चुनाव से पहले गरमाई राजनीति
political dispute: महानगरपालिका चुनावों के नज़दीक आते ही महाराष्ट्र की राजनीति, खासकर ठाणे और नवी मुंबई क्षेत्र में, गरमाती जा रही है। राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच चल रही खींचतान अब खुली बयानबाज़ी में बदल गई है। इस विवाद में शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के के उतरने से सियासी माहौल और ज्यादा तीखा हो गया है।

सफाले के कार्यक्रम में नाईक का निशाना
political dispute: पालघर जिले के सफाले में आयोजित एक कार्यक्रम, जो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता उदय बंधू पाटिल के 75वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किया गया था, इस दौरान गणेश नाईक ने बिना नाम लिए एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ठाणे में शिवसेना का इतिहास सही तरीके से लोगों के सामने नहीं रखा जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने जीवन में मार्गदर्शन और शक्ति दी, उन्हें भुला देना कृतघ्नता है।
इतिहास के बहाने राजनीतिक संदेश
political dispute: अपने भाषण में नाईक ने ठाणे की शिवसेना के पुराने दौर का जिक्र करते हुए मो. दा. जोशी, सतीश प्रधान और साबिर शेख के बाद अपनी भूमिका और फिर आनंद दिघे के दौर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय युवा पीढ़ी बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर सत्ता के खिलाफ संघर्ष कर रही थी। उन्होंने आगे कहा, “हमारे हाथ और मन साफ हैं, हमें मौत का डर नहीं है।” उनके इस बयान को राजनीतिक तौर पर एकनाथ शिंदे पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि “कपटी मित्र से दिलदार दुश्मन बेहतर होता है,” जो दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है।

म्हस्के का पलटवार और तंज
political dispute: इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेश म्हस्के ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गणेश नाईक को ठाणे की शिवसेना का इतिहास नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि इसी इतिहास ने उन्हें राजनीतिक रूप से पराजित भी किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अधूरी जानकारी के आधार पर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। म्हस्के ने तंज कसते हुए कहा कि ठाणे महानगरपालिका के पास अत्याधुनिक कार्डिएक एंबुलेंस उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर नवी मुंबई में भी भेजी जा सकती है, क्योंकि तबीयत कभी भी बिगड़ सकती है। उनके इस बयान को गणेश नाईक पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है।
ठाणे बनाम नवी मुंबई: वर्चस्व की लड़ाई
political dispute: दरअसल, यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठाणे और नवी मुंबई में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी छिपी हुई है। एकनाथ शिंदे का ठाणे में मजबूत जनाधार माना जाता है, जबकि गणेश नाईक लंबे समय से नवी मुंबई की राजनीति में प्रभाव रखते आए हैं।
‘असली शिवसेना’ की सियासत और आगे की राह
political dispute: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “शिवसेना के इतिहास” को लेकर छिड़ी यह बहस दरअसल राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। एक ओर शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना साबित करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर विरोधी नेता उनके दावों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि यह टकराव फिलहाल थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में यह बयानबाज़ी और तेज हो सकती है, जिसका सीधा असर महानगरपालिका चुनावों की राजनीति पर पड़ने की संभावना है।