कारागार में कैदियों की कला को मिला मंच
Nagpur Central Jail Shivaji Jayanti celebration: नागपुर केंद्रीय कारागार में 17 फरवरी 2026 को एक अनोखी पहल देखने को मिली। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर यहां के कैदियों ने उनके जन्मस्थान शिवनेरी किले की बेहद खूबसूरत प्रतिकृति तैयार की। यह पहल महाराष्ट्र कारागार विभाग के “सुधार एवं पुनर्वसन” के उद्देश्य का एक जीवंत उदाहरण है। जेल प्रशासन का मानना है कि कैदियों की छिपी प्रतिभा को उभारकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।
इस परियोजना में कैदियों ने अपनी सृजनात्मकता और कल्पनाशक्ति का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग करते हुए उन्होंने प्रिंटेड चित्रों के आधार पर इस ऐतिहासिक किले को जीवंत रूप दिया। यह प्रतिकृति न केवल कला का नमूना है बल्कि कैदियों की बदलती सोच का भी प्रतीक है।
शिवनेरी किले का ऐतिहासिक महत्व
शिवनेरी किला महाराष्ट्र के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। 19 फरवरी 1630 को इसी किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। यह किला पुणे जिले के जुन्नर तालुका में स्थित है और मराठा साम्राज्य की नींव का प्रतीक माना जाता है। शिवाजी महाराज ने अपने जीवनकाल में 350 से अधिक किले जीते और बनवाए, जिनसे हिंदवी स्वराज्य की मजबूत नींव रखी गई।
ये किले केवल सुरक्षा के साधन नहीं थे बल्कि प्रशासनिक केंद्र और शत्रुओं पर नजर रखने के महत्वपूर्ण स्थल भी थे। शिवाजी महाराज की सैन्य रणनीति में किलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने पहाड़ी इलाकों में स्थित इन किलों को अपनी ताकत का आधार बनाया।
कारागार विभाग के सुधार कार्यक्रम
महाराष्ट्र कारागार विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल कैदियों को बंद रखना नहीं है बल्कि उनका सुधार और समाज में पुनर्वसन करना है। इसी सोच के साथ विभाग विभिन्न कलात्मक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन करता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कैदियों की छिपी प्रतिभा को उभारा जाता है और उन्हें एक सकारात्मक दिशा मिलती है।
नागपुर केंद्रीय कारागार में समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहते हैं जो कैदियों को नए कौशल सीखने और अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर देते हैं। यह पहल उन्हें जेल से बाहर जाने के बाद स्वरोजगार की दिशा में भी मदद करती है।
पूर्व में भी मिली थी सफलता
यह पहली बार नहीं है जब नागपुर केंद्रीय कारागार के कैदियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। पूर्व में नागपुर में आयोजित “शिववैभव किले प्रतियोगिता” में यहां के कैदियों ने रायगड किले की प्रतिकृति बनाकर तृतीय स्थान हासिल किया था। यह उपलब्धि जेल प्रशासन और कैदियों दोनों के लिए गर्व की बात थी।
रायगड किला छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी था और मराठा साम्राज्य का दिल माना जाता था। इस किले की प्रतिकृति बनाना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे कैदियों ने बखूबी अंजाम दिया।
जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर केवल किले की प्रतिकृति ही नहीं बनाई गई बल्कि कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कैदियों के लिए शिवाजी महाराज के जीवन और कार्यों पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसके अलावा शिवगीत और पोवाड़ा जैसे पारंपरिक लोक कलाओं का भी प्रदर्शन हुआ।
महिला कैदियों और बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें चित्रकला, निबंध लेखन और रंगोली प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन गतिविधियों से कैदियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मौका मिला।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता
Nagpur Central Jail Shivaji Jayanti celebration: इस पूरी परियोजना में सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग किया गया। जेल प्रशासन ने कैदियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया। रिसाइकिल सामग्री और प्राकृतिक चीजों से बनी यह प्रतिकृति पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का भी संदेश देती है।
आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन गया है, ऐसी पहल अत्यंत सराहनीय है। कैदियों को यह सिखाया गया कि कैसे कम संसाधनों में भी बेहतरीन काम किया जा सकता है।
समाज में सकारात्मक संदेश
नागपुर केंद्रीय कारागार की यह पहल समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। यह दर्शाती है कि अपराध करने वाला व्यक्ति भी सुधार के माध्यम से समाज का उपयोगी सदस्य बन सकता है। कला और संस्कृति के माध्यम से कैदियों को सही रास्ता दिखाने का यह प्रयास अनुकरणीय है।
जेल प्रशासन की यह सोच कि कैदियों को केवल दंड नहीं बल्कि सुधार की जरूरत है, एक आधुनिक और मानवीय दृष्टिकोण है। ऐसे कार्यक्रमों से कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में वापस आने के लिए तैयार होते हैं।
नागपुर केंद्रीय कारागार का यह प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण है कि कैसे कारागारों को केवल दंड के स्थान से बदलकर सुधार और कौशल विकास के केंद्र में बदला जा सकता है।