महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में एक के बाद एक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले सामने आ रहे हैं। आर्णी तालुका के शेंदूरसनी ग्राम पंचायत में हजारों रोहिंग्याओं के नाम पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले मुख्य आरोपी ने अब एक और बड़ा खुलासा किया है। उसने बताया है कि उमरखेड़ तालुका के रामपुर गांव में भी करीब 5400 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और जांच के लिए एक विशेष दल को बिहार भेजा गया है।
फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल
यह मामला तब शुरू हुआ जब शेंदूरसनी ग्राम पंचायत में हजारों संदिग्ध जन्म प्रमाणपत्र दर्ज मिले। जांच में पता चला कि ये प्रमाणपत्र रोहिंग्याओं और अन्य विदेशी नागरिकों के नाम पर बनाए गए थे। इस पूरे खेल के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। जब मुख्य आरोपी को पकड़ा गया और पूछताछ की गई, तो उसने उमरखेड़ के रामपुर गांव में भी इसी तरह के फर्जी दस्तावेज बनाने की बात स्वीकार की।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह पैसे लेकर लोगों को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रहा था। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य सरकारी दस्तावेज बनाने में किया जा रहा था। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है, बल्कि देश की नागरिकता व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
मास्टर माइंड की गिरफ्तारी
शेंदूरसनी मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी ने पुलिस को बताया कि रामपुर गांव की ग्राम पंचायत में भी इसी तरह का खेल चलाया गया। उसने कबूल किया कि वहां करीब 5400 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र दर्ज किए गए हैं। इन प्रमाणपत्रों में ज्यादातर उन लोगों के नाम हैं जो महाराष्ट्र के मूल निवासी नहीं हैं।
आरोपी ने यह भी बताया कि यह काम कई सालों से चल रहा था और इसमें ग्राम पंचायत के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी। बिना उनकी मदद के इतनी बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बनाना संभव नहीं था। इन कर्मचारियों को पैसे देकर रजिस्टर में गलत जानकारी दर्ज कराई जाती थी।
पुलिस दल बिहार रवाना
इस बड़े खुलासे के बाद यवतमाल पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक विशेष जांच दल गठित किया है। यह दल बिहार के लिए रवाना हो गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में पता चला है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनमें से कई लोग बिहार और देश के अन्य राज्यों से आए हैं।
पुलिस दल का काम यह पता लगाना है कि ये लोग वास्तव में कौन हैं और उन्होंने किस उद्देश्य से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बिहार में मौजूद आरोपियों और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जाएगी।
ग्राम पंचायत कर्मचारियों पर शिकंजा
पुलिस ने रामपुर ग्राम पंचायत के उन कर्मचारियों की पहचान शुरू कर दी है जिन्होंने इस फर्जीवाड़े में मदद की। इनमें से कुछ कर्मचारियों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। अगर उनकी संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। जिला कलेक्टर ने सभी ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए हैं। यह देखा जाएगा कि और कहीं ऐसे फर्जी प्रमाणपत्र तो नहीं बनाए गए हैं। जिले भर में चल रही सभी ग्राम पंचायतों के जन्म-मृत्यु रजिस्टर की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल
यह मामला सिर्फ कागजी फर्जीवाड़ा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। रोहिंग्याओं और अन्य विदेशी नागरिकों को फर्जी भारतीय दस्तावेज मुहैया कराना एक गंभीर अपराध है। इससे देश की सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा दोनों को खतरा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और अवैध व्यापार में किया जा सकता है। इसलिए इस मामले की गहराई से जांच जरूरी है। केंद्र सरकार को भी इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और राज्यों में ऐसे मामलों की निगरानी के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
प्रशासनिक सुधार की जरूरत
इस पूरे प्रकरण से यह साफ हो गया है कि ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के रखरखाव में बड़ी कमियां हैं। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी ग्राम पंचायतों में डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। हर प्रमाणपत्र को आधार से जोड़ा जाना चाहिए और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होना चाहिए। इससे फर्जी दस्तावेज बनाना मुश्किल हो जाएगा।
आगे की कार्रवाई
यवतमाल पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सभी संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की जा रही है। जो लोग फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर भारतीय नागरिक बने हैं, उनकी नागरिकता रद्द की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि यह एक बड़ा मामला है और इसमें कई और लोग फंस सकते हैं। अभी तक जो जानकारी मिली है, उसके आधार पर यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ लग रहा है। सभी सुरागों की गहराई से जांच की जा रही है।
जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बरतते हुए सभी तालुका कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे मामलों की जांच करें। अगर कहीं भी फर्जी दस्तावेज मिलते हैं, तो तुरंत पुलिस को सूच��त किया जाए।
यह पूरा मामला यह दिखाता है कि सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और उनकी जांच में कितनी लापरवाही बरती जा रही है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती से काम करे और ऐसे फर्जीवाड़े करने वालों को सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे।