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सावनेर में बिना फिटनेस और बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे नगर परिषद के कचरा वाहन, नागरिकों की सुरक्षा खतरे में

Savner Vehicle Rules Violation: सावनेर में बिना फिटनेस बीमा के चल रहे कचरा वाहन, खतरनाक लापरवाही उजागर
Savner Vehicle Rules Violation: सावनेर में बिना फिटनेस बीमा के चल रहे कचरा वाहन, खतरनाक लापरवाही उजागर

Savner Vehicle Rules Violation: सावनेर नगर परिषद के कचरा वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और PUC के सड़कों पर चल रहे हैं। वाहन नंबर MH40CM8792 को 6 फरवरी 2026 को पकड़ा गया। सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड ने तत्काल जांच की मांग की है। यह लापरवाही नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

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Savner Vehicle Rules Violation: सावनेर नगर परिषद की लापरवाही का मामला एक बार फिर सामने आया है। शहर में कचरा परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन बिना जरूरी दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ते हुए पकड़े गए हैं। यह घटना महाराष्ट्र के नागपुर जिले के सावनेर शहर में सामने आई है, जहां नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मोटर वाहन अधिनियम की खुली अनदेखी करते हुए नगर परिषद के वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के चलाए जा रहे हैं।

बिना दस्तावेज के सड़कों पर दौड़ रहे सरकारी वाहन

सावनेर नगर परिषद द्वारा संचालित कचरा वाहन संख्या MH40CM8792 को 6 फरवरी 2026 को बिना वैध दस्तावेजों के चलते हुए पकड़ा गया। जांच में पता चला कि इस वाहन के पास न तो फिटनेस प्रमाणपत्र है, न ही बीमा पॉलिसी और न ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र। यह स्थिति केवल एक वाहन तक सीमित नहीं है, बल्कि सूत्रों के अनुसार नगर परिषद के कई अन्य वाहन भी इसी तरह की अनियमितताओं के साथ सड़कों पर चल रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत किसी भी वाहन को सार्वजनिक सड़क पर चलाने के लिए वैध फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा पॉलिसी और PUC सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। यह नियम व्यक्तिगत वाहनों के साथ-साथ सरकारी और व्यावसायिक वाहनों पर भी समान रूप से लागू होता है। लेकिन सावनेर नगर परिषद ने इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की है।

नागरिकों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

बिना उचित दस्तावेजों के वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह नागरिकों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है। अगर ऐसे किसी वाहन से दुर्घटना होती है, तो पीड़ितों को बीमा क्लेम मिलने में भारी कठिनाइयां आ सकती हैं। इसके अलावा, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के चलने वाले वाहन तकनीकी रूप से असुरक्षित हो सकते हैं, जिससे ब्रेक फेल होने या अन्य यांत्रिक खराबी की संभावना बढ़ जाती है।

यदि कोई दुर्घटना होती है, तो न केवल वाहन चालक बल्कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माने जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में नगर परिषद के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है। फिर भी, प्रशासन की ओर से इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज

इस मामले को सामने लाने का श्रेय सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड को जाता है। उन्होंने इस लापरवाही को उजागर करते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। हितेश बनसोड ने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। अगर एक आम नागरिक को बिना दस्तावेज के वाहन चलाने पर जुर्माना और सजा मिलती है, तो सरकारी विभाग भी इससे मुक्त नहीं हो सकते।

उन्होंने आगे कहा कि नागरिकों की जान से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी नगर परिषद के वाहनों की तत्काल जांच की जाए और जो वाहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें सड़क से हटाया जाए। साथ ही, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब सावनेर नगर परिषद पर लापरवाही का आरोप लगा है। पहले भी कई मौकों पर नागरिक सेवाओं में खामियों की शिकायतें मिली हैं। लेकिन इस बार मामला सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा है, जो और भी गंभीर है।

प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता से यह साफ होता है कि नियमों का पालन करना उनकी प्राथमिकता में नहीं है। जबकि आम नागरिकों से छोटी-छोटी गलतियों पर भारी जुर्माना वसूला जाता है, वहीं सरकारी विभाग खुद ही नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। यह दोहरा मापदंड नागरिकों में असंतोष और प्रशासन के प्रति अविश्वास पैदा करता है।

कानूनी प्रावधान और दंड

Savner Vehicle Rules Violation: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192A के तहत बिना वैध बीमा के वाहन चलाने पर 2000 रुपये तक का जुर्माना और तीन महीने तक की कैद हो सकती है। इसी तरह, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के वाहन चलाने पर भी भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। PUC न होने पर भी दंड का प्रावधान है।

अगर ऐसे वाहन से दुर्घटना होती है और किसी की मृत्यु या गंभीर चोट आती है, तो धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। इसमें दो साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, पीड़ित को मुआवजा न मिलने की स्थिति में नगर परिषद को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

नागरिकों की प्रतिक्रिया

सावनेर के नागरिक इस मुद्दे पर काफी नाराज हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि जब हम छोटी सी गलती करते हैं तो हमसे भारी जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन सरकारी वाहन खुलेआम नियम तोड़ रहे हैं और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

एक अन्य नागरिक ने कहा कि यह हमारी सुरक्षा का सवाल है। अगर इन वाहनों से कोई दुर्घटना होती है तो हमें न्याय नहीं मिल पाएगा क्योंकि बीमा नहीं है। नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और यातायात पुलिस इस मामले में हस्तक्षेप करे और दोषियों को सजा दिलाए।

आगे की राह

इस मामले में अब देखना यह है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या नगर परिषद अपने सभी वाहनों के दस्तावेज दुरुस्त करेगी या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। नागरिक सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की जरूरत है।

यह घटना पूरे राज्य में स्थानीय निकायों के वाहनों की जांच की मांग को भी बल देती है। अगर सावनेर में यह स्थिति है, तो संभव है कि अन्य शहरों में भी ऐसी ही अनियमितताएं हो रही हों। राज्य सरकार को चाहिए कि वह सभी नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के वाहनों का ऑडिट करवाए और सख्त दिशा-निर्देश जारी करे।

सावनेर के नागरिक अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा। नियमों का पालन सभी के लिए जरूरी है, चाहे वह सरकारी विभाग हो या आम नागरिक। तभी एक सुरक्षित और अनुशासित समाज का निर्माण संभव है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।