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Nagpur News: जामसावली हनुमान लोक में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लिया राम-सीता मंदिर निर्माण का संकल्प

Rambhadracharya Jamsawali Ram Sita Mandir Nagpur: नागपुर के जामसावली हनुमान लोक में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने राम-सीता भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया, बालक का 'राघव' नामकरण किया।
Rambhadracharya Jamsawali Ram Sita Mandir Nagpur: नागपुर के जामसावली हनुमान लोक में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने राम-सीता भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया, बालक का 'राघव' नामकरण किया। (Photo by Reporter Jassi)

Rambhadracharya Jamsawali Ram Sita Mandir Nagpur: जामसावली धाम में रामभद्राचार्य ने हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर कहा कि हनुमान और राम एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। उन्होंने इसी भावना से राम-सीता मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा माहौल भक्ति से भरा रहा।

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जामसावली में गूंजा राम नाम, रामभद्राचार्य ने लिया राम-सीता मंदिर निर्माण का संकल्प

Rambhadracharya Jamsawali Ram Sita Mandir Nagpur: नागपुर। जामसावली धाम ‘हनुमान लोक’ में आयोजित दिव्य रामकथा के दूसरे दिन विश्वविख्यात पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:

“हनुमान जी कभी अकेले नहीं हो सकते, क्योंकि हनुमान के बिना राम अधूरे हैं और राम के बिना हनुमान।”

जगद्गुरु ने स्पष्ट किया कि जहां अंजनीपुत्र विराजमान होते हैं, वहां प्रभु श्रीराम का होना अनिवार्य है। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने मंदिर संस्थान के पदाधिकारियों को मंच पर बुलाया और परिसर में भगवान श्रीराम तथा माता सीता के भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया।

हनुमान और राम के अटूट संबंध पर दिया विशेष संदेश

कथा के दौरान जगद्गुरु ने भगवान श्रीराम की पांच प्रमुख लीलाओं – संस्कार, श्रृंगार, विहार, संहार और राज्याभिषेक – का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का बाल्यकाल और गुरुकुल जीवन ही आदर्श समाज की नींव है। उनकी अमृतमयी वाणी से पूरा धाम राममय हो गया और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब श्रीराम की वेशभूषा में मंच पर आए बालक तस्मय विजय ढवळे का जगद्गुरु ने स्नेहपूर्वक ‘राघव’ नामकरण किया। इस दृश्य पर पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।

रामकथा का क्रम आगे भी जारी रहेगा और श्रद्धालुओं की उपस्थिति प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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Asfi Shadab

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