तमिलगा वेत्री कषगम के संस्थापक और प्रमुख विजय ने करूर भगदड़ त्रासदी के सिलसिले में आज नई दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो मुख्यालय में हाजिरी दी। इस दुखद घटना में 41 लोगों की जान चली गई थी। यह घटना पिछले साल सितंबर महीने में हुई थी जब पार्टी की ओर से एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था।
जांच में सहयोग के लिए पहुंचे विजय
अभिनेता से राजनेता बने विजय ने सीबीआई के समन का पालन करते हुए जांच एजेंसी के मुख्यालय में पेश हुए। सूत्रों के अनुसार विजय से करूर में हुई उस घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की जा रही है जिसमें भारी संख्या में लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है क्योंकि विजय ने हाल ही में सक्रिय राजनीति में कदम रखा है।
क्या थी करूर भगदड़ त्रासदी
सितंबर 2024 में तमिलनाडु के करूर जिले में तमिलगा वेत्री कषगम पार्टी की ओर से एक बड़ी रैली आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अभिनेता विजय का राजनीति में स्वागत करना था। हजारों की संख्या में समर्थक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। भारी भीड़ के कारण प्रबंधन में कमी आ गई और अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 41 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए।
राज्य सरकार की कार्रवाई और सीबीआई जांच
घटना के तुरंत बाद तमिलनाडु सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। हालांकि मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक पहलू को ध्यान में रखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगालना शुरू किया। जांच एजेंसी ने कार्यक्रम के आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और अन्य जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की जांच की है।
पार्टी संगठन की जिम्मेदारी
तमिलगा वेत्री कषगम एक नई राजनीतिक पार्टी है जिसकी स्थापना विजय ने की है। यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम था जिसमें इतनी भारी भीड़ जुटी थी। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या पार्टी संगठन ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की थी या नहीं। क्या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त स्वयंसेवक और सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। जांच में इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की भी भूमिका सवालों के घेरे में आई है। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए अनुमति दी थी। सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने भीड़ के अनुमान के आधार पर पर्याप्त सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की थी। पुलिस बल की तैनाती किस हद तक थी और क्या आपातकालीन सेवाएं तैयार थीं। सीबीआई इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
विजय की राजनीतिक यात्रा
विजय तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में राजनीति में रुचि दिखाई और अंततः अपनी पार्टी की घोषणा की। उनके प्रशंसकों की विशाल संख्या है जो उन्हें राजनीतिक नेता के रूप में देखना चाहते हैं। करूर की रैली उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत थी लेकिन यह त्रासदी एक बड़ा धक्का साबित हुई।
परिवारों को मुआवजे की घोषणा
घटना के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजे की घोषणा की थी। घायलों के इलाज का खर्च भी सरकार ने वहन करने का आश्वासन दिया। विजय ने भी व्यक्तिगत रूप से पीड़ित परिवारों से मिलने और सहायता देने की बात कही थी। हालांकि राजनीतिक विरोधियों ने इसे एक गंभीर लापरवाही करार दिया और जवाबदेही की मांग की।
कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई
सीबीआई की जांच के आधार पर यह तय होगा कि किस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि आयोजकों की लापरवाही से यह घटना हुई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। विजय की पूछताछ इस प्रक्रिया का एक हिस्सा है। उनसे घटना की योजना, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंधकीय पहलुओं के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर विजय और उनकी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि एक नई पार्टी को बड़े कार्यक्रम आयोजित करने से पहले पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए। वहीं विजय के समर्थकों ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है और कहा है कि पूरी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
जनता की भावना
तमिलनाडु की जनता इस घटना से गहरे सदमे में है। 41 लोगों की मौत एक बड़ी त्रासदी है। लोग चाहते हैं कि सच सामने आए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। राजनीतिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग उठ रही है।
विजय का सीबीआई मुख्यालय पहुंचना जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना होगा कि जांच किस नतीजे पर पहुंचती है और इस त्रासदी के लिए कौन जिम्मेदार ठहराया जाता है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विजय के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।