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Nagpur Education: नागपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पाली सम्मेलन आयोजित, कुलगुरु ने बताया पाली भाषा का महत्व

Nagpur Education: नागपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पाली सम्मेलन आयोजित, कुलगुरु ने बताया पाली भाषा का महत्व
Nagpur University Pali Conference: नागपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पाली सम्मेलन की धूम (Image Source: RB / Jassi)

Nagpur University Pali Conference: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में 21 फरवरी को राष्ट्रीय पाली सम्मेलन आयोजित किया गया। कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने पाली भाषा की मधुरता और महत्व बताया। देशभर के विद्वानों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। भदंत डॉ. चंद्रकीर्ति को पाली रत्न सम्मान दिया गया।

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Asfi Shadab
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नागपुर विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय पाली सम्मेलन की मेजबानी की कुलपति ने भाषा की सच्ची मिठास पर प्रकाश डाला

Nagpur University Pali Conference: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर जनसंपर्क विभाग पाली भाषा में सच्चा माधुर्य – कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय पाली सम्मेलन आयोजित नागपुर (25-02-2026): राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पाली-प्राकृत विभाग एवं बौद्ध अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में 21 फरवरी 2026 को छत्रपति शिवाजी महाराज प्रशासनिक परिसर स्थित दीक्षांत सभागार में एक दिवसीय राष्ट्रीय पाली सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि पाली भारत की प्राचीन जनभाषा है, जिसका उच्चारण मन को शांति प्रदान करता है। पाली में वास्तविक मधुरता और सहजता है। तथागत बुद्ध के उपदेश पाली भाषा में उपलब्ध हैं, जो मानव को नैतिकता और सदाचार की शिक्षा देते हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की डॉ. तलत प्रवीन, मेरठ स्थित स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के डॉ. भदंत चंद्रकीर्ति तथा पाली-प्राकृत विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज बोधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में विभिन्न शोधपत्र प्रस्तुत किए गए तथा भदंत डॉ. चंद्रकीर्ति को ‘पाली रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।