योग यात्रा कार्यशाला: नागपुर विश्वविद्यालय में अंतःशांति की ओर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन
आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच योग की बढ़ती जरूरत को समझते हुए राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर शिक्षा शास्त्र विभाग ने योग को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग द्वारा 1 से 5 जनवरी 2026 तक योग यात्रा अंतःशांति की ओर जाने वाला मार्ग विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और योग की गहराइयों को समझने का प्रयास किया।
आज के समय में जहां मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं योग एक ऐसा माध्यम है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने में सहायक है। इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल योगासन सिखाना नहीं था, बल्कि योग को जीवन जीने की एक समग्र पद्धति के रूप में स्थापित करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन और मुख्य अतिथि
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता स्नातकोत्तर शिक्षा शास्त्र विभाग की प्रमुख एवं अंतरविद्याशाखीय अध्ययन संकाय की अधिष्ठाता डॉ. राजश्री वैष्णव ने की। इस अवसर पर डॉ. प्रभराजे वैद्य, सौ. मीनल पांडे और श्री अखिलेश ब्रह्मे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. राजश्री वैष्णव का मार्गदर्शन
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. राजश्री वैष्णव ने कहा कि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। उन्होंने बताया कि योग के माध्यम से हम न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी संतुलित होते हैं। योग हमें अंतःशांति की ओर ले जाता है, जो आज के तनावपूर्ण माहौल में बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे योग को नियमित अभ्यास का हिस्सा बनाएं।
तीन दिनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला में तीन दिनों तक विभिन्न योग विधियों पर गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिदिन सुबह सूर्यनमस्कार से शुरुआत होती थी, जिसमें विद्यार्थियों को सूर्यनमस्कार के बारह आसनों को सही तरीके से करने का तरीका सिखाया गया। सूर्यनमस्कार न केवल शरीर को ऊर्जा देता है बल्कि पूरे शरीर की मांसपेशियों को भी सक्रिय करता है।
योगासन और उनके लाभ
कार्यशाला में विभिन्न प्रकार के योगासनों का अभ्यास कराया गया। इनमें ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, धनुरासन, शवासन जैसे महत्वपूर्ण आसन शामिल थे। प्रत्येक आसन के शारीरिक और मानसिक लाभों को विस्तार से समझाया गया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार के शारीरिक और मानसिक विकार में कौन सा आसन उपयोगी है।
प्राणायाम का महत्व
योगासनों के बाद प्राणायाम का विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उज्जायी और नाड़ी शोधन जैसी विधियों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि प्राणायाम से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, रक्त संचार सुधरता है और मन शांत होता है। नियमित प्राणायाम से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं में बहुत लाभ मिलता है।
ध्यान और योगनिद्रा की अनुभूति
कार्यशाला में ध्यान और योगनिद्रा को विशेष महत्व दिया गया। प्रतिदिन कम से कम 20 से 30 मिनट का ध्यान सत्र आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को ध्यान की विभिन्न तकनीकें जैसे सांस पर ध्यान केंद्रित करना, मंत्र जाप, विपश्यना आदि सिखाई गईं। योगनिद्रा के माध्यम से गहन विश्राम की अनुभूति कराई गई, जिससे मन और शरीर दोनों को पूर्ण आराम मिलता है।
तनाव प्रबंधन पर विशेष सत्र
आजकल की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में विद्यार्थियों और शिक्षकों में तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में तनाव प्रबंधन पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि योग के नियमित अभ्यास से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जिससे तनाव कम होता है। विद्यार्थियों को तनाव से निपटने के व्यावहारिक उपाय भी सिखाए गए।
विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
इस कार्यशाला में विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के साथ-साथ शोधार्थियों ने भी सक्रिय रूप से प्रशिक्षण लिया। कई विद्यार्थियों ने बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें योग के प्रति एक नई समझ मिली है और वे इसे अपने जीवन का नियमित हिस्सा बनाएंगे। कुछ प्रतिभागियों ने तो पहली बार ध्यान और योगनिद्रा का अनुभव किया और इससे मिलने वाली शांति को महसूस किया।
योग को जीवनशैली बनाने का संदेश
कार्यशाला के समापन सत्र में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि योग को केवल तीन दिन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए और उन्हें योग के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह योग कार्यशाला एक सफल और प्रेरणादायक पहल रही। इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों में न केवल शैक्षणिक विकास होता है, बल्कि समग्र व्यक्तित्व निर्माण भी होता है। योग जैसी प्राचीन भारतीय विद्या को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करना समय की मांग है। ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है।