Nagpur University: छत्रपति शिवाजी महाराज को जीवन में उतारें तो सुलझेंगी समाज की सभी समस्याएं | Photos

Shivaji Maharaj lecture In Nagpur University: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित। रवींद्र पाटील ने कहा कि शिवाजी के विचारों को जीवन में उतारने से समाज की सभी समस्याएं सुलझेंगी। प्रजा कल्याण, सशक्त प्रशासन और मराठी को राजभाषा का दर्जा देने की दूरदर्शिता पर जोर दिया गया।
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शिवाजी महाराज के विचारों को जीवन में उतारना जरूरी
Shivaji Maharaj lecture In Nagpur University: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। जलगांव की इतिहास प्रबोधन संस्था के विश्वस्त श्री रवींद्र पाटील ने इस अवसर पर कहा कि यदि छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारा जाए, तो समाज की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। यह कार्यक्रम जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन के सभागार में आयोजित किया गया था।

जीवन का सूत्र है शिवचरित्र
श्री रवींद्र पाटील ने ‘जीवन का सूत्र: शिवचरित्र’ विषय पर अपने व्याख्यान में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा या शासक नहीं थे, बल्कि वे एक आदर्श व्यक्तित्व थे जिनके विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महाराज के विचारों को आत्मसात करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वर्तमान दौर में जब समाज विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है, तब शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपनाना और भी जरूरी हो जाता है।

प्रजा कल्याण को सर्वोपरि मानते थे शिवाजी महाराज
व्याख्यान में श्री पाटील ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासनकाल में प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखा। उन्होंने प्रजा की भलाई के लिए अनेक योजनाएं बनाईं और उन्हें लागू किया। महाराज का मानना था कि शासक का पहला कर्तव्य अपनी प्रजा की सुख-सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने रोजगार सृजन पर भी विशेष बल दिया। शिवाजी महाराज ने यह सुनिश्चित किया कि हर व्यक्ति को रोजगार मिले और कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। यह सोच आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी।

सशक्त प्रशासन और स्वाभिमानी स्वराज्य की स्थापना
श्री रवींद्र पाटील ने अपने व्याख्यान में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक कुशलता की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि महाराज ने एक सशक्त और सुव्यवस्थित प्रशासन की स्थापना की थी। उनका प्रशासन पारदर्शी था और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं थी। शिवाजी महाराज ने स्वाभिमानी स्वराज्य की स्थापना की जो किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं था। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। स्वराज्य की उनकी अवधारणा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें सांस्कृतिक और सामाजिक स्वतंत्रता भी शामिल थी।

मराठी को राजभाषा का दर्जा देने वाले पहले शासक
व्याख्यान में यह भी बताया गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया। यह उनकी दूरदर्शिता का एक उदाहरण है। उस समय जब अधिकतर शासक फारसी या अन्य भाषाओं को प्राथमिकता देते थे, शिवाजी महाराज ने अपनी मातृभाषा को सम्मान दिया। उन्होंने राजकाज में मराठी का प्रयोग किया और प्रजा के साथ संवाद भी मराठी में ही किया। इससे आम जनता को प्रशासन के करीब आने का मौका मिला। यह निर्णय भाषायी गौरव और स्वाभिमान को दर्शाता है।
सुदृढ़ नौसेना के निर्माण की दूरदर्शिता
श्री पाटील ने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा सुदृढ़ नौसेना के निर्माण की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि शिवाजी महाराज ने यह समझा था कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा के बिना राज्य की सुरक्षा अधूरी है। इसलिए उन्होंने एक मजबूत नौसेना का निर्माण किया। उन्होंने तटीय इलाकों में किले बनवाए और समुद्री व्यापार को संरक्षण दिया। यह उनकी सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। आज भी नौसेना की महत्ता को देखते हुए शिवाजी महाराज के इस कदम को दूरदर्शी माना जाता है।
सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदनशील नीति
व्याख्यान में एक विशेष बात यह बताई गई कि छत्रपति शिवाजी महाराज अपने सैनिकों के परिवारों के प्रति अत्यंत संवेदनशील थे। यदि कोई सैनिक युद्ध में शहीद हो जाता था, तो महाराज उसके परिवार की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी लेते थे। शहीद सैनिकों की विधवाओं और बच्चों को राज्य की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती थी। यह नीति दर्शाती है कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और मानवीय शासक थे। यह परंपरा आज भी भारतीय सेना में किसी न किसी रूप में जारी है।
डॉ. शामराव कोरेटी ने शिवाजी को बताया आदर्श लोकनायक
कार्यक्रम के अध्यक्षीय भाषण में डॉ. शामराव कोरेटी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श लोकनायक बताया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने अपने जीवन में जो मूल्य स्थापित किए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. कोरेटी ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित न रहें, बल्कि चरित्र निर्माण पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन चरित्र निर्माण का सबसे अच्छा उदाहरण है।
विश्वविद्यालय में उत्साह के साथ मनाई गई जयंती
Shivaji Maharaj lecture In Nagpur University: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभागार में शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में शिवाजी महाराज की जयकारा लगाई गई। उपस्थित लोगों ने शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विशेष प्रयास किए थे।

