रहे हों, तो नैतिक रूप से उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह केवल एक राजनीतिक मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना को बचाने का सवाल है।
बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की मांग
बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच ने इस पूरे मामले में कड़ा रुख अपनाया है। संगठन की मांग है कि मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। संगठन का मानना है कि लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए दोषियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
मंच ने यह भी कहा है कि यदि समय रहते इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे व्यापक आंदोलन की चेतावनी देते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता को जागरूक करना और सत्य को सामने लाना उनका मुख्य उद्देश्य है।
पत्रकार सम्मेलन में होगा विस्तृत खुलासा
इस पूरे मामले को सार्वजनिक करने के लिए 4 दिसंबर, गुरुवार को दोपहर 4.30 बजे नागपुर के प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन को संबोधित करेंगी प्रसिद्ध अधिवक्ता सुलेखाताई कुंभारे, जो इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों, सबूतों और दस्तावेजों को जनता और मीडिया के सामने रखेंगी।
अधिवक्ता कुंभारे का कहना है कि उनके पास इस फर्जी मतदान से संबंधित ठोस सबूत हैं और वे सभी जानकारी को पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करेंगी। इस सम्मेलन में मतदान केंद्रों पर हुई गड़बड़ियों के वीडियो, फोटो और अन्य दस्तावेजी सबूत पेश किए जाने की संभावना है।
लोकतंत्र के लिए खतरा
यह पूरा मामला केवल कामठी नगर परिषद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक गंभीर चुनौती है। जब स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ियां होती हैं, तो यह पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
मतदाताओं का विश्वास लोकतंत्र की नींव है। जब यह विश्वास टूटता है, तो पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाती है। इसलिए इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
जांच की मांग
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को इस मामले में संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच करनी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो चुनाव परिणामों को रद्द करने और पुनः चुनाव कराने की भी मांग उठ सकती है।
स्थानीय प्रशासन पर भी इस मामले में सवाल उठाए जा रहे हैं कि चुनाव के दौरान उचित निगरानी क्यों नहीं रखी गई। मतदान अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की आवश्यकता है।
आगे की राह
कामठी नगर परिषद चुनाव में हुई कथित अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। 4 दिसंबर को होने वाली पत्रकार परिषद के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तव में क्या सबूत हैं और मामला कितना गंभीर है।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और सत्तारूढ़ पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना हर नागरिक और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।