उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस करके भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एसआईआर के बहाने सरकार लोगों के वोट डालने का अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। इस दौरान अखिलेश यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को लेकर बने गानों का जिक्र करते हुए खुद को भी सावधान किया।
एसआईआर है संविधान पर हमला
सपा मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि यह एसआईआर कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है बल्कि एक सोची समझी साजिश और रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान दिया, उसके तहत हमें वोट डालने का जो अधिकार मिला है, उसी अधिकार को छीनने की तैयारी की जा रही है। अखिलेश ने कहा कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर एसआईआर के बहाने लोगों के मतदान के अधिकार को खत्म करने की योजना बना रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह सिर्फ वोट का मामला नहीं है। सरकार आरक्षण छीनना चाहती है, लोगों की पहचान मिटाना चाहती है और उन पर उल्टे सीधे दबाव बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान की रक्षा की बात करते हैं, वही लोग आज संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार के गानों से सीख लेते हुए अखिलेश सावधान
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने एक दिलचस्प बात कही जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी को लेकर बने गानों का जिक्र किया। अखिलेश ने कलाकारों से अपील करते हुए कहा कि बिहार में आरजेडी के लिए जैसे गाने बने थे, वैसे गाने समाजवादी पार्टी के लिए मत बनाना। उन्होंने पत्रकारों से भी निवेदन किया कि अगर कोई ऐसा गाना बनाए तो उसे सपा का गाना मत बता देना।
बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आरजेडी को लेकर कई रंगबाजी वाले गाने बाजार में आए थे। इन गानों को लेकर आरजेडी ने अपनी हार का एक कारण इन्हीं गानों को माना था। पार्टी ने 32 गायकों को नोटिस भी भेजा था और आरोप लगाया था कि इन गायकों ने जान-बूझकर पार्टी को बदनाम करने के लिए गाने बनाए।
आरजेडी ने गायकों को भेजे थे नोटिस
आरजेडी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बताया था कि चुनाव से पहले राजद को बदनाम करने के लिए जानबूझकर कई गीत बाजार में लॉन्च किए गए। पार्टी या दल के नेताओं का नाम लेकर गाने बनाए गए। इनमें अधिकतर ऐसे गायक थे जिनका भाजपा से सीधा संबंध था। इन गानों से आरजेडी और तेजस्वी प्रसाद यादव दोनों की बदनामी हुई।
पार्टी ने गायकों को नोटिस भेजकर कहा था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरजेडी का कहना था कि बिना अनुमति पार्टी, लालू प्रसाद या तेजस्वी यादव का नाम लेकर गाना गाया जाना मानहानि के दायरे में आएगा। पार्टी की पहचान वाले झंडे, चिह्न या नारों का प्रयोग मनोरंजन सामग्री, रील्स या गानों में करना अवैध माना जाएगा।
बीएलओ की मौत पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने 14 नवंबर को मस्तिष्काघात से मृत बूथ स्तरीय अधिकारी विजय कुमार वर्मा के मामले को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के लोग दबाव बना रहे हैं कि वर्मा ड्यूटी पर नहीं थे और पहले से बीमार थे। लेकिन मृतक के परिजनों ने मीडिया के सामने कहा कि वर्मा शिक्षा मित्र थे और उनकी ड्यूटी बीएलओ में लगाई गई थी।
परिजनों के अनुसार 14 तारीख को रात 11 बजे वर्मा अपना काम कर रहे थे, तभी कुर्सी से गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मस्तिष्काघात बताया। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि एक अधिकारी ने कहा कि वह पहले से कार्यमुक्त थे, लेकिन 14 तारीख को काम किया तो कार्यमुक्त कैसे हो गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली और झूठा आरोप लगाया जा रहा है।
भाजपा और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि आखिर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा मिले हुए हैं और दोनों जल्दबाजी कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश में लगातार शादियां हो रही हैं और शादियों के समय लोग व्यस्त रहते हैं। इतने कम समय में पूरे प्रदेश का एसआईआर कराने की क्या आवश्यकता है।
उन्होंने व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कहा कि नगर पालिका के सफाईकर्मियों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। फॉर्म में तकनीकी बातें हैं और बीएलओ का सहायक सफाई कर्मचारी को बनाया गया है। अखिलेश ने कहा कि सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि सभी फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।
विपक्ष का एकजुट विरोध
उत्तर प्रदेश में एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। सपा के अलावा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसके जरिए खास समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
सपा ने मांग की है कि एसआईआर की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और इसकी निष्पक्ष जांच हो। पार्टी ने कहा है कि अगर सरकार ने यह प्रक्रिया नहीं रोकी तो वह सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी लोगों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।