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महाराष्ट्र के प्रभाग 10 में चुनावी हलचल: प्रमोद सिंह ठाकुर ने बाबावनखुडे की गाड़ी रोककर किया विरोध प्रदर्शन

Prabhag 10 Election: प्रमोद सिंह ठाकुर ने बाबावनखुडे के खिलाफ किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
Prabhag 10 Election: प्रमोद सिंह ठाकुर ने बाबावनखुडे के खिलाफ किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
प्रभाग 10 के कुतुबशाह नगर में 14 जनवरी को कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद सिंह ठाकुर ने चंद्रशेखर बाबावनखुडे की गाड़ी रोककर विरोध प्रदर्शन किया। बाबावनखुडे पर पैसा बांटकर और झूठे वादों से जनता को गुमराह करने का आरोप लगा। दस साल से जनसेवा में लगे प्रमोद ठाकुर ने चुनावी अनैतिकता का विरोध करते हुए जनता से सही फैसला लेने की अपील की।
Updated:

प्रभाग 10 के कुतुबशाह नगर में आज 14 जनवरी को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। महाराष्ट्र के जाने-माने नेता चंद्रशेखर बाबावनखुडे अपने चारों उम्मीदवारों के साथ इस इलाके में चुनाव प्रचार करते हुए नजर आए। लेकिन इस दौरान जो कुछ हुआ, वह आने वाले चुनावों की तस्वीर साफ कर देता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबावनखुडे साहब और उनके साथी लोगों को पैसा बांटकर और तरह-तरह के झूठे वादे करके उन्हें अपनी ओर लुभाने की कोशिश कर रहे थे। यह देखकर कांग्रेस पार्टी के प्रभाग 10 से उम्मीदवार प्रमोद सिंह ठाकुर ने तुरंत कार्रवाई की और एक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

चुनाव के समय बदलते चेहरे

जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है, वह यह है कि जो नेता पहले बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में कुतुबशाह नगर जैसे झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में आने से कतराते थे, जिन्हें वहां की गंदगी और बदबू बर्दाश्त नहीं होती थी, वही लोग आज चुनाव नजदीक आते ही इन्हीं इलाकों में घूम रहे हैं। यह दोहरा चरित्र जनता को साफ दिखाई देता है।

स्लम एरिया में रहने वाले लोग साल भर उपेक्षित रहते हैं, लेकिन जैसे ही चुनाव की घंटी बजती है, ये नेता उनके दरवाजे पर पहुंच जाते हैं। यह राजनीति का वह कड़वा सच है जिसे अब जनता समझने लगी है।

प्रमोद सिंह ठाकुर का साहसिक कदम

जब प्रमोद सिंह ठाकुर को बाबावनखुडे साहब की इन गतिविधियों की खबर मिली, तो उन्होंने तुरंत अपने कार्यकर्ताओं के साथ कुतुबशाह नगर पहुंचकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बाबावनखुडे साहब की गाड़ी को स्लम एरिया के बाहर जाने से रोक दिया और लगभग एक घंटे तक वहीं रोके रखा।

यह कोई सामान्य विरोध नहीं था, बल्कि यह जनता के अधिकारों की रक्षा और चुनावी गड़बड़ी के खिलाफ एक मजबूत संदेश था। प्रमोद सिंह ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपने इलाके में किसी भी तरह की अनैतिक राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे।

दस साल की निरंतर सेवा

प्रमोद सिंह ठाकुर कोई नए नेता नहीं हैं। वे पिछले 10 वर्षों से लगातार प्रभाग 10 में जनसेवा और विकास के काम में लगे हुए हैं। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने कभी सिर्फ चुनाव के समय ही काम शुरू नहीं किया।

चाहे कोई भी मौसम हो, चाहे चुनाव हो या न हो, प्रमोद सिंह ठाकुर हमेशा जनता के बीच रहे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे मुद्दों से लेकर बड़ी समस्याओं तक हर चीज पर ध्यान दिया है। यही वजह है कि स्थानीय लोग उन्हें बड़े भाई के रूप में संबोधित करते हैं।

कुतुबशाह नगर में क्या हुआ

14 जनवरी की सुबह जब बाबावनखुडे साहब अपने काफिले के साथ कुतुबशाह नगर पहुंचे, तो वहां के लोगों ने देखा कि उनके साथी लोगों को पैसे बांट रहे थे। साथ ही, तरह-तरह के वादे किए जा रहे थे जो पहले कभी पूरे नहीं हुए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर चुनाव में यही होता है। नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। इस बार भी यही हो रहा था, लेकिन प्रमोद सिंह ठाकुर ने इसका विरोध किया।

जनता को गुमराह करने की कोशिश

प्रमोद सिंह ठाकुर का आरोप है कि बाबावनखुडे साहब और उनके साथी जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वे झूठे वादों के जरिए लोगों को अपनी ओर लुभाना चाहते हैं। लेकिन जनता अब इन चालों को समझने लगी है।

प्रमोद भैया ने कहा कि लोगों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए। उन्हें यह देखना चाहिए कि पिछले दस साल में किसने उनके लिए काम किया है और कौन सिर्फ चुनाव के समय ही याद आता है।

युवा और ईमानदार नेतृत्व की जरूरत

आज के समय में प्रभाग 10 को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो युवा हो, ऊर्जावान हो और सबसे बढ़कर ईमानदार हो। प्रमोद सिंह ठाकुर इन सभी गुणों को अपने में समेटे हुए हैं। वे न सिर्फ बातें करते हैं, बल्कि जमीन पर उतरकर काम भी करते हैं।

उनकी कर्मठता और जनसेवा की भावना ही उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती है। उन्होंने कभी किसी के दबाव में आकर काम नहीं किया और न ही किसी के झूठे वादों में फंसे।

चुनावी राजनीति का असली चेहरा

आज की घटना ने चुनावी राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। एक तरफ वे नेता हैं जो सिर्फ चुनाव के समय याद आते हैं और पैसा बांटकर वोट खरीदने की कोशिश करते हैं। दूसरी तरफ प्रमोद सिंह ठाकुर जैसे नेता हैं जो साल भर जनता के साथ खड़े रहते हैं।

यह फैसला अब जनता को करना है कि वे किस तरह की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं। क्या वे उन नेताओं को चुनेंगे जो सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देते हैं या उन्हें जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं।

प्रभाग 10 का विकास

प्रभाग 10 के विकास के लिए एक ऐसे प्रतिनिधि की जरूरत है जो वहां की समस्याओं को समझता हो। सड़कों की हालत, पानी की समस्या, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी – ये सब मुद्दे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

प्रमोद सिंह ठाकुर इन सभी मुद्दों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने पिछले दस साल में कई छोटे-बड़े विकास कार्य करवाए हैं और अभी भी उनकी योजनाएं जारी हैं।

जनता से अपील

प्रमोद सिंह ठाकुर ने प्रभाग 10 की जनता से विनम्र अपील की है कि वे किसी के झूठे बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि जो नेता दस साल में एक बार भी नहीं आए, वे अब सिर्फ वोट के लिए आ रहे हैं।

उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे अपने मत का सही इस्तेमाल करें और एक ऐसे नेता को चुनें जो उनके साथ हमेशा खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनाव नहीं है, बल्कि प्रभाग 10 के भविष्य का सवाल है।

आगे की रणनीति

प्रमोद सिंह ठाकुर ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह की अनैतिक चुनावी गतिविधि बर्दाश्त नहीं करेंगे। आज का विरोध प्रदर्शन इसका एक उदाहरण था। आने वाले दिनों में भी वे ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे।

उनका कहना है कि चुनाव साफ-सुथरे तरीके से होना चाहिए और जनता को अपनी पसंद का नेता चुनने का पूरा अधिकार होना चाहिए। पैसे की ताकत से चुनाव नहीं जीते जा सकते।

14 जनवरी की यह घटना प्रभाग 10 की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। प्रमोद सिंह ठाकुर के साहसिक कदम ने यह साबित कर दिया है कि वे सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि अनैतिक कामों के खिलाफ खड़े भी होते हैं।

अब देखना यह है कि जनता किस तरह का फैसला लेती है। क्या वे उन नेताओं को चुनेंगे जो सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देते हैं या प्रमोद सिंह ठाकुर जैसे नेता को जो पिछले दस साल से लगातार उनकी सेवा में लगे हैं। प्रभाग 10 का भविष्य इसी फैसले पर निर्भर करता है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।