नागपुर विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार रोकने के कानूनी प्रावधानों पर जागरूकता कार्यक्रम
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन एवं स्थानीय स्वशासन विभाग ने 14 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पर विशेष व्याख्यान दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को लोक प्रशासन में भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी देना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ और उद्देश्य
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से विश्वविद्यालय गीत और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र वासनिक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि आज के समय में युवाओं को भ्रष्टाचार जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ कानूनी ज्ञान होना बेहद जरूरी है। यह व्याख्यान विद्यार्थियों को लोक सेवा में नैतिकता और पारदर्शिता के महत्व को समझाने के लिए आयोजित किया गया था। मानव्यविद्या संकाय के अधिष्ठाता डॉ. शामराव कोरेटी भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता का परिचय और विषय प्रस्तुति
इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माधुरी बाविस्कर रहीं, जो लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग नागपुर से जुड़ी हैं। उन्होंने अपने लंबे अनुभव के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और उसके 2018 के संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह कानून किस तरह से लोकसेवकों को जवाबदेह बनाता है और भ्रष्टाचार को रोकने में मदद करता है। माधुरी बाविस्कर ने अपनी प्रस्तुति को सरल भाषा में रखा ताकि विद्यार्थी आसानी से समझ सकें।
लोकसेवक की परिभाषा और कानूनी दायरा
व्याख्यान में सबसे पहले लोकसेवक की परिभाषा को स्पष्ट किया गया। माधुरी बाविस्कर ने बताया कि कानून के तहत कौन-कौन लोकसेवक की श्रेणी में आता है। इसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, न्यायाधीश, पुलिस कर्मी और स्थानीय निकायों के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार निजी क्षेत्र के लोग भी यदि सरकारी काम में शामिल होते हैं तो उन्हें भी इस कानून के दायरे में लाया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को यह समझ आया कि कानून का दायरा कितना व्यापक है।
रिश्वतखोरी और आपराधिक दुराचार के प्रावधान
कार्यक्रम में रिश्वतखोरी और आपराधिक दुराचार के विभिन्न रूपों पर विशेष ध्यान दिया गया। माधुरी बाविस्कर ने बताया कि रिश्वत लेना या देना दोनों ही अपराध हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि अगर कोई लोकसेवक अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता है या अवैध तरीके से संपत्ति जमा करता है तो यह आपराधिक दुराचार माना जाता है। उन्होंने वास्तविक मामलों के उदाहरण देकर यह बताया कि इस तरह के अपराधों की सजा क्या होती है और कैसे इनकी जांच की जाती है।
जांच प्रक्रिया और अभियोजन की स्वीकृति
व्याख्यान में जांच प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य वक्ता ने बताया कि लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग किस तरह से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करता है। उन्होंने बताया कि पहले शिकायत मिलती है, फिर प्रारंभिक जांच होती है और सबूत जुटाए जाते हैं। इसके बाद ही मुकदमा चलाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी लोकसेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले सरकार से अनुमति लेनी जरूरी होती है। यह प्रावधान बेवजह परेशान करने से रोकने के लिए बनाया गया है।
साक्ष्य और सबूत संबंधी नियम
कार्यक्रम में साक्ष्य संबंधी प्रावधानों पर भी जानकारी दी गई। माधुरी बाविस्कर ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में सबूत जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने बताया कि कानून में कुछ विशेष प्रावधान हैं जिनसे सबूत की मान्यता बढ़ती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी के पास उसकी आय से ज्यादा संपत्ति मिलती है तो वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए जिम्मेदार होता है। इस तरह की जानकारी विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी रही।
विद्यार्थियों का सक्रिय सहभाग और प्रश्नोत्तर सत्र
व्याख्यान के बाद एक प्रश्नोत्तर सत्र रखा गया जिसमें विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सवाल पूछे। उन्होंने व्यावहारिक मामलों, कानूनी प्रक्रिया और नैतिक मुद्दों पर अपनी जिज्ञासा जाहिर की। माधुरी बाविस्कर ने धैर्य के साथ सभी सवालों के जवाब दिए। इस सत्र से विद्यार्थियों को अपनी शंकाओं का समाधान मिला और उन्हें कानून की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिली।
कार्यक्रम का समापन और आभार
कार्यक्रम का संचालन श्रीवर्धन केकतपुरे ने किया और उन्होंने सभी को कार्यक्रम के विभिन्न चरणों से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में रमण शिवणकर ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, विशेष अतिथि, विभागाध्यक्ष और सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को समाज की वास्तविकताओं से जोड़ते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।