नागपुर शहर में एक बार फिर दोस्ती और भाईचारे की मिसाल धूमिल हुई है। पार्वतीनगर इलाके में एक छोटी सी बात पर भड़के दोस्तों ने अपने ही साथी की बेरहमी से हत्या कर दी। गर्लफ्रेंड को लेकर की गई टिप्पणी इतनी महंगी पड़ी कि एक 22 वर्षीय युवक ने अपनी जान गंवा दी। यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और युवाओं में गुस्से पर काबू न रख पाने की समस्या को उजागर करती है।
घटना का पूरा विवरण
कमलना पुलिस थाना क्षेत्र के पार्वतीनगर परिसर में रहने वाला 22 वर्षीय ऋत्विक पटले शनिवार की शाम अपने घर के बाहर अपने दोस्त तनसु नागपुरे के साथ बैठकर बातचीत कर रहा था। शाम का समय था और दोनों दोस्त आराम से गपशप में मशगूल थे। इसी बीच उनका एक और दोस्त मुस्तफा अंसारी वहां पहुंचा। मुस्तफा भी उसी परिसर में रहता था और तीनों अच्छे दोस्त थे।
तीनों दोस्तों ने मिलकर शराब पीना शुरू किया। नशे में धुत होने के बाद बातचीत का सिलसिला चला और इसी बातचीत के दौरान ऋत्विक ने मुस्तफा की गर्लफ्रेंड को लेकर कोई टिप्पणी कर दी। यह टिप्पणी मुस्तफा को नागवार गुजरी और वह तुरंत भड़क उठा। नशे में चूर मुस्तफा को यह टिप्पणी अपनी इज्जत पर हमला लगी।
क्षणभर में बदल गई दोस्ती
गुस्से में आकर मुस्तफा ने तुरंत अपने अन्य साथियों को फोन किया। कुछ ही मिनटों में ईशा अंसारी, लुकमान अंसारी, साहिल अंसारी और एक नाबालिग युवक मौके पर पहुंच गए। पांचों दोस्तों ने मिलकर ऋत्विक पर जानलेवा हमला बोल दिया। आरोपियों ने चाकू और लोहे की रॉड से ऋत्विक पर वार करना शुरू कर दिया।
ऋत्विक के सिर पर गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ युवक वहीं जमीन पर गिर पड़ा। हमला इतना भयंकर था कि ऋत्विक को बचाया नहीं जा सका और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जो लोग कुछ देर पहले साथ बैठकर शराब पी रहे थे, वही एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए।
पुलिस की तत्काल कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कमलना पुलिस थाने की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। एक मां ने अपना जवान बेटा खो दिया था।
पुलिस इंस्पेक्टर तनाजी गहवाने के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी। चश्मदीदों के बयान और आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में ईशा अंसारी, मुस्तफा अंसारी, लुकमान अंसारी, साहिल अंसारी और एक नाबालिग शामिल हैं।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
युवाओं में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति
यह घटना समाज में युवाओं के बीच बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता को दर्शाती है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना और हिंसा पर उतर आना आजकल आम बात होती जा रही है। नशे की लत इस समस्या को और भी गंभीर बना देती है। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से युवा अपने होश खो बैठते हैं और छोटी सी बात को भी बड़ा मुद्दा बना लेते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि युवाओं में गुस्से पर काबू रखने की क्षमता कम होती जा रही है। सोशल मीडिया पर मिलने वाली तुरंत प्रतिक्रिया की आदत ने युवाओं को धैर्यहीन बना दिया है। वे किसी भी बात का तुरंत जवाब देना चाहते हैं और इसके लिए हिंसा का सहारा लेने से भी नहीं हिचकिचाते।
परिवारों पर पड़ा असर
इस घटना ने दोनों तरफ के परिवारों को तोड़ दिया है। एक तरफ ऋत्विक का परिवार अपने जवान बेटे को खोकर शोक में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ पांच परिवारों के युवा जेल में बंद हैं। एक छोटी सी बात ने कितने परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर दी। ऋत्विक के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा बहुत शांत स्वभाव का था और उसने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया।
समाज के लिए सबक
यह घटना पूरे समाज के लिए एक सबक है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों पर नजर रखें और उन्हें सही संगत में रहने की सलाह दें। युवाओं को भी समझना होगा कि गुस्से में लिए गए फैसले जीवन भर का पछतावा दे सकते हैं। नशे से दूर रहना और अपने गुस्से पर काबू रखना बेहद जरूरी है।
पुलिस की अपील
कमलना पुलिस ने इस घटना के बाद इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस इंस्पेक्टर तनाजी गहवाने ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा का रास्ता अपनाना किसी भी समस्या का हल नहीं है। युवाओं को चाहिए कि वे किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाएं। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
नागपुर की यह घटना एक दर्दनाक याद दिलाती है कि कैसे एक पल का गुस्सा पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है। दोस्ती के रिश्ते को निभाना और एक दूसरे का सम्मान करना जरूरी है। समाज को मिलकर ऐसे माहौल बनाने की जरूरत है जहां युवा अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त कर सकें और हिंसा का रास्ता न अपनाएं। ऋत्विक की मौत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। इससे सबक लेकर हमें अपने युवाओं को बेहतर भविष्य देना होगा।