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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ससुराल गांव की यात्रा की, जहिरा पीठ और गोसानी में पूजा कर आशीर्वाद लिया

President Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ससुराल गांव में की पूजा और ग्रामीणों से मिलीं
President Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ससुराल गांव में की पूजा और ग्रामीणों से मिलीं (File Photo)

President Droupadi Murmu: ओडिशा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर यात्रा के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने ससुराल गांव झारपुर का दौरा किया। उन्होंने पति की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी, जहिरा पीठ और गोसानी में पूजा की, जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए और ग्रामीणों, युवाओं तथा महिलाओं से बातचीत की। यह यात्रा आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करती है।

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President Droupadi Murmu: ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित रायरंगपुर की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने ससुराल गांव झारपुर का दौरा किया। यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि इसमें उनकी जड़ों से जुड़ाव, आदिवासी परंपराओं के प्रति सम्मान और अपने परिवार के प्रति श्रद्धांजलि की झलक दिखाई दी। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा किया और स्थानीय लोगों के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित किया।

राष्ट्रपति की यात्रा का आरंभ और स्मृति विद्यालय का दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच रायरंगपुर स्थित अपने आवास से झारपुर के लिए रवाना हुईं। उन्होंने सबसे पहले कुसुमी ब्लॉक के पहाड़पुर में बने एसएलएस मेमोरियल आवासीय विद्यालय का दौरा किया। यह विद्यालय उनके स्वर्गीय पुत्र और पति की याद में बनाया गया है। यहां उनका स्वागत पारंपरिक आदिवासी नृत्य और गीतों के साथ किया गया। स्थानीय युवाओं ने उन्हें अपनी संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन दिखाया। राष्ट्रपति ने विद्यालय में स्थानीय युवाओं से बातचीत की और उनके जीवन, शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना।

पति की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि

एसएलएस विद्यालय से निकलने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू गांव की सड़कों पर पैदल चलकर मुर्मू चाक पहुंचीं, जहां उनके पति नैनत श्यामचरण मुर्मू की प्रतिमा स्थापित है। उन्होंने अपने स्वर्गीय पति की प्रतिमा पर दीप और धूप जलाई और पुष्पांजलि अर्पित की। यह क्षण भावनात्मक रूप से बेहद खास था, जहां देश की राष्ट्रपति ने अपने निजी जीवन के दुख को याद करते हुए भी गरिमा और संयम बनाए रखा। उनके चेहरे पर पति के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी।

गोसानी पीठ में पूजा और ग्रामीणों से मुलाकात

पति की प्रतिमा को श्रद्धांजलि देने के बाद राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय के देवता गोसानी पीठ पहुंचीं। यह स्थान आदिवासी समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां गांव के लोगों ने पारंपरिक संताली रीति-रिवाजों के अनुसार उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने गोसानी पीठ पर देवता का आशीर्वाद लिया और ग्रामीणों के साथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया। उन्होंने गांव के बच्चों को चॉकलेट बांटे, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। यह दृश्य राष्ट्रपति की सरलता और जमीन से जुड़ाव को दर्शाता है।

जहिरा पीठ में आदिवासी परंपरा का सम्मान

गोसानी पीठ से आगे बढ़कर राष्ट्रपति मुर्मू एक विशेष शोभायात्रा के साथ गांव के संताली पूजा स्थल जहिरा पीठ पहुंचीं। जहिरा आदिवासी समाज में मुंडिया मारी जहिरा आयो (जहिरा माई) के रूप में पूजी जाने वाली देवी हैं। यहां पुजारी नाइके बाबा की उपस्थिति में राष्ट्रपति ने जहिरा माई का आशीर्वाद लिया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के साथ बातचीत की। राष्ट्रपति ने महिलाओं से उनके सुख-दुख के बारे में पूछा और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। यह उनकी महिला सशक्तिकरण और समाज कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कौशल विकास केंद्र का दौरा

जहिरा पीठ के बाद राष्ट्रपति पहाड़पुर गांव के कौशल विकास केंद्र पहुंचीं। यहां उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे छात्रों से बातचीत की और उनके काम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने युवाओं को कौशल विकास के महत्व के बारे में बताया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने हुनर को निखारें और समाज के विकास में योगदान दें।

एसएलएस विद्यालय में फिर से बातचीत

कौशल विकास केंद्र के बाद राष्ट्रपति फिर से एसएलएस मेमोरियल आवासीय विद्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने ग्रामीणों, स्कूल के शिक्षकों और छात्रों से विस्तृत बातचीत की। उन्होंने विद्यालय के विकास और छात्रों की शिक्षा के बारे में जानकारी ली। राष्ट्रपति ने शिक्षकों की मेहनत की सराहना की और छात्रों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

जगन्नाथ मंदिर में पूजा और सेवकों को भोजन

President Droupadi Murmu: विद्यालय से निकलकर राष्ट्रपति रायरंगपुर के श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचीं। मंदिर में विशेष पूजा की व्यवस्था की गई थी। राष्ट्रपति ने जगन्नाथ भगवान के दर्शन किए और पूजा की। उन्होंने मंदिर के सेवकों को भोजन कराया और उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों से भी उन्होंने मुलाकात की। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद राष्ट्रपति ने स्वयं प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर से निकलने के बाद वे अपने आवास पहुंचीं और वहां कुछ देर आराम किया।

सिमिलीपाल की ओर प्रस्थान

आराम के बाद राष्ट्रपति यशिपुर की ओर रवाना हुईं। यहां से उनकी सिमिलीपाल अभयारण्य जाने की योजना है, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगी। यह दौरा राष्ट्रपति मुर्मू की अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है। उन्होंने यह साबित किया कि पद की ऊंचाई व्यक्ति को अपनी मिट्टी से दूर नहीं करती।

आदिवासी संस्कृति का सम्मान और समाज से जुड़ाव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था। इसमें आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का गहरा सम्मान दिखाई दिया। उन्होंने हर जगह लोगों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें प्रेरित किया। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के साथ उनकी बातचीत ने यह संदेश दिया कि विकास में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। राष्ट्रपति की यह यात्रा ओडिशा के आदिवासी समाज के लिए गौरव का विषय है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।