नागपुर शहर में युवा दिवस के विशेष अवसर पर एक अनोखी मैराथन का आयोजन किया गया जिसने पूरे शहर में संवैधानिक जागरूकता की एक नई लहर पैदा कर दी। लॉ फोरम नागपुर द्वारा आयोजित इस संविधान के लिए दौड़ मैराथन 2026 में 350 से अधिक धावकों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि संविधान के प्रति सम्मान और जागरूकता का प्रतीक बन गया।
संविधान चौक से हुई शुरुआत
मैराथन की शुरुआत नागपुर के प्रसिद्ध संविधान चौक से की गई जो इस आयोजन के लिए बेहद उपयुक्त स्थान था। सुबह के समय जब धावक इकट्ठा हुए तो पूरा माहौल उत्साह और देशभक्ति से भर गया। तीन किलोमीटर की यह दौड़ विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए थी जिसमें युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों ने भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।
इस आयोजन की खासियत यह रही कि यह सिर्फ शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं था बल्कि संवैधानिक मूल्यों को समाज में फैलाने का एक माध्यम भी था। प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति से यह संदेश दिया कि युवा पीढ़ी अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग है।
जुम्बा और वंदे मातरम के साथ उत्साहवर्धक शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद ऊर्जावान तरीके से हुई। श्री विनीत मोरे के नेतृत्व में जुम्बा वार्म-अप सत्र आयोजित किया गया जिसमें सभी प्रतिभागियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। संगीत की धुन पर किया गया यह वार्म-अप सत्र धावकों को शारीरिक रूप से तैयार करने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी उत्साहित करने वाला था।
इसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर वंदे मातरम का सामूहिक गान किया। देशभक्ति के इस गीत ने पूरे वातावरण को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। लोगों की आंखों में देश के प्रति प्रेम और सम्मान साफ झलक रहा था।
बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि
युवा दिवास के इस खास मौके पर डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संविधान के निर्माता के रूप में बाबासाहेब का योगदान अतुलनीय है और इस मैराथन के माध्यम से उनके विचारों और मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
विशिष्ट अतिथियों ने फूल चढ़ाकर बाबासाहेब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस पल में सभी उपस्थित लोगों ने उस महान व्यक्तित्व को याद किया जिन्होंने भारतीय समाज को समानता और न्याय का मार्ग दिखाया।
हरी झंडी के साथ मैराथन की शुरुआत
सभी औपचारिकताओं के बाद विशिष्ट अतिथियों ने मैराथन को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया। धावक अपने-अपने स्थानों से दौड़ना शुरू कर दिया और पूरा रास्ता उत्साह और जोश से भरा रहा। तीन किलोमीटर का यह सफर केवल दौड़ना नहीं बल्कि संवैधानिक जागरूकता का संदेश फैलाना भी था।
पूरे रास्ते में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्वयंसेवक हर जगह मौजूद थे ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं जिससे धावक निश्चिंत होकर दौड़ सकें।
संवैधानिक प्रदर्शनी का आकर्षण
इस कार्यक्रम की एक खास बात संरक्षणम सेवा प्रतिष्ठान द्वारा लगाई गई संवैधानिक प्रदर्शनी थी। इस प्रदर्शनी में भारतीय संविधान के प्रमुख पहलुओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया गया था। लोगों को संविधान की मूल बातें, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और राज्य के नीति निदेशक तत्वों के बारे में जानकारी दी गई।
यह प्रदर्शनी केवल प्रतिभागियों के लिए नहीं बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खुली थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखाई। चित्रों, पोस्टरों और मॉडल के माध्यम से संविधान को समझाने का यह तरीका बेहद कारगर रहा।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान कई विशिष्ट अतिथियों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इनमें एडवोकेट पल्लवी भावे जो सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ लॉ की प्राचार्य हैं, श्री रविंद्र बोकारे जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर महानगर कार्यवाह हैं, श्री ओशिन सिंह जो चाय द टेस्ट ऑफ पंजाब के संस्थापक हैं, शामिल रहे।
इसके अलावा श्री आनंद कटियारमल, श्री पंकज कोठारी और सुश्री गार्गी चौबे को भी सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों ने इस आयोजन की सराहना की और युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ
मैराथन समाप्त होने के बाद सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया। यह एक भावुक पल था जब सैकड़ों लोगों की आवाज एक साथ गूंज रही थी। संविधान की प्रस्तावना में निहित समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और न्याय के मूल्यों को दोहराना एक अविस्मरणीय अनुभव था।
इस सामूहिक पाठ ने सभी को यह एहसास कराया कि संविधान केवल एक किताब नहीं बल्कि हमारे जीवन का मार्गदर्शक है। युवाओं ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि वे संवैधानिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे।
विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार वितरण
मैराथन के विजेताओं की घोषणा बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में की गई। महिला वर्ग में श्रियशी मोहतकर ने पहला स्थान हासिल किया। उनके चेहरे पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी। विद्या धोटे दूसरे स्थान पर रहीं जबकि मोनी काटेखाये ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
पुरुष वर्ग में प्रणय माहुले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। तेजस बांकर दूसरे स्थान पर रहे और जयप्रकाश काल्हे ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सभी विजेताओं को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सभी उपस्थित लोग सावधान की मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गा रहे थे। यह पल बेहद गौरवशाली और भावुक था। राष्ट्रगान की धुन के साथ ही इस सफल आयोजन का अंत हुआ।
लॉ फोरम नागपुर के सभी सदस्यों की मेहनत रंग लाई और यह कार्यक्रम हर तरह से सफल रहा। इस मैराथन ने न केवल लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक किया बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति भी उनकी समझ बढ़ाई।
युवाओं के लिए प्रेरणा
यह आयोजन युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा। युवा दिवस के मौके पर यह संदेश दिया गया कि युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए। संविधान ने हमें जो अधिकार दिए हैं उनका सम्मान करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाना हर युवा का दायित्व है।
समाज में जागरूकता का संदेश
इस मैराथन के माध्यम से समाज में संवैधानिक जागरूकता फैलाने का उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा। लोगों ने समझा कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि हमारे जीवन जीने का तरीका है। समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय के सिद्धांत हमें बेहतर नागरिक बनाते हैं।
नागपुर शहर में इस तरह के आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह शहर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। लॉ फोरम नागपुर ने एक मिसाल पेश की है कि कैसे खेल और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ा जा सकता है।