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कल्याण-डोंबिवली नगर निगम: राज ठाकरे का बड़ा फैसला, शिंदे गुट को मिला MNS का समर्थन

MNS supports Shinde Sena: राज ठाकरे का उद्धव को झटका, MNS ने शिंदे को दिया समर्थन
MNS supports Shinde Sena: राज ठाकरे का उद्धव को झटका, MNS ने शिंदे को दिया समर्थन (File Photo)
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने शिवसेना शिंदे गुट को समर्थन देकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया। MNS के 5 पार्षदों के समर्थन से शिवसेना की संख्या 58 हो गई। भाजपा के साथ मिलकर महायुति का मेयर बनेगा। मेयर पद पर ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर चर्चा जारी। उद्धव गुट को बड़ा झटका।
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कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राजनीतिक उठापटक के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अपने पांच नगरसेवकों के साथ शिवसेना के शिंदे गुट को समर्थन देने का ऐलान किया है। यह फैसला खासतौर पर इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि राज ठाकरे की पार्टी और शिवसेना के बीच लंबे समय से राजनीतिक खींचतान रही है। इस समर्थन के साथ ही कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में सत्ता की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव के नतीजों में शिवसेना शिंदे गुट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। 122 सदस्यीय नगर निगम में शिवसेना को 53 सीटें मिली थीं। अब MNS के पांच पार्षदों के समर्थन से इनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है। यह संख्या बहुमत के काफी करीब है और महायुति के साथ मिलकर सत्ता गठन की राह और आसान हो गई है।

MNS का बड़ा राजनीतिक दांव

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने शिवसेना को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी हित के बजाय शहर के विकास को ध्यान में रखकर लिया गया है। पाटिल ने स्पष्ट किया कि कल्याण-डोंबिवली जैसे बड़े शहर को स्थिर प्रशासन की जरूरत है और इसीलिए उन्होंने शिवसेना का साथ देने का निर्णय लिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम राज ठाकरे की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हाल के विधानसभा चुनावों में MNS का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। ऐसे में स्थानीय निकाय स्तर पर सत्ता में भागीदारी उनकी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। साथ ही, यह कदम उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट को एक बड़ा झटका भी है।

 

नवी मुंबई में हुआ औपचारिक पंजीकरण

शिवसेना के सभी 53 नगरसेवक नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने अपने गुट का औपचारिक पंजीकरण कराया। इस दौरान MNS के पांच नगरसेवक भी वहां मौजूद थे और उन्होंने शिवसेना को समर्थन देने की कागजी कार्रवाई पूरी की। इस कार्यक्रम में कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे भी मौजूद रहे जिन्होंने इस समर्थन को शहर के विकास के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।

श्रीकांत शिंदे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत चुनाव लड़ा था और अब नगर निगम का मेयर भी महायुति से ही बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि MNS का समर्थन शहर के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उद्धव गुट के पार्षदों में भी हलचल

सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के 11 नगरसेवकों में से कुछ भी शिंदे गुट के संपर्क में हैं। अगर यह खबर सही साबित होती है तो शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत हो जाएगी। हालांकि, उद्धव गुट की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर 2-3 पार्षद भी शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो महायुति को बहुमत मिलना तय है।

यह स्थिति उद्धव ठाकरे के लिए चिंताजनक है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब स्थानीय निकायों में भी उनकी पकड़ कमजोर होती दिख रही है। कल्याण-डोंबिवली जैसे बड़े शहर में सत्ता से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा झटका होगा।

मेयर पद पर सस्पेंस बरकरार

हालांकि शिवसेना और MNS के गठबंधन ने सत्ता की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है, लेकिन मेयर पद को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। भाजपा की ओर से मेयर पद के लिए ढाई-ढाई साल के कार्यकाल का फॉर्मूला सामने रखा गया है। इसके तहत पहले ढाई साल एक पार्टी का और बाकी ढाई साल दूसरी पार्टी का मेयर बनेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। दोनों नेता मिलकर अंतिम फैसला लेंगे कि मेयर पद किस पार्टी को मिलेगा। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि शिवसेना अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में है लेकिन महायुति धर्म को निभाते हुए वह भाजपा के साथ तालमेल बनाकर चलना चाहती है।

भाजपा की रणनीति

भाजपा अपनी 22 सीटों के साथ नगर निगम में तीसरे स्थान पर रही है। लेकिन महायुति के तहत उसकी भूमिका बेहद अहम है। पार्टी चाहती है कि मेयर पद पर उसका भी हक बने और इसीलिए ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की मांग रखी गई है। अगर यह फॉर्मूला लागू होता है तो शुरुआती ढाई साल शिवसेना का और बाद के ढाई साल भाजपा का मेयर बन सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि MNS को इस समर्थन के बदले में क्या मिलेगा। क्या उन्हें डिप्टी मेयर का पद मिलेगा या फिर नगर निगम की अहम समितियों में जगह दी जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

आगे की राजनीति

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय खोल सकता है। MNS का शिंदे गुट को समर्थन देना यह संकेत देता है कि राज ठाकरे अब व्यावहारिक राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक विपक्ष में रहने के बाद अब वह सत्ता में भागीदारी के जरिए अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं।

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के लिए यह एक चेतावनी है कि उन्हें अपनी पार्टी को संगठित करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। विधानसभा चुनाव की हार के बाद अगर स्थानीय निकायों में भी उनकी हार होती है तो उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

आने वाले दिनों में केडीएमसी में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा जो इस पूरे घटनाक्रम को अंतिम रूप देगा। तब तक राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी रहेगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।