समाज में एकता और सद्भाव की जरूरत
Mohan Bhagwat Lucknow RSS event: लखनऊ के निराला नगर में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक खास सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शिरकत की और समाज के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज के समय में हिन्दू समाज को संगठित और सशक्त होने की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें किसी से कोई खतरा नहीं है, लेकिन सजग और सावधान रहना बेहद जरूरी है।
भेदभाव की जड़ें मिटाना जरूरी
डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में समाज में बढ़ते भेदभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब सद्भाव नहीं रहता, तो समाज में भेदभाव की भावना पनपने लगती है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि हम सभी एक ही देश की संतान हैं, एक ही मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक जैसे हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में हमारे समाज में इतना भेद नहीं था, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और भेदभाव की आदत समाज में घर करती गई।
सनातन विचारधारा सद्भाव की नींव
सरसंघचालक ने सनातन विचारधारा की व्याख्या करते हुए कहा कि यह सद्भाव पर आधारित विचारधारा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी सोच में विरोधियों को मिटाना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलना है। यह हमारी परंपरा का हिस्सा है कि एक ही सत्य हर जगह मौजूद है। हमें इस बात को समझना होगा कि विविधता में एकता ही हमारी असली ताकत है।
संघ शताब्दी वर्ष का महत्व
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित किया गया था। संघ ने पिछले सौ सालों में देशभर में अपना काम किया है और समाज को जोड़ने का प्रयास किया है। इस खास मौके पर लखनऊ में यह बैठक आयोजित करना संघ के लिए महत्वपूर्ण था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, समाजसेवी और आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने डॉ. भागवत के विचारों को ध्यान से सुना और उनसे प्रेरणा ली।
समाज को जागरूक बनाने का आह्वान
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज को जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें किसी से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। आज के दौर में जब समाज में तरह-तरह की विचारधाराएं काम कर रही हैं, तब हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने युवाओं से खासतौर पर अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझें और उन्हें आगे बढ़ाएं।
एकता ही सबसे बड़ी ताकत
संघ प्रमुख ने समाज को संदेश दिया कि एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अगर हिन्दू समाज संगठित होकर काम करेगा, तो कोई भी चुनौती उसे डिगा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि हमें आपस में मिलकर रहना है, एक-दूसरे का सम्मान करना है और समाज की भलाई के लिए काम करना है। यही हमारी परंपरा रही है और यही हमारा भविष्य भी है।
लखनऊ में उत्साह का माहौल
कार्यक्रम के दौरान लखनऊ में उत्साह का माहौल देखा गया। सरस्वती शिशु मंदिर के परिसर में सैकड़ों लोग जुटे थे। स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वहीं, संघ के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था को सुचारू रूप से संभाला। कार्यक्रम की शुरुआत वेद मंत्रों से हुई और अंत में राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ। उपस्थित लोगों ने डॉ. भागवत के विचारों को सराहा और उन्हें लागू करने का संकल्प लिया।
समाज निर्माण की दिशा में कदम
Mohan Bhagwat Lucknow RSS event: डॉ. मोहन भागवत के इस संबोधन को समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके विचार केवल हिन्दू समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने बताया कि जब समाज में सद्भाव होगा, तो विकास अपने आप होगा। लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर रहना होगा, तभी देश मजबूत बनेगा।
संघ शताब्दी वर्ष के इस कार्यक्रम ने समाज को एक नई दिशा दी है। लखनऊ में आयोजित यह बैठक समाज में एकता और सद्भाव बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। डॉ. भागवत के विचारों को अगर समाज अपनाता है, तो निश्चित रूप से हिन्दू समाज और भी संगठित व सशक्त बनेगा।