महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षी मिहान परियोजना के तहत चल रहे पुनर्वास कार्य में अहम प्रगति देखी गई है। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने हाल ही में जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना से प्रभावित गांवों के लोगों को अब तक 781 करोड़ 59 लाख रुपये का वितरण किया जा चुका है। यह राशि खापरी (रे.), तेल्हारा, दहेगांव और कलकुही गांवों के उन परिवारों को दी गई है जिनकी जमीनें इस विकास परियोजना में शामिल हुई हैं। पालकमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक प्रभावित लोगों को न्याय दिलाना है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मिहान यानी मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल हब एयरपोर्ट एट नागपुर एक ऐसी परियोजना है जो नागपुर को देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन किसी भी बड़ी विकास परियोजना की तरह, इसमें भी स्थानीय लोगों का विस्थापन एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। सरकार ने इस चुनौती को समझते हुए पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

परियोजना प्रभावितों को मिली सुविधाएं
पालकमंत्री बावनकुळे ने बताया कि प्रभावित परिवारों को केवल आर्थिक मुआवजा ही नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें बेहतर स्थानों पर प्लॉट भी आवंटित किए गए हैं। इन प्लॉटों का चयन इस तरह किया गया है कि लोगों को बुनियादी सुविधाओं की कमी न हो और वे अपना जीवन सामान्य तरीके से जारी रख सकें। राजस्व विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को युद्धस्तर पर अंजाम दिया है ताकि किसी भी तरह की देरी न हो।
विशेष रूप से उन परिवारों का ध्यान रखा गया है जिनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि थी। उन्हें न केवल भूमि का मुआवजा दिया गया है बल्कि वैकल्पिक रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं। कई लोगों को परियोजना क्षेत्र में ही रोजगार दिया गया है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

शिकायत निवारण के लिए विशेष शिविर
पालकमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इतने बड़े पुनर्वास कार्य में कुछ लोगों को असंतोष हो सकता है या उनके पास जरूरी दस्तावेज हो सकते हैं जो अभी तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। ऐसे सभी मामलों के त्वरित समाधान के लिए विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की गई है। इन शिविरों में प्रभावितों की शिकायतें सुनी जाएंगी और एक माह के भीतर उनका निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कदम सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अक्सर बड़ी परियोजनाओं में प्रभावित लोगों की आवाज सुनी नहीं जाती, लेकिन इस मामले में प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई है। विशेष शिविर की व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति अपनी उचित मांग से वंचित न रहे।

भूमि अधिग्रहण के लिए भारी बजट
मिहान परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्य हेतु 3,994 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिली है। यह राशि इस परियोजना के विशाल दायरे को दर्शाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 400 करोड़ रुपये की मांग की गई थी जिसमें से 240 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। शेष निधि की मांग दर्ज की गई है और जल्द ही इसकी स्वीकृति की उम्मीद है।
इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन और समय पर वितरण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन प्रशासन ने अब तक जो प्रगति दिखाई है वह सराहनीय है। 781 करोड़ रुपये का वितरण इस बात का प्रमाण है कि सरकार पुनर्वास कार्य को गंभीरता से ले रही है।

मुख्यमंत्री की सक्रिय भूमिका
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की समय-समय पर समीक्षा की है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पुनर्वास क्षेत्रों में सभी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हों। पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा संस्थानों जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मुआवजे की राशि बाजार मूल्य के अनुसार बढ़ाई जाए ताकि लोगों को उचित मूल्य मिल सके। कई मामलों में प्रारंभिक मुआवजा कम था जिसे संशोधित कर बढ़ाया गया है। यह सकारात्मक बदलाव प्रभावित परिवारों के लिए राहत की बात है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहलू का सम्मान
पुनर्वास योजना में धार्मिक स्थलों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। गांवों में मौजूद मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए नियमानुसार भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुनर्वास क्षेत्र में भी लोगों की आस्था और संस्कृति का सम्मान बना रहे।
कई गांवों में सदियों पुराने धार्मिक स्थल हैं जो स्थानीय समुदाय की पहचान का हिस्सा हैं। इन स्थलों को नए क्षेत्र में भी स्थापित करने की व्यवस्था की गई है जिससे लोगों का भावनात्मक जुड़ाव बना रहे।
राजस्व विभाग का योगदान
इस पूरे पुनर्वास कार्य में राजस्व विभाग की भूमिका सराहनीय रही है। विभाग ने युद्धस्तर पर काम करते हुए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की हैं। भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, मुआवजे की गणना और वितरण जैसे जटिल कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है।
विभाग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल प्रणाली का भी उपयोग किया है। प्रत्येक प्रभावित परिवार की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम हुई है। यह आधुनिक प्रशासनिक तरीके का एक अच्छा उदाहरण है।
आगे की राह
हालांकि पुनर्वास कार्य अब पूर्णता की ओर है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी बाकी हैं। कुछ परिवारों के मामले अभी लंबित हैं जिन्हें विशेष शिविरों के माध्यम से हल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि एक भी परिवार न्याय से वंचित न रहे।
मिहान परियोजना न केवल नागपुर बल्कि पूरे विदर्भ क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह परियोजना रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रभावित लोगों के साथ न्याय हो और उन्हें उचित पुनर्वास मिले।
पालकमंत्री बावनकुळे ने आश्वासन दिया है कि आने वाले समय में भी सरकार प्रभावितों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहेगी। विशेष शिविरों के आयोजन से यह उम्मीद की जा रही है कि बची हुई समस्याओं का भी जल्द समाधान हो जाएगा।
मिहान परियोजना का पुनर्वास कार्य विकास और मानवीय संवेदना के बीच संतुलन बनाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। जब सरकार और प्रशासन मिलकर काम करते हैं और प्रभावित लोगों की आवाज सुनते हैं, तभी विकास का वास्तविक अर्थ सामने आता है। नागपुर की यह परियोजना देश की अन्य विकास परियोजनाओं के लिए एक मिसाल बन सकती है।