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कोटा में एक और छात्रा ने की आत्महत्या, नीट की तैयारी के दौरान जहर खाकर दम तोड़ा

Kota NEET Student Suicide: कोटा में नीट की तैयारी कर रही छात्रा ने जहर खाकर दी जान, शिक्षा दबाव पर फिर सवाल
Kota NEET Student Suicide: कोटा में नीट की तैयारी कर रही छात्रा ने जहर खाकर दी जान, शिक्षा दबाव पर फिर सवाल (File Photo)

Kota NEET Student Suicide: राजस्थान के कोटा में नीट की तैयारी कर रही छत्तरपुर की छात्रा जूही पटेल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। ढाई महीने पहले कोटा आई जूही ऑनलाइन पढ़ाई कर रही थी। देर रात जहर खाने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस जांच जारी है।

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कोटा में छात्रों की आत्महत्या का सिलसिला जारी

Kota NEET Student Suicide: राजस्थान का कोटा शहर एक बार फिर से छात्रों की आत्महत्या के मामले में सुर्खियों में आ गया है। देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मशहूर इस शहर में एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। मध्य प्रदेश के छतरपुर से नीट की तैयारी करने आई एक छात्रा ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना कोटा में छात्रों के बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव की ओर इशारा करती है। पिछले कुछ सालों में कोटा में छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के दबाव पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

जूही पटेल ने ली अपनी जान

मृतक छात्रा की पहचान जूही पटेल के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की रहने वाली थी। वह कोटा में नीट की ऑनलाइन तैयारी कर रही थी। करीब ढाई महीने पहले ही वह अपनी पढ़ाई के लिए कोटा आई थी और सेल्फ स्टडी के साथ ऑनलाइन टेस्ट सीरीज में भी शामिल थी। जूही ने देर रात को जहर खा लिया था और जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसने अपने पास के कमरे में रहने वाले भाई और बहन को इसकी जानकारी दी। तुरंत मकान मालिक को भी बुलाया गया और छात्रा को फौरन मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।

इलाज के दौरान हुई मौत

अस्पताल में इलाज के दौरान जूही ने अपनी आखिरी सांस ली। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जहर का असर इतना गहरा था कि उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। दादाबाड़ी थाना पुलिस ने मामले की जानकारी मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी और छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया। शुक्रवार को परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर कोटा में छात्रों की मानसिक स्थिति और उन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

छात्रा ने खुद मांगी थी मदद

मृतक छात्रा के रिश्ते में लगने वाले एक भाई ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देर रात जब जूही की तबीयत बिगड़ी तो उसने खुद ही अपने पास के कमरे में रहने वाले भाई और बहन को आवाज लगाई। उसने बताया कि उसने जहर खा लिया है और उसे बचाया जाए। यह सुनकर सभी घबरा गए और तुरंत मकान मालिक को भी बुलाया गया। उसके बाद बिना देर किए छात्रा को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने भरपूर प्रयास किए, लेकिन जूही को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई।

एक साल पहले भी कोटा में की थी पढ़ाई

जूही के भाई ने बताया कि करीब एक साल पहले भी वह कोटा में रहकर नीट की कोचिंग कर चुकी थी। इस बार वह सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज के लिए अपनी मर्जी से ही कोटा आई थी। उसने किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया था, बल्कि घर पर रहकर खुद से पढ़ाई कर रही थी और ऑनलाइन माध्यम से अपनी तैयारी को मजबूत बना रही थी। परिवार वाले बताते हैं कि वह पढ़ाई में अच्छी थी और अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर रहती थी। लेकिन किन परिस्थितियों में उसने यह कदम उठाया, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर बढ़ती चिंता

कोटा में पिछले कुछ सालों से छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यहां देश भर से लाखों छात्र आईआईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा, परीक्षा का दबाव, परिवार की उम्मीदें और अकेलापन कई बार छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देता है। हर साल दर्जनों छात्र अवसाद और तनाव के कारण अपनी जान दे देते हैं। यह स्थिति न सिर्फ परिवारों के लिए दर्दनाक है, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन गई है।

प्रशासन और कोचिंग संस्थानों की भूमिका

कोटा प्रशासन और कोचिंग संस्थानों ने छात्रों की मानसिक सेहत के लिए कई कदम उठाए हैं। काउंसलिंग सेवाएं, हेल्पलाइन नंबर और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद आत्महत्या के मामले थम नहीं रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ काउंसलिंग काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव, परीक्षा के दबाव को कम करना और छात्रों को भावनात्मक सहारा देने की जरूरत है। माता-पिता को भी अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए और उनकी मानसिक स्थिति को समझना चाहिए।

परिवार और समाज की जिम्मेदारी

इस तरह की घटनाओं में परिवार और समाज की भूमिका भी बहुत अहम होती है। बच्चों को सफलता के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है, लेकिन असफलता को भी स्वीकार करने की समझ विकसित करनी चाहिए। छात्रों को यह एहसास दिलाना जरूरी है कि एक परीक्षा में नाकामी जीवन का अंत नहीं है। माता-पिता को अपने बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। अगर कोई बच्चा तनाव में दिखे तो उसे तुरंत मनोवैज्ञानिक सहायता दिलानी चाहिए।

पुलिस जांच जारी

वर्तमान में दादाबाड़ी थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस परिजनों से जूही की मानसिक स्थिति, उसके रहन-सहन और किसी भी असामान्य व्यवहार के बारे में जानकारी जुटा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या किसी ने उसे परेशान किया था या फिर पढ़ाई का दबाव ही इस कदम की वजह बना। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है और आगे की जांच जारी है। अभी तक किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन जांच के दौरान नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना जरूरी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे छात्रों पर अक्सर बहुत अधिक दबाव होता है। उन्हें अकेलापन, घर से दूर रहने की मुश्किलें, परीक्षा का डर और परिवार की उम्मीदों का बोझ झेलना पड़ता है। ऐसे में मानसिक सहयोग और सही मार्गदर्शन की बहुत जरूरत होती है। कोचिंग संस्थानों, शिक्षकों और परिवार को मिलकर छात्रों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

समाधान की दिशा में कदम

Kota NEET Student Suicide: कोटा में छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। शिक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षा प्रणाली को छात्र-केंद्रित बनाना, नियमित काउंसलिंग, पेरेंट्स वर्कशॉप और छात्रों के बीच सकारात्मक माहौल बनाना जरूरी है। सरकार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर इस समस्या का हल निकालना होगा। हर छात्र की जिंदगी कीमती है और किसी भी परीक्षा से बढ़कर नहीं है। जूही जैसी और जिंदगियों को बचाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा और छात्रों को यह संदेश देना होगा कि असफलता भी जीवन का एक हिस्सा है और उससे सीखकर आगे बढ़ा जा सकता है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।