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नागपुर में 30 जनवरी से शुरू होगा स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान, 13 फरवरी तक चलेगा पखवाड़ा

नागपुर में 30 जनवरी से शुरू होगा स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान, 13 फरवरी तक चलेगा पखवाड़ा
Sparsh Leprosy Awareness Campaign: नागपुर में 30 जनवरी से कुष्ठरोग जनजागृति अभियान शुरू, जानें पूरी जानकारी (FB Photo)

Sparsh Leprosy Awareness Campaign: नागपुर में 30 जनवरी से स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान शुरू होगा जो 13 फरवरी तक चलेगा। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शुरू होने वाले इस पखवाड़े में स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और मैराथन आयोजित होंगे।

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Asfi Shadab
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नागपुर में 30 जनवरी से शुरू होगा स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान, 13 फरवरी तक चलेगा पखवाड़ा

नागपुर जिले में कुष्ठरोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत हो रही है। स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान 30 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा। यह पखवाड़ा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुरू किया जा रहा है, जो कुष्ठरोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और समाज में जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठरोग निवारण दिवस मनाया जाता है। इसी के तहत नागपुर जिले में यह अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य साक्षरता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जो समाज के हर वर्ग तक पहुंचेंगे।

गांधी जयंती से जुड़ा है अभियान

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने जीवन में कुष्ठरोग से पीड़ित लोगों के प्रति करुणा और सेवा का भाव रखा था। उन्होंने समाज में इस बीमारी से जुड़े भेदभाव को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए थे। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत करना इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। यह अभियान केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का एक व्यापक प्रयास है।

स्कूलों में होंगी विशेष प्रतियोगिताएं

इस पखवाड़े के दौरान स्कूलों में कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालयों में सुबह प्रार्थना के बाद कुष्ठरोग प्रतिज्ञा का वाचन करवाया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चों में कम उम्र से ही इस बीमारी के प्रति सही समझ विकसित की जाएगी।

स्कूलों में नाटक, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, निबंध लेखन, कुष्ठरोग विषयक गीत और कविता वाचन जैसी गतिविधियां होंगी। रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से कला के जरिए संदेश पहुंचाया जाएगा। पथनाट्य यानी सड़क नाटक के माध्यम से आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि कुष्ठरोग एक ठीक होने वाली बीमारी है।

विद्यार्थियों द्वारा कुष्ठरोग से संबंधित कहावतें और नारे भी बोले जाएंगे। इसके साथ ही प्रभात फेरी का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें बच्चे सुबह के समय गांव या शहर में घूमकर लोगों को जागरूक करेंगे।

मैराथन और सार्वजनिक कार्यक्रम

कुष्ठरोग डोड मैराथन का आयोजन भी इस पखवाड़े की एक खास गतिविधि होगी। इस दौड़ में स्कूली विद्यार्थियों के साथ-साथ आम नागरिक भी भाग ले सकेंगे। यह मैराथन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि समाज में कुष्ठरोग के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी माध्यम बनेगी।

सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि कुष्ठरोग छूने से नहीं फैलता और इसका पूर्ण इलाज संभव है।

कुष्ठरोग को अधिसूचित रोग घोषित किया गया

नागपुर जिले में कुष्ठरोग के पूर्ण उन्मूलन के लिए इसे अधिसूचित रोग घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि अब इस बीमारी की पहचान और उपचार को और अधिक गंभीरता से लिया जाएगा। सरकार ने इस दिशा में कई नए कदम उठाए हैं।

अब तक केवल सरकारी अस्पतालों में ही कुष्ठरोग का इलाज होता था, लेकिन अब निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। इससे उन लोगों की पहचान आसान होगी जो इस बीमारी से प्रभावित हैं लेकिन उपचार नहीं ले रहे हैं।

चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों और डॉक्टरों को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह कदम उपचार की पहुंच को बढ़ाने और अधिक से अधिक मरीजों तक सेवाएं पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां

सहायक संचालक स्वास्थ्य सेवा कुष्ठरोग डॉ विजय डोईफोडे ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पखवाड़े के दौरान विशेष शिविर लगाएं और लोगों की जांच करें।

गांवों और शहरी इलाकों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जांच के लिए प्रेरित करेंगे। जिन लोगों में कुष्ठरोग के लक्षण पाए जाएंगे उन्हें तुरंत इलाज शुरू करवाया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि मरीजों की जानकारी गोपनीय रखी जाए ताकि उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी की अपील

जिलाधिकारी डॉ विपीन इटनकर ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि कुष्ठरोग का उन्मूलन केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।

जिलाधिकारी ने कहा कि जो लोग अपने आसपास ऐसे व्यक्तियों को देखते हैं जिनमें कुष्ठरोग के लक्षण हैं, उन्हें तुरंत स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी देनी चाहिए। सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने वाले सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में कुष्ठरोग से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करना बहुत जरूरी है। यह बीमारी छुआछूत से नहीं फैलती और इसका पूरा इलाज मुफ्त में उपलब्ध है।

कुष्ठरोग के बारे में जरूरी जानकारी

कुष्ठरोग एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से त्वचा और नसों को प्रभावित करती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह विकलांगता का कारण बन सकती है।

इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर सफेद या लाल धब्बे, सुन्नपन, हाथ-पैरों में कमजोरी आदि शामिल हैं। अगर इन लक्षणों को पहचान कर समय पर इलाज शुरू किया जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

सरकार द्वारा कुष्ठरोग का इलाज पूरी तरह मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। मल्टी ड्रग थेरेपी से इसका सफल उपचार संभव है। इलाज के दौरान मरीज सामान्य जीवन जी सकता है और काम भी कर सकता है।

समाज में बदलाव की जरूरत

कुष्ठरोग के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक भेदभाव और गलत धारणाएं हैं। आज भी कई लोग इस बीमारी को अभिशाप मानते हैं और मरीजों से दूर रहते हैं। यह सोच बदलना बहुत जरूरी है।

स्पर्श कुष्ठरोग जनजागृति अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि यह एक सामान्य बीमारी है जिसका इलाज संभव है।

समाज के सभी वर्गों को आगे आकर इस अभियान में भाग लेना चाहिए। धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, और स्थानीय नेताओं को भी इस मुहिम में शामिल होना चाहिए।

आगे की राह

नागपुर में 30 जनवरी से शुरू होने वाला यह अभियान कुष्ठरोग मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पखवाड़े के दौरान जितने अधिक लोग जागरूक होंगे, उतनी ही जल्दी हम इस बीमारी पर विजय पा सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, और जिला प्रशासन ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने की पूरी योजना बनाई है। अब जरूरत है कि आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें और सक्रिय भागीदारी करें।

13 फरवरी तक चलने वाला यह पखवाड़ा न केवल कुष्ठरोग के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा बल्कि समाज में संवेदनशीलता और करुणा का भाव भी विकसित करेगा। यह अभियान महात्मा गांधी के सपनों के भारत की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।