समाज के हक के लिए निरंतर प्रयास
महाराष्ट्र में रहने वाली भोयर, पवार समाज समेत कुल 27 जातियों के लोगों का एक लंबे समय से सपना है कि उन्हें केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की सूची में शामिल किया जाए। इस मांग को पूरा करने के लिए वर्धा लोकसभा क्षेत्र से सांसद अमर काले लगातार मेहनत कर रहे हैं। वे समाज के लोगों की आवाज बनकर संसद में और सरकारी दफ्तरों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
केंद्रीय ओबीसी सूची में नाम आने से इन समाजों के लोगों को केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। अभी ये समाज केवल राज्य स्तर पर ओबीसी में शामिल हैं, लेकिन केंद्रीय सूची में नाम न होने से उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं और नौकरियों में आरक्षण का फायदा नहीं मिल पाता है।
संसद में उठाया गया मुद्दा
सांसद अमर काले ने इस साल 26 मार्च 2025 को लोकसभा के शून्यकाल में इस विषय को लेकर सवाल उठाया था। शून्यकाल वह समय होता है जब सांसद बिना किसी पूर्व सूचना के जरूरी और तत्काल मामलों को सदन में रख सकते हैं। इस दौरान सांसद काले ने महाराष्ट्र की 27 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में जल्द से जल्द शामिल करने की मांग की थी।
उनके इस प्रयास का कुछ असर हुआ और केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से 25 अप्रैल 2025 को एक पत्र आया। इस पत्र में मंत्रालय ने बताया कि इस मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन दुख की बात यह रही कि उसके बाद लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

आठ महीने की प्रतीक्षा के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
अप्रैल में पत्र मिलने के बाद भी जब आठ महीने तक मंत्रालय की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज के लोगों में निराशा बढ़ने लगी। इसी निराशा को दूर करने और सरकार को याद दिलाने के लिए 17 दिसंबर 2025 को महाराष्ट्र ओबीसी कृती समिति और पवार मिशन टीम के सदस्य दिल्ली गए।
दिल्ली में इन संगठनों ने सांसद अमर काले को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में समाज की मांगों और परेशानियों का विस्तार से उल्लेख किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि सरकार को इस मामले में तुरंत कदम उठाना चाहिए।
सांसद काले की सक्रियता
ज्ञापन मिलते ही सांसद अमर काले ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्रकुमार खाटिक से मुलाकात की। यह मुलाकात लोकसभा भवन में ही हुई और दोनों ने इस विषय पर लंबी और विस्तृत बातचीत की।
सांसद काले ने मंत्री जी को समझाया कि महाराष्ट्र की इन 27 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करना न केवल जरूरी है बल्कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ये समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री का आश्वासन
सांसद अमर काले के लगातार प्रयासों का नतीजा आखिरकार सामने आया। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्रकुमार खाटिक ने 30 दिसंबर 2025 को सांसद काले को एक पत्र दिया। इस पत्र में बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 (अ) और (क) के अंतर्गत इस मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
यह पत्र समाज के लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण लेकर आया है। संविधान के अनुच्छेद 342 (अ) में अनुसूचित जातियों की सूची और अनुच्छेद 342 (क) में पिछड़े वर्गों की सूची के बारे में प्रावधान हैं। इन अनुच्छेदों के तहत किसी भी समुदाय को इन सूचियों में शामिल करने की प्रक्रिया होती है।
शून्यकाल में दोबारा मौका नहीं मिला
सांसद अमर काले इस मुद्दे को और अधिक मजबूती से उठाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इसी संसद सत्र में दोबारा शून्यकाल में बोलने के लिए समय मांगा। वे चाहते थे कि पूरे सदन के सामने इस विषय पर विस्तार से चर्चा हो और सरकार को इसकी गंभीरता का एहसास हो।
लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें शून्यकाल में बोलने का मौका नहीं मिल पाया। संसद में हर दिन बहुत से सांसद अलग-अलग मुद्दों पर बोलना चाहते हैं और सीमित समय के कारण सभी को मौका नहीं मिल पाता है।
केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल होने के फायदे
अगर भोयर, पवार और अन्य 27 जातियां केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल हो जाती हैं तो इससे इन समाजों के लाखों लोगों को फायदा होगा। केंद्र सरकार की सभी नौकरियों में उन्हें आरक्षण मिलेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में प्रवेश में भी उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में भी उन्हें प्राथमिकता मिल सकेगी। यह उनके आर्थिक और सामाजिक विकास में एक बड़ा कदम होगा।
संविधान के प्रावधान और प्रक्रिया
भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों की सूची बनाने और उसमें बदलाव करने की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है। किसी भी जाति या समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए राज्य सरकार को पहले अपनी सिफारिश भेजनी होती है।
उसके बाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इस पर विचार करता है और अपनी राय देता है। फिर यह मामला सामाजिक न्याय मंत्रालय और गृह मंत्रालय के पास जाता है। अंत में मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद संसद में इसे पारित करवाना होता है।
यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसीलिए सांसद अमर काले लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि यह काम जल्द से जल्द पूरा हो सके।
आगे का रास्ता
अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस मामले पर कितनी तेजी से काम करती है। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू करने का पत्र दे दिया है, लेकिन असली काम तो अब शुरू होगा।
सांसद अमर काले ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को छोड़ने वाले नहीं हैं। वे लगातार प्रयास करते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से भी मुलाकात करेंगे।
समाज के संगठन भी सांसद का साथ दे रहे हैं। वे समय-समय पर दिल्ली जाकर और स्थानीय स्तर पर आंदोलन करके इस मुद्दे को जिंदा रखे हुए हैं।
अखिल भारतीय भोयर पवार महासंघ के सचिव मोरेश्वर भादे के अनुसार, समाज के लोग पूरी तरह से आशावादी हैं। उन्हें विश्वास है कि सांसद अमर काले के नेतृत्व में उनका यह संघर्ष जरूर सफल होगा और जल्द ही वे केंद्रीय ओबीसी सूची में अपना नाम देख पाएंगे।