Nagpur Sickle Cell Campaign: नागपुर जिले में आनुवंशिक बीमारियों से लड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी डॉ. विपीन इटनकर के मार्गदर्शन में 15 जनवरी 2026 से अरुणोदय सिकलसेल एनीमिया मुक्त विशेष अभियान की शुरुआत होने जा रही है। यह अभियान 7 फरवरी 2026 तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी को सिकलसेल जैसी खतरनाक बीमारी से बचाना है।
जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान की घोषणा करते हुए बताया कि इसके तहत जिले के 0 से 40 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की जाएगी। साथ ही लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनी ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान को केवल एक सरकारी योजना के रूप में नहीं बल्कि जनआंदोलन के रूप में चलाया जाएगा। उनका मानना है कि जब तक समाज इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी नहीं करेगा, तब तक सिकलसेल जैसी बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।
इस अभियान के तहत संदिग्ध मरीजों की प्राथमिक जांच की जाएगी। जिन लोगों में बीमारी के लक्षण पाए जाएंगे, उनकी एचपीएलसी जांच करवाई जाएगी। सबसे खास बात यह है कि पूरा उपचार पूरी तरह से निःशुल्क होगा। इसके अलावा विवाह से पहले और गर्भावस्था से पहले परामर्श पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सके।
सिकलसेल कुंडली मिलाने का नया विचार
इस अभियान की सबसे अनोखी बात है सिकलसेल कुंडली की अवधारणा। युवाओं से आग्रह किया जा रहा है कि वे शादी से पहले अपनी सिकलसेल जांच अवश्य करवाएं और अपनी सिकलसेल कुंडली मिलाएं। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर दोनों साथियों में सिकलसेल की समस्या है तो उनकी संतान में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय संस्कृति और भाषा को ध्यान में रखते हुए गोंडी और अन्य स्थानीय भाषाओं में संदेश तैयार किए गए हैं। ऑडियो क्लिप, बैनर और पोस्टर के माध्यम से यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम
स्कूलों, महाविद्यालयों और आश्रम शालाओं में इस अभियान को विशेष रूप से चलाया जाएगा। बच्चों और युवाओं को जागरूक करने के लिए कई रोचक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रभात फेरी निकालकर लोगों को जगाया जाएगा। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को सिकलसेल के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिताएं और निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी जिनमें सिकलसेल जागरूकता को विषय बनाया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना है ताकि वे बड़े होकर जिम्मेदार नागरिक बनें।
मेलों और धार्मिक आयोजनों में जांच शिविर
नागपुर जिले में समय-समय पर कई स्थानीय मेले, यात्राएं और धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। अभियान के दौरान इन सभी स्थानों पर विशेष जांच स्टॉल लगाए जाएंगे। जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, वहां पहुंचकर अधिक से अधिक लोगों की जांच की जा सकेगी।
इन शिविरों में मौजूद चिकित्सा कर्मचारी लोगों को बीमारी के बारे में समझाएंगे और तुरंत जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराएंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों को भी इस अभियान का लाभ मिल सके।
घर-घर पहुंचेगा संदेश
अभियान की सफलता के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को सिकलसेल के बारे में बताएंगे और जांच के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच कम है, वहां इन कार्यकर्ताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे लोगों को सही जानकारी दे सकें।
सभी से सहयोग की अपील
Nagpur Sickle Cell Campaign: जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार गहलोत ने 40 वर्ष तक की आयु के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि यह जांच केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह आपके और आपके परिवार के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
खासकर युवाओं से आग्रह किया गया है कि वे शादी से पहले अपनी जांच अवश्य करवाएं। यह एक जिम्मेदार नागरिक होने का प्रमाण है और भावी पीढ़ी के प्रति आपकी जवाबदेही भी।
सिकलसेल क्यों है खतरनाक
सिकलसेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। इस बीमारी में खून की लाल कोशिकाएं सामान्य गोल आकार की जगह हंसिया या सिकल के आकार की हो जाती हैं। ये कोशिकाएं शरीर में सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पातीं, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
मरीजों को बार-बार दर्द, थकान, सांस लेने में परेशानी और संक्रमण का खतरा बना रहता है। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। लेकिन समय पर जांच और सही जानकारी से इस बीमारी को अगली पीढ़ी में जाने से रोका जा सकता है।
सफलता के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
यह अभियान तभी सफल होगा जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी करेगा। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों, धार्मिक नेताओं, शिक्षकों और युवाओं को आगे आकर इस मुहिम का हिस्सा बनना होगा।
नागपुर जिला इस दिशा में एक मिसाल कायम कर सकता है। अगर यह अभियान सफल रहा तो यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि आने वाली पीढ़ी को सिकलसेल जैसी बीमारी से मुक्त समाज देंगे।