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नागपुर में फर्जी अल्पसंख्यक दर्जा मामला, 9 लोगों पर गंभीर केस दर्ज

Nagpur fake minority status school FIR: नागपुर में फर्जी अल्पसंख्यक दर्जा मामले में 9 लोगों पर केस दर्ज
Nagpur fake minority status school FIR: नागपुर में फर्जी अल्पसंख्यक दर्जा मामले में 9 लोगों पर केस दर्ज (Image: AI)

Nagpur fake minority status school FIR: नागपुर में फर्जी अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करने के मामले में पुलिस ने 9 लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी लाभ लिया गया। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के आदेश पर जांच शुरू हुई और अब इसमें आर्थिक गड़बड़ी और फर्जी भर्ती जैसे और खुलासे होने की संभावना है।

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मामले की जांच में सामने आई सच्चाई

Nagpur fake minority status school FIR: नागपुर। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अल्पसंख्यक दर्जा हासिल कर सरकारी नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर मामले में नागपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मिलिंद नगर स्थित फिरोज विद्या समिति से संचालित फिरोज गांधी विद्यालय के नौ पदाधिकारियों के विरुद्ध पाचपावली पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ता मोहम्मद अली आज़ाद की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 468, 471 और 34 के तहत यह मामला दर्ज हुआ है। यह कार्रवाई राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान द्वारा पुलिस उपायुक्त को जांच के निर्देश दिए जाने के बाद हुई।

आरोपियों पर लगे गंभीर आरोप और आगे की कार्रवाई

आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं: कृष्णकुमार केदारनाथ पांडे, दुर्गाप्रसाद आसाराम गुप्ता, धीरज रत्न कृष्णकुमार पांडे, योगेंद्र रामलोचन शुक्ला, हरिभाऊ नामदेवराव किरपाणे, श्रीमती छाया देवी कृष्णकुमार पांडे, अनिलकुमार केदारनाथ पांडे, श्रीमती रितु अनिरुद्ध तिवारी और विष्णुकुमार केदारनाथ पांडे।

जांच में यह सामने आया कि संस्था ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त किया था। आयोग अध्यक्ष प्यारे खान ने कड़े शब्दों में कहा, “ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त जांच होने पर आर्थिक अनियमितताओं और फर्जी भर्तियों का भी खुलासा हो सकता है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।