Nagpur Railway Station Rescue 22 Children: नागपुर रेलवे स्टेशन पर हाल ही में 22 बिहारी बच्चों को बचाने का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अधिकारियों ने इस मामले में जांच की रफ्तार तेज कर दी है और आर्णी मदरसे के अध्यापक तथा समिति के सदस्यों को रिकॉर्ड के साथ बुलाया गया है। यह घटना बाल सुरक्षा और तस्करी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।
बच्चों को कैसे बचाया गया
नागपुर रेलवे स्टेशन पर गश्त कर रहे रेलवे सुरक्षा बल और बाल कल्याण समिति के सदस्यों को 22 बच्चों का एक समूह संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। ये सभी बच्चे बिहार से थे और उनके साथ कुछ लोग थे जो उन्हें किसी मदरसे में ले जाने की बात कह रहे थे। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित हिरासत में ले लिया।
आर्णी मदरसे पर शिकंजा
जांच में यह बात सामने आई कि बच्चों को आर्णी स्थित एक मदरसे में भेजा जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने मदरसे के अध्यापकों और संचालन समिति के सदस्यों को नागपुर बुलाया है। उनसे मदरसे का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। मदरसे के कर्मचारी भी जांच के लिए नागपुर पहुंच गए हैं। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को किस उद्देश्य से लाया जा रहा था और क्या उनके माता-पिता की सहमति थी।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
यह मामला बाल सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। बाल कल्याण समिति ने बच्चों से पूछताछ की है और उनके परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि कुछ बच्चों के माता-पिता को पूरी जानकारी नहीं थी कि उनके बच्चों को कहां ले जाया जा रहा है।
जांच में क्या हो रहा है
Nagpur Railway Station Rescue 22 Children: पुलिस ने इस मामले में कई कोणों से जांच शुरू की है। मदरसे के पंजीकरण, वित्तीय लेनदेन और पहले भी ऐसी किसी घटना की जानकारी खोजी जा रही है। साथ ही, बच्चों को लाने वाले लोगों की पहचान और उनके उद्देश्य की भी जांच हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी।
आगे की कार्रवाई
बाल कल्याण अधिकारियों ने बच्चों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर रखा है। उनकी मेडिकल जांच करवाई गई है और मनोवैज्ञानिक सहायता भी दी जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बच्चों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला बच्चों की तस्करी और उनके शोषण को रोकने के लिए सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।